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अरब सागर में भारत का तगड़ा प्रहार, किया इंटरनेशनल तेल तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़, जब्त कर लिया ईरान का टैंकर

भारत ने अरब सागर में बड़े अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. ICG ने एक बेहद सफल ऑपरेशन में ईरान के दो जहाजों सहित तीन टैंकर्स को जब्त कर लिया है.

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17 Feb 2026
( Updated: 17 Feb 2026
07:24 AM )
अरब सागर में भारत का तगड़ा प्रहार, किया इंटरनेशनल तेल तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़, जब्त कर लिया ईरान का टैंकर
India Seized Iranian Tanker / ICG

भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने एक साहसिक और हाई-टेक ऑपरेशन में  5-6 फरवरी 2026 को अरब सागर में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया और ईरानी तेल टैंकरों को जब्त किया. वैसे तो ईरान अवैध तेल सप्लाई में शामिल इन टैंकर्स से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार कर रहा है, लेकिन शिपिंग डेटा उपलब्ध कराने वाली कंपनी LSEG के अनुसार जब्त किए गए तीन में से दो टैंकर ईरान से जुड़े रहे हैं. अब इसको लेकर तमाम तरह के खुलासे हो रहे हैं. 

आपको बताएं कि ये ICG की ये कार्रवाई अरब सागर में मुंबई से लगभग 100 नॉटिकल मील पश्चिम में की गई. भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने समुद्री और हवाई निगरानी के संयुक्त नेटवर्क के जरिए तीन संदिग्ध जहाजों को रोका और जब्त कर लिया. 

सूत्रों के अनुसार जिन तीन जहाजों को रोका गया, उनके नाम स्टेलर रूबी, एस्फाल्ट स्टार और अल जफ्जिया हैं. आपको बता दें कि यह सिंडिकेट संघर्ष प्रभावित देशों से सस्ता तेल और तेल आधारित सामान बड़ी मात्रा में लाता था. फिर अंतरराष्ट्रीय जल में मोटर टैंकरों को बीच समुद्र में ही तेल ट्रांसफर करके मोटा मुनाफा कमाता था. 

इस गिरोह में कई देशों के हैंडलर शामिल थे, जो जहाजों के बीच बिक्री और ट्रांसफर का पूरा तालमेल बिठाते थे. तस्कर अक्सर जहाजों की पहचान बदलते थे, ताकि तटीय देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां उन्हें पकड़ न सकें. जहाजों के मालिक विदेशों में रहते हैं.

कैसे दिया गया ऑपरेशन को अंजाम?

ऑपरेशन की शुरुआत आईसीजी के टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम से हुई. एक मोटर टैंकर भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि करता दिखा. इसकी डिजिटल जांच से अन्य दो जहाज भी संदिग्ध पाए गए, जो अवैध तेल ट्रांसफर में शामिल थे. इससे भारत और तटीय राज्यों को मिलने वाली बड़ी मात्रा में ड्यूटी और राजस्व की चोरी हो रही थी.

5 फरवरी को आईसीजी के जहाजों ने तीनों संदिग्ध जहाजों को रोका. विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमों ने जहाजों पर चढ़कर गहन तलाशी ली. दस्तावेजों की जांच, इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पुष्टि और चालक दल से पूछताछ के बाद सबूत मिले. डिजिटल सबूतों की पुष्टि होने पर तीनों जहाज जब्त कर लिए गए. आगे की जांच के लिए इन्हें मुंबई लाया गया. भारतीय सीमा शुल्क और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर रही हैं.

खबर के मुताबिक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के तहत काम करने वाले Office of Foreign Assets Control ने पिछले साल तीन जहाजों, ग्लोबल पीस, चिल 1 और ग्लोरी स्टार 1 पर प्रतिबंध लगाया था. इनके अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) नंबर उन जहाजों से मेल खाते बताए गए हैं, जिन्हें हाल में भारत ने जब्त किया है.

यह ऑपरेशन आईसीजी की बढ़ती समुद्री उपस्थिति और डिजिटल निगरानी की ताकत को दिखाता है. इससे भारत समुद्री सुरक्षा का मजबूत प्रदाता बनकर उभरा है. यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन कराने और अवैध गतिविधियों को रोकने में भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है. ऐसे ऑपरेशन से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली तस्करी पर लगाम लगेगी और समुद्री क्षेत्र में शांति बनी रहेगी.

भारत को क्यों जब्त करना पड़ा ईरानी टैंकर?

सूत्रों के मुताबिक भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके समुद्री क्षेत्र का इस्तेमाल जहाज-से-जहाज (शिप-टू-शिप) ट्रांसफर के जरिए तेल की वास्तविक उत्पत्ति छिपाने के लिए न किया जाए. इतना ही नहीं भारत लगातार फ्री और फेयर मैरिटाइम की वकालत करता आया है, ऐसे में वो इस बात को लागू भी कर रहा है कि उसके अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल अवैध गतिविधि और तस्करी के लिए ना हो. बता दें कि इस तरह के ट्रांसफर का इस्तेमाल अक्सर प्रतिबंधों से बचने और कार्गो की ट्रैकिंग को जटिल बनाने के लिए किया जाता है.

ईरान-रूस क्यों दे सकते हैं तेल तस्करी को बढ़ावा?

ईरान और रूस लंबे समय से ऑयल सप्लाई सहित लगभग हर प्रकार के ट्रेड पर अमेरिकी और वेस्टर्न सेंशन का सामना कर रहे हैं. तेल और गैस ही दोनों देशों के जीने का जरिया है और लाइफ लाइन है. ऐसे में तेल पर ही प्रतिबंध लग जाए तो उन्हें काफी दिक्कत होती है. ऐसे में कंपनिया और अनौपचारिक तौर पर ऐसे देश तेलों की तस्करी करते हैं. बीते दिनों यूक्रेन के समुद्री ड्रोन ने जब रूसी तेल टैंकर्स पर हमला किया था, तब इस तरह की सप्लाई और शैडो फ्लीट का पता चला था.

अलर्ट पर ICG!

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ख़बर के मुताबिक अल जफ्जिया ने वर्ष 2025 में ईरान से जिबूती तक फ्यूल ऑयल लेकर चला था, जबकि स्टेलर रूबी पर ईरानी झंडा लगा हुआ था. स्फाल्ट स्टार मुख्य रूप से चीन के आसपास के समुद्री मार्गों पर संचालित होती रही है. जहाजों की जब्ती के बाद भारतीय तटरक्षक बल ने निगरानी बढ़ा दी है. मालूम हो कि भारत की ओर से अब लगभग 55 जहाज और 10 से 12 विमान भारत के समुद्री क्षेत्र की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं और ICG ने अपनी दक्षता साबित की है.

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