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'इस्लामिक सोसायटी, शरियत कानून, सिर्फ मुसलमानों को रहने की जगह... मेरठ में भी बन रही थी 'हलाल रेजीडेंसी', योगी सरकार ने लिया एक्शन!

हापुड़ रोड स्थित अब्दुल्ला रेजीडेंसी विवाद में योगी सरकार के राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर की चिट्ठी के बाद डीएम ने तीन अफसरों की जांच कमेटी गठित कर जांच शुरू कराई है. आरोप है कि कॉलोनी में ‘ओनली फॉर मुस्लिम’ नीति अपनाई जा रही है और परिसर में मस्जिद भी प्रस्तावित है.

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मुंबई के करजत इलाके में केवल मुस्लिम समुदाय के लिए हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप बनाने की खबर के बाद अब उत्तर प्रदेश के हापुड़ से भी ऐसा ही मामला सामने आया है. हाल ही में करजत प्रकरण पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता दिखाते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी थी. अब हापुड़ में 'अब्दुल्ला रेजिडेंसी कॉलोनी' बनाए जाने का मामला तूल पकड़ रहा है. योगी सरकार में राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर ने इसको लेकर जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजी, जिसके बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है. डीएम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन अफसरों की जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच शुरू कराई है.

ओनली फॉर मुस्लिम नीति का आरोप

हापुड़ के मामले में डीएम ने तीन अफसरों की जांच कमेटी गठित कर मामले की जांच शुरू कराई है. गठित टीम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, आवास विकास परिषद के एसई और पुलिस क्षेत्राधिकारी शामिल किए गए हैं. साथ ही सदर तहसील की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब्दुल्ला रेजीडेंसी कॉलोनी पर सबसे गंभीर आरोप यह है कि यहां केवल मुस्लिम खरीदारों को ही प्लॉट बेचे जा रहे हैं. हिंदू समुदाय से संबंधित लोगों को प्लॉट न देने की शिकायत सामने आई है. यही नहीं, कॉलोनी के मानचित्र और बिल्डर द्वारा बनाए गए मॉडल में कॉलोनी परिसर के भीतर मस्जिद प्रस्तावित होने की भी बात कही जा रही है. इन आरोपों के कारण यह प्रोजेक्ट विवादों के घेरे में आ गया है.

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गैंगस्टर से कनेक्शन की आशंका

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राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर ने जिलाधिकारी को लिखी चिट्ठी में इस मामले पर गंभीर सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट नोएडा के एक बिल्डर से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसका संबंध कथित तौर पर एक कुख्यात गैंगस्टर से होने की चर्चा है. समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में तोमर ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में अपराधियों और माफियाओं को संरक्षण मिलता था, लेकिन योगी सरकार में अपराधियों और माफियाओं के लिए कोई जगह नहीं है. धार्मिक आधार पर किसी तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

निवेशकों को किया जा रहा चिन्हित 

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जानकारी के अनुसार, अब्दुल्ला रेजीडेंसी लगभग 22,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही है. इसमें 78 विला बनाए जा रहे हैं और करीब 3,020 वर्ग मीटर क्षेत्र को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए चिन्हित किया गया है. बताया जा रहा है कि कॉलोनी के अधिकांश प्लॉट बिक चुके हैं. हालांकि, खरीदार कौन हैं और किस समुदाय से जुड़े हैं, इसे लेकर संदेह लगातार गहराता जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रिटायर्ड मेजर जनरल जावेद और महेंद्र गुप्ता बताए जा रहे हैं.

करजत टाउनशिप विवाद की गूंज

यह मामला तब और संवेदनशील हो गया जब कुछ दिन पहले ही मुंबई के पास करजत इलाके में हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप को लेकर विवाद खड़ा हुआ था. वहां केवल मुस्लिम परिवारों के लिए कॉलोनी बनाए जाने की खबर सामने आई थी. इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया.

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मुस्लिम महिला ने किया था टाउनशिप का प्रचार 

करजत टाउनशिप के प्रचार वीडियो में एक हिजाब पहने महिला दिखाई देती है, जो टाउनशिप को समान विचारधारा वाले परिवारों के लिए एक “प्रामाणिक सामुदायिक जीवन” बताती है. वीडियो में नमाज स्थल और सामुदायिक सभाओं की सुविधाओं का जिक्र भी किया गया है. इस वीडियो को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर साझा किया और इसे “राष्ट्र के भीतर राष्ट्र” बनाने की कोशिश करार दिया. शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने इस वीडियो पर आपत्ति जताते हुए इसे तुरंत वापस लेने और प्रोजेक्ट की जांच की मांग की. वहीं बीजेपी प्रवक्ता अजित चव्हाण ने इसे “गजवा-ए-हिंद की साजिश” बताते हुए कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट महाराष्ट्र या देश के किसी हिस्से में स्वीकार्य नहीं हैं. उन्होंने इसे संविधान के लिए चुनौती करार दिया और डेवलपर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की.

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बताते चलें कि हापुड़ की अब्दुल्ला रेजीडेंसी कॉलोनी का मामला केवल स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है. करजत टाउनशिप विवाद की गूंज के बाद अब उत्तर प्रदेश में इस तरह का मामला सामने आने से सियासी हलचल तेज हो गई है. सरकार ने जांच शुरू कर दी है और राज्यमंत्री ने साफ किया है कि अगर भेदभाव या अवैध गतिविधियां पाई जाती हैं तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा. अब देखना होगा कि जांच के नतीजे क्या सामने आते हैं और यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है.

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