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AMU में पहली बार सजा सरकारी मंच… मंत्री ने लगाए जय श्री राम के नारे तो मौलानाओं को क्यों हुई दिक्कत?
जिस AMU में सार्वजनिक तौर पर होली खेलने की मनाही थी, जिस AMU में दिवाली भी बंद कमरों में मनाने की इजाजत है वहां पहली बार जय श्री राम की गूंज सुनाई दी तो चर्चा होनी लाजिम है.
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उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जहां एक दिन में दो-दो इतिहास रचे गए. एक तो ये कि यहां पहली बार सरकारी कार्यक्रम हुआ और दूसरा ये कि यहां पहली बार हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े धार्मिक नारे लगे. ऐसा किया उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने, जिन्होंने कैनेडी हॉल में जय श्री राम और हर-हर महादेव के नारे लगाए.
जिस AMU में सार्वजनिक तौर पर होली खेलने की मनाही थी, जिस AMU में दिवाली भी बंद कमरों में मनाने की इजाजत है वहां पहली बार जय श्री राम की गूंज सुनाई दी तो चर्चा होनी लाजिम है. दरअसल, यहां UP और केंद्र सरकार की उपलब्धियों से जुड़ा एक सरकारी कार्यक्रम आयोजित किया. जिसमें कृषि निर्यात राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह बतौर चीफ गेस्ट पहुंचे थे. यहां गोष्ठी के दौरान मंत्री दिनेश प्रताप ने वहां मौजूद लोगों को मंच से संबोधित किया और आखिर में 'जय श्री राम' और 'हर-हर महादेव' के नारे लगाए.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कैनेडी हाल के भीतर हर हर महादेव.. pic.twitter.com/H3NY2t4v0E
— Dinesh Pratap Singh (@RBLDineshSingh) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 12, 2026Advertisement
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ये पहली बार है जब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कोई सरकारी कार्यक्रम हुआ है. जब मंच से योगी सरकार के मंत्री ने जय श्री राम और हर-हर महादेव का उद्घोष किया तो कैनेडी हॉल में बैठे लोग जोश से भर उठे. उन्होंने भी मंत्री के साथ जय श्री राम के नारों का उद्घोष किया, लेकिन ये नारे कुछ कट्टरपंथियों को बुरी तरह चुभ गए.
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मौलाना और मुस्लिम स्कॉलर ने सवाल उठाए. उनका कहना है कि धार्मिक नारे लगाना शिक्षा संस्थानों को कमजोर करने जैसा है, मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि उन्हें 'जय श्री राम' के नारों से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हर चीज की एक उचित जगह होती है. उनके अनुसार, 'जय श्री राम' का उद्घोष मंदिरों में और 'अल्लाहु अकबर' का नारा मस्जिदों में होना चाहिए.
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शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास ने कहा कि चाहे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय हो या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, किसी भी शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक नारेबाजी शिक्षा के माहौल को कमजोर करती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे नारों को बढ़ावा देता है या उनका समर्थन करता है, तो यह उचित नहीं है और ऐसा नहीं होना चाहिए.