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‘लव जिहाद’ से बेटियों को कैसे बचाएं? संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताए तरीके, बोले- ‘ये जरूर ध्यान रखे…’

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को लेकर महिलाओं को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने कई सारे उपाए बताएं.

‘लव जिहाद’ का मुद्दा इस देश में ज्वलंत मुद्दा रहा है. इसे लेकर दावा किया जाता है कि बहुत सी हिंदू लड़कियां इसका शिकार होती हैं. इस मुद्दे को भारतीय राजनीति में खूब भुनाया भी जाता है. वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने ‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परिवार के भीतर संवाद मज़बूत करने की आवश्यकता है. भागवत ने ये बात भोपाल में आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम के दौरान कही है.  

आपसी संवाद की कमी ही सबसे बड़ी समस्या- मोहन भागवत

मोहन भागवत ने लव जिहाद का जिक्र करते हुए कहा कि, परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत और आपसी संवाद की कमी के चलते ही इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है. उन्होंने कहा, ‘हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारी बेटी किसी अजनबी द्वारा कैसे बहकाई जा सकती है. जब परिवार में नियमित संवाद होता है, तो धर्म, संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान स्वाभाविक रुप से विकसित हो जाता है.’

मोहन भागवत ने ‘लव जिहाद’ को रोकने के बताए उपाय 

संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि परिवार में निरंतर संवाद, लड़कियों में सतर्कता और आत्मारक्षा की भावना पैदा करने से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है. उन्होंने कहा, ‘हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारा सामाजिक व्यवस्था महिलाओं की वजह से ही सुरक्षित है. वह समय बीत चुका है जब महिलाओं को केवल सुरक्षा के कारण घर तक सीमित रखा जाता था. आज पुरुष और महिला दोनों मिलकर परिवार और समाज को आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का जागरण आवश्यक है. यह प्रक्रिया पहले से ही शुरु हो चुकी है और महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन इसे और मज़बूत करने की आवश्यकता है.’


महिलाओं को अपनी रक्षा के लिए सशक्त बनना चाहिए- मोहन भागवत

संघ प्रमुख ने आगे कहा कि महिलाओं को अपनी रक्षा के लिए सशक्त बनना चाहिए, क्योंकि हमारी परंपराएं महिलाओं को सीमित नहीं बल्कि उन्हें सशक्त और असाधारण बनाती हैं. उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि, ‘भारतीय महिलाओं ने हर युग में शक्ति और साहस का प्रदर्शन किया है. आज दुनिया भारत की ओर देख रही है और भारत उस भूमिका के लिए ख़ुद को तैयार कर रहा है.’

 

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