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लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार पर आरोप तय, तेजस्वी, मीसा, तेज प्रताप और हेमा पर भी चार्ज; जानें कितने आरोपी हुए बरी

रेलवे में जमीन के बदले नौकरी देने के कथित मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी समेत 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. यह आदेश विशेष जज विशाल गोगने ने दिया.

Lalu Yadav (File Photo)
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रेलवे में कथित जमीन के बदले नौकरी देने के मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की चार्जशीट पर बड़ा फैसला सुनाते हुए लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव समेत 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. 

यह आदेश सीबीआई के विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने शुक्रवार को दिया. इस फैसले के साथ ही साफ हो गया है कि अब इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल आगे बढ़ेगा. हालांकि अदालत ने इसी मामले में 103 आरोपियों में से 52 को बरी भी कर दिया है. इनमें से पांच आरोपियों की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी. कोर्ट के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर लालू यादव के रेल मंत्री कार्यकाल से जुड़ा हुआ है. आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत तय किए गए हैं.

कोर्ट में मौजूद रहे सभी आरोपी 

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शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को छोड़कर बाकी सभी आरोपी अदालत में सशरीर मौजूद रहे. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और आरजेडी अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी कोर्ट पहुंचे. अदालत में मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम मोड़ पर पहुंच चुका है. सीबीआई के अनुसार यह पूरा मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है, जब यूपीए सरकार के दौरान लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे. जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी दौरान रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर भर्ती के लिए नियमों को ताक पर रखा गया. बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन के कई लोगों को नौकरियां दी गईं. बदले में चयनित अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से जमीनें लालू परिवार के सदस्यों और करीबियों के नाम पर लिखवाई गईं. कई मामलों में ये जमीनें बेहद कम कीमत पर ट्रांसफर कराई गईं.

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CBI ने कोर्ट में क्या दी दलील?

सीबीआई ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि नौकरी पाने वाले अधिकांश अभ्यर्थी बिहार के बेहद गरीब तबके से थे. आरोप है कि इन अभ्यर्थियों के पास जो शैक्षणिक दस्तावेज थे, वे फर्जी स्कूलों से जारी किए गए थे. यहां तक कहा गया कि कुछ उम्मीदवार अपना नाम तक ठीक से लिखने में सक्षम नहीं थे, फिर भी उन्हें रेलवे की नौकरी दे दी गई. जांच एजेंसी का मानना है कि यह सब कुछ सुनियोजित साजिश के तहत किया गया. इस मामले में सीबीआई ने आईपीसी की धारा 120बी, 420, 467, 468 और 471 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 8, 9, 11, 12 और 13 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था. कोर्ट ने इन्हीं धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं. वहीं मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से प्रवर्तन निदेशालय भी इस केस की अलग से जांच कर रहा है.

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बताते चलें कि राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला लालू परिवार के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है. आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई तेज होने की संभावना है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रायल के दौरान कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और इसका असर बिहार की राजनीति पर किस दिशा में जाता है.

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