नीदरलैंड ने लौटाई चोल काल की दुर्लभ निशानियां, एक हजार साल पुराने भारत का गौरवशाली इतिहास दर्ज
करीब एक हजार साल पुराने इन तमिल दस्तावेजों में चोल साम्राज्य से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी है. यह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का संग्रह है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत के नाम एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है. दोनों के बीच 11वीं सदी की ऐतिहासिक चोल ताम्र पट्टिकाओं को भारत लाने पर समझौता हुआ है.
करीब एक हजार साल पुराने इन तमिल दस्तावेजों में चोल साम्राज्य से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी है. यह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का संग्रह है. इनमें ज्यादातर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं. इसकी जानकारी खुद PM मोदी ने एक्स पोस्ट के जरिए दी. उन्होंने लिखा, ‘हर भारतीय के लिए यह एक खुशी का पल है. 11वीं सदी के चोल ताम्रपत्र नीदरलैंड से भारत वापस लाए जाएंगे.
இந்தியர் அனைவருக்கும் ஒரு மகிழ்ச்சிகரமான தருணம்!
— Narendra Modi (@narendramodi) May 16, 2026
11-ம் நூற்றாண்டைச் சேர்ந்த சோழர்கால செப்பேடுகள், நெதர்லாந்தில் இருந்து இந்தியாவிற்குத் திரும்பவும் கொண்டுவரப்பட இருக்கின்றன. இது தொடர்பான விழாவில் பிரதமர் ராப் ஜெட்டன் அவர்களுடன் இணைந்து பங்கேற்றேன்.
சோழர் கால செப்பேடுகள், 21… pic.twitter.com/af4NWacMwt
उन्होंने बताया, चोल ताम्रपत्र 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टियों का एक समूह हैं, जिन पर मुख्य रूप से तमिल भाषा में लेख अंकित हैं, जो दुनिया की सबसे सुंदर भाषाओं में से एक है. ये ताम्र-पत्र महान राजेंद्र चोल प्रथम के अपने पिता राजाराजा प्रथम के एक मौखिक वचन को औपचारिक रूप देने से संबंधित हैं. ये चोलों की महानता को भी दर्शाते हैं. हम भारतीय चोलों, उनकी संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर काफी गर्व करते हैं.
पीएम मोदी ने नीदरलैंड सरकार और विशेष रूप से लीडेन यूनिवर्सिटी को धन्यवाद दिया, जहां 19वीं सदी के मध्य से ये तांबे की प्लेटें रखी हुई थीं. PM मोदी ने कहा कि उन्होंने हेग में रॉयल पैलेस 'हुइस टेन बॉश' में नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा के साथ अपनी मुलाकात के दौरान अहम क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड दोस्ती को और मजबूत करने पर अपने विचार साझा किए.
ये सिर्फ़ पुरानी धातु प्लेटों की घर वापसी नहीं बल्कि भारत की सभ्यता, समुद्री शक्ति, प्रशासनिक कुशलता और तमिल विरासत के वैश्विक सम्मान की वापसी है. इसके साथ ही यह भारत के उस गौरवशाली इतिहास को भी दर्शाते हैं जहां आक्रमण नहीं उपलब्धियों का वर्णन है.
Zijne Majesteit Koning Willem-Alexander en Hare Majesteit Koningin Máxima ontmoet in het Koninklijk Paleis. Het was geweldig om van gedachten te wisselen over het versterken van de vriendschap tussen India en Nederland in belangrijke sectoren zoals technologie, innovatie,… pic.twitter.com/SFVPqz4FOw
— Narendra Modi (@narendramodi) May 16, 2026
PM मोदी ने नीदरलैंड के राजा-रानी से की मुलाकात
इससे पहले PM मोदी ने शाही पैलेस हुइस टेन बॉश में राजा विलेम अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा से मुलाकात की. मुलाकात के बाद PM मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘शाही महल में महामहिम राजा विलेम-अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा से मुलाकात हुई. टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, सस्टेनेबल ग्रोथ, व्यापार और जल संसाधनों जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-नीदरलैंड्स की दोस्ती को और मजबूत करने पर विचारों का आदान-प्रदान करना बहुत शानदार रहा.’
उन्होंने कहा, ‘भारत और नीदरलैंड्स साझा हितों और एक ऐसे भविष्य के लिए तैयार दुनिया बनाने के साझा विश्वास से जुड़े हुए हैं.’
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प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड की मौजूदा यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करना है और इसी दिशा में एक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर करना है.
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