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'एक हफ्ते में जवाब दें, सोनिया गांधी...', नागरिकता से पहले मतदाता सूची में कैसे आया नाम? 16 मई को अगली सुनवाई

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट मामले में सुनवाई हुई. कोर्ट ने एक हफ्ते में जवाब मांगा, जबकि याचिकाकर्ता ने नागरिकता से पहले नाम जुड़ने का आरोप लगाया है. अगली सुनवाई 16 मई को होगी.

'एक हफ्ते में जवाब दें, सोनिया गांधी...', नागरिकता से पहले मतदाता सूची में कैसे आया नाम? 16 मई को अगली सुनवाई
Image Source: IANS (File Photo)
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दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में शनिवार को एक अहम मामले की सुनवाई हुई, जिसमें वोटर लिस्ट में नाम शामिल किए जाने को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई है. कोर्ट ने इस मामले में सोनिया गांधी के वकील को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. वहीं याचिकाकर्ता की ओर से अपनी सभी दलीलें कोर्ट के सामने रख दी गई हैं. मामले ने अब कानूनी और राजनीतिक दोनों ही हलकों में हलचल बढ़ा दी है.

याचिकाकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

इस केस में याचिकाकर्ता ने सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि भारत की नागरिकता मिलने से पहले ही गलत तरीके से उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करा लिया गया था. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग की एक रिपोर्ट को अदालत में पेश करने की अनुमति दी जाए, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके.

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बचाव पक्ष भी पेश करेगा सबूत

वहीं सोनिया गांधी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे अपने मुवक्किल के पक्ष में कुछ अहम सबूत पेश करना चाहते हैं. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की है. इससे पहले 30 मार्च को भी इस मामले की सुनवाई हुई थी, जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया था.

क्या है पूरा मामला?

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दरअसल, यह मामला कई साल पुराना बताया जा रहा है. याचिकाकर्ता वकील विकास त्रिपाठी के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम वर्ष 1980 में ही मतदाता सूची में दर्ज हो गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 1983 में मिली थी. उनका कहना है कि 1980 में नाम जुड़ने के बाद 1982 में इसे हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि नागरिकता से पहले उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे दर्ज हुआ.

फर्जीवाड़े का आरोप

याचिकाकर्ता का आरोप है कि उस समय राजनीतिक प्रभाव और कथित फर्जीवाड़े के चलते यह नाम जोड़ा गया था. इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां इस विवादित मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है.

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बताते चलें कि यह मामला अब कानूनी रूप से अहम मोड़ पर पहुंच गया है. कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों के आधार पर ही आगे की दिशा तय होगी. 16 मई की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां इस विवाद पर कोई अहम फैसला या नई दिशा सामने आ सकती है.

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