Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

वाराणसी में महिला कर्मचारी ने सुनाई प्रधानमंत्री को गांवों की बदलती तस्वीर, मोदी बोले- योगी जी को थैंक्यू बोलो

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला सुरक्षा को शासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया. स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड शुरू किया गया.

Image Credit: Facebook/MYogiAdityanath/Video Grab
Loading Ad...

बेटियों को घर से बाहर भेजने से पहले परिवार के मन में उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल होते हैं. वाराणसी की एक महिला कर्मचारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बता रही थी कि अब उसके गांव में यह चिंता कम होने लगी है. परिवार बेटियों को नौकरी के लिए बाहर भेजने को तैयार हैं. इसकी वजह बताते हुए उसने सुरक्षित माहौल का जिक्र किया. प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने लगी तो मोदी ने मुस्कुराकर बीच में ही कहा, 'तो योगी जी को थैंक्यू बोलो.' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वहीं मौजूद थे. प्रधानमंत्री का जवाब सुनकर महिला मुस्कुरा उठी और बोली, 'थैंक्यू सर, सबको थैंक्यू सर.' तालियों के बीच हुआ यह छोटा सा संवाद महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयासों और गांवों में बढ़ते भरोसे को एक साथ सामने ले आया.
 
प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में अरविंद गारमेंट कंपनी की नई इकाई का उद्घाटन करने पहुंचे थे. उद्घाटन के बाद उन्होंने यहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की. इसी दौरान एक महिला कर्मचारी ने बताया कि कंपनी खुलने से रोजगार का अवसर तो मिला ही है, गांवों के परिवारों की सोच में भी बदलाव आ रहा है. अब वे चाहते हैं कि उनकी बेटियां घर से बाहर निकलें और काम करें. महिला ने इस बदलाव की एक बड़ी वजह कार्यस्थल पर मिलने वाली सुरक्षा को बताया.

मुख्यमंत्री योगी ने सपा और कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले-बड़े मियां और छोटे मियां को घुसपैठियों से प्यार
 
'यहां सुरक्षा बहुत है, इसलिए घरवाले भेज रहे हैं'
महिला कर्मचारी ने प्रधानमंत्री से कहा, 'जब से ये कंपनी खुली है सर, अब गांव के भी लोग जागरूक हो गए हैं कि नहीं, हमें भी अपनी बेटी को बाहर निकालना है. इसलिए मैं कोटि-कोटि धन्यवाद करती हूं सर, कि हम बाहर इस कंपनी की वजह से निकलेंगे... क्योंकि यहां सुरक्षा बहुत है, तो हमारे परिवार के लोग जो हैं...'
 
महिला अपनी बात पूरी करती, उससे पहले ही प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी की ओर संकेत करते हुए कहा, 'तो योगी जी को थैंक्यू बोलो.' महिला ने भी बिना देर किए जवाब दिया, 'थैंक्यू सर, सबको थैंक्यू सर.'
 
इस बातचीत की खास बात यह रही कि महिला ने न तो किसी सरकारी योजना का नाम लिया और न ही कोई आंकड़ा गिनाया. वह अपने आसपास के परिवारों में आए बदलाव का अनुभव साझा कर रही थी. प्रधानमंत्री ने जब सुरक्षा की बात पर मुख्यमंत्री योगी का नाम लिया तो यह सहज संवाद कार्यक्रम का यादगार क्षण बन गया.
 
योगी सरकार के सुरक्षा प्रयासों से जुड़ा बेटियों का भरोसा
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिला सुरक्षा को शासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया. स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड शुरू किया गया. मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से जोड़ने पर जोर दिया गया.
 
पुलिस थानों में महिला हेल्प डेस्क और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर पिंक बूथ जैसी व्यवस्थाएं भी शुरू की गईं. इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों पर सुनवाई को आसान बनाना और जरूरत के समय उन्हें सहायता उपलब्ध कराना है.

यह भी पढ़ें

योगी सरकार की पहल, जैव प्रौद्योगिकी से बदलेगी यूपी की औद्योगिक तस्वीर
 
वाराणसी की महिला कर्मचारी का अनुभव इन प्रयासों के मानवीय पक्ष की ओर ध्यान दिलाता है. उसके मुताबिक, सुरक्षित माहौल का भरोसा होने से परिवार बेटियों को काम के लिए बाहर भेजने में पहले से अधिक सहज हो रहे हैं.
 
घर के पास रोजगार, बाहर निकलने का बढ़ा हौसला
अरविंद गारमेंट की नई इकाई में स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर मिल रहे हैं. घर के नजदीक काम मिलने से महिलाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुले हैं. हालांकि, महिला कर्मचारी की बात से साफ था कि नौकरी मिलने के साथ परिवार की सहमति भी उसके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है.
 
बेटियों को रोजगार का अवसर मिले और परिवार को उनकी सुरक्षा का भरोसा हो तो आत्मनिर्भर बनने की राह आसान होती है. यही वजह है कि महिला ने प्रधानमंत्री के सामने रोजगार से अधिक उत्साह के साथ गांवों में बदलती सोच का जिक्र किया.
 
प्रधानमंत्री मोदी ने भी उसकी बात में सुरक्षा के इसी पहलू को पकड़ा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में कहा गया उनका एक वाक्य उस भरोसे को रेखांकित कर गया, जिसके सहारे गांवों की बेटियां घर की चौखट से निकलकर कामकाज की दुनिया में कदम रख रही हैं.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...