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PM मोदी के दोस्त ने भारत के लिए खोले द्वार, भर-भरकर भेजा ‘काला सोना’ होर्मुज संकट के बीच बड़ी राहत
ईरान पर अमेरिका के हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से व्यापार बाधित हो गया, ट्रंप की बार-बार चेतावनी के बाद भी ईरान होर्मुज खोलने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में दुनिया के सामने उर्जा संकट खड़ा हो गया है.
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Coal Import From Russia: रूस और भारत की दोस्ती सदियों पुरानी है. इस गाढ़ी और पुरानी दोस्ती का ही नतीजा है कि रूस और भारत हमेशा मुश्किल में एक दूसरे की मदद से पीछे नहीं हटते. इसी कड़ी में रूस ने उर्जा संकट के बीच भारत को कोयले की बड़ी खेप भेजी है.
होर्मुज के रास्ते से तेल और गैस आपूर्ति बाधित हुई तो रूस ने भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ा दिया. भारत ने रूस से कोयले का आयात बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है. इसके बाद रूस भर भरकर भारत की बंदरगाहों पर को ‘काले सोने’ यानी कोयले की खेप भेज रहा है.
रूस से बड़े पैमाने पर कोयले का आयात
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कच्चे तेल के साथ-साथ कोयला आपूर्ति भारत के उर्जा क्षेत्र को सुचारू रूप से जारी रखेगी. भारत ने रूस से हाई क्वालिटी वाले कोयले का आयात बड़े पैमाने पर तेज कर दिया है. भारत के बिजलीघरों और विशाल उद्योग इसी कोयले से रफ्तार भरते रहेंगे. रूस की ये मदद भारत में उर्जा संकट के बीच बड़ी राहत है. ईरान और US में जंग के कारण भारत समेत पूरी दुनिया में तेल और गैस के लिए संकट खड़ा हो गया. कीमतें आसमान छूने की संभावना है ऐसे में हाई क्वालिटी रूसी काला सोना देश के पावर ग्रिड और उद्योगों के लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है.
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मार्च महीने की शुरूआत में ही भारत ने रूस के साथ कोयले के आयात में भारी इजाफा किया है. रूस से कोयले से लदे अपने बड़े-बड़े मालवाहक जहाजों का रुख भारतीय बंदरगाहों की तरफ कर दिया है. मार्च के शुरुआती तीन हफ्तों में रूस से कोयले के आयात में फरवरी के मुकाबले करीब 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं, साल-दर-साल आधार पर यह वृद्धि लगभग 50% तक पहुंच गई है. यह आंकड़े बताते हैं कि मुश्किल हालातों में किस तरह रूस ने भारत का साथ दिया है. साथ ही यह भारत की उर्जा नीति में रणनीतिक बदलाव को भी दर्शाता है.
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ईरान पर अमेरिका के हमलों के बाद होर्मुज प्रभावित
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दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा यानी करीब 20% गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव या रुकावट सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित करती है. हालांकि ईरान ने दोस्ती का दावा करते हुए भारत के गैस और तेल जहाजों को इस रास्ते के गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन भारत निर्भरता कम करने के लिए भारत कई विकल्प लेकर चल रहा है. तेल और गैस के साथ-साथ भारत को कोयले की भी उतनी ही जरूरत है. ऐसे में दोस्त रूस की ये मदद भारत के उर्जा क्षेत्र में रुकावट की आशंका को कम कर सकती है.