लखनऊ अग्निकांड केस में बड़ा खुलासा, 2016 में 2 महीने के अंदर पलटा गया ध्वस्तीकरण आदेश...SIT के रडार पर बड़े-बड़े अफसर
लखनऊ अग्निकांड मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. बिल्डिंग पर अवैध निर्माण की बात सामने आने के बाद 2016 में ध्वस्तीकरण आदेश जारी हुआ था, जिसे 2 महीने के अंदर निरस्त कर दिया गया. CM योगी द्वारा गठित SIT के सामने कच्चा चिट्ठा सामने आने वाला है.
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लखनऊ के अलीगंज में हुए दुखद अग्निकांड मामले में CM योगी ताबड़तोड़ एक्शन ले रहे हैं. उन्होंने इस मामले की जांच को लेकर फौरन दो सदस्यीय SIT भी गठित कर दी है. इस संबंध में मुख्यमंत्री की अधिकारियों के साथ देर रात एक उच्च स्तरीय बैठक भी की.
लखनऊ अग्निकांड को लेकर SIT गठित, 7 दिन के अंदर रिपोर्ट देने के आदेश
इस विशेष जांच दल (SIT) में धर्मार्थ कार्य, पर्यटन/संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात तथा अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है. मुख्यमंत्री ने जांच दल को 7 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
मालूम हो कि मुख्यमंत्री ने घटनास्थल के निरीक्षण, केजीएमयू में मृतकों के परिजनों से मिलने और घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री ने देर रात उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी. इसमें मुख्यमंत्री ने घटना को लेकर काफी रोष जताते हुए दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई का निर्देश दिया. इसी कड़ी में अभियुक्तों की गिरफ्तारी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी एक्शन लिया गया है.
अग्निकांड वाली बिल्डिंग का सपा शासनकाल से कनेक्शन!
इसके अलावा अलीगंज अग्निकांड मामले में पूर्व की सपा सरकार के उस आदेश का भी पता चला है, जिसके तहत 2016 में बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण के आदेश को निरस्त कर दिया गया था. जानकारी के मुताबिक सोमवार को जिस भवन में आग लगने की यह दुःखद घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को पलट दिया गया था.
आपको बता दें कि लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्राधिकरण की कार्रवाई भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है.
1980 में हुआ था अलीगंज अग्निकांड वाली बिल्डिंग का आवंटन
अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार पुत्र रामेश्वर सहाय को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था. 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया. 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ. वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया. 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की. करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था.
ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर उठे सवाल
हालांकि, बाद में इसी भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई. इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया. जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया. लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया.
अब ऐसे में इस मामले की जांच को लेकर गठित दो सदस्यीय SIT भवन के निर्माण, ध्वस्तीकरण आदेश और फिर उसे महज दो महीने के अंदर पलटे जाने सहित हर एंगल से जांच करेगी.
इसी बीच सीएम योगी की ओर से अग्निकांड के पीड़ितों और मृतकों के निकट परिजनों को लेकर आर्थिक सहायता राशि का ऐलान भी किया है. अग्निकांड की सूचना मिलने के बाद सीएम योगी तुरंत अपना अलीगढ़ का दौरा रद्द कर लखनऊ आए औऱ सीधे घटनास्थल पर जाकर हालात का जायजा लिया और घायलों से भी KGMU जाकर मिले. इसके बाद CM की ओर से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान भी किया गया.
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले बच्चों की मौत पर गहरा शोक प्रकट किया और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों और सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के भी निर्देश दिए. इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी कीमत पर दोषी बख़्शे नहीं जाएंगे.
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सीएम ने घायल बच्चों और परिजनों का भी हालचाल जाना और घटना की जानकारी ली
मुख्यमंत्री घटनास्थल से सीधे किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) पहुंचे. वह यहां भर्ती कराए गए घायल बच्चों से मिले. उनसे भी आग लगने के कारणों और घटना के बारे में संपूर्ण जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने घायलों के परिजनों को भी हिम्मत बंधाई और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने केजीएमयू प्रशासन को घायलों के समुचित इलाज के लिए भी निर्देशित किया. कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सीएम योगी को घायलों के इलाज के बारे में पूरी जानकारी दी.
सीएम ने मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया
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मुख्यमंत्री जब केजीएमयू पहुंचे तो उनकी मृतकों के परिजनों से भी मुलाकात हुई. मुख्यमंत्री ने घटना पर शोक प्रकट करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया. उन्होंने परिजनों के आंसू भी पोंछे. कहा कि हम किसी की जिंदगी तो नहीं लौटा सकते, लेकिन विश्वास दिलाते हैं कि दोषी किसी भी सूरत में बख्शे नहीं जाएंगे. सरकार परिजनों के साथ है.