US बैकयार्ड में चीन की एंट्री, अटैक से चंद घंटे पहले वेनेजुएला से आई एक तस्वीर और ट्रंप का पारा हाई, दिया अटैक ऑर्डर
अब तक शांति, सीजफायर और नोबेल की बात करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिकार वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर ही दिया. ये कोई एयर-नेवल, जमीनी वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले से पहले बहुत कुछ हुआ. कहा जा रहा है कि US बैकयार्ड में ड्रैगन की एंट्री ने सारा खेल बिगाड़ दिया. वहीं अटैक से पहले चीनी दूत के साथ मादुरो की हुई खुफिया मीटिंग की तस्वीरों ने ट्रंप का पारा हाई कर दिया.
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अब तक शांति, सीजफायर और नोबेल की बात करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर ही दिया. यह कोई एयर-नेवल या जमीनी कार्रवाई नहीं, बल्कि फुल-फ्लैज अटैक था, जिसके बाद वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को महज धमकी नहीं, बल्कि उनकी पत्नी के साथ सच में गिरफ्तार कर लिया गया.
भले ही अमेरिका इसे एंटी-नारकोटिक्स ऑपरेशन बता रहा हो, लेकिन इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. अमेरिका लगातार वेनेजुएला पर कार्रवाई की धमकी दे रहा था. वह मादुरो पर ड्रग्स की तस्करी रोकने का दबाव बना रहा था. इसी बीच यूएस डेल्टा फोर्स ने कैरेबियन सागर में हमला कर दिया.
अमेरिका ने क्यों किया वेनेजुएला पर हमला?
हालांकि दबाव बढ़ाने के लिए हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला की तेल कंपनियों और उनसे जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध लगाया था. अमेरिका लगातार आरोप लगाता रहा है कि वेनेजुएला की तरफ से भारी पैमाने पर यूएस के अंदर ड्रग्स भेजे जा रहे हैं. ट्रंप सरकार ने सीधे राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर भी आरोप लगाए थे.
वहीं कई लोग इस हमले को तेल से जोड़कर भी देख रहे हैं. दोनों देशों के बीच इस तनाव का एक बड़ा कारण तेल भी है. दरअसल, 1976 में वेनेजुएला सरकार ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था, जिसके बाद विदेशी तेल कंपनियों के सभी तरह के ऑपरेशन वहां की सरकारी कंपनी पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला (PDVSA) के तहत आ गए थे.
वेनेजुएला सरकार के इस कदम की वजह से अमेरिका की परेशानी बढ़ गई. अमेरिका के लिए वेनेजुएला से तेल निकालने की प्रक्रिया काफी मुश्किल हो गई. यह भी एक बड़ा कारण है कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है.
JUST IN: 🇨🇳🇻🇪 Chinese officials arrive in Venezuela for talks with President Nicolás Maduro. pic.twitter.com/abviFRZV3f
— BRICS News (@BRICSinfo) January 3, 2026
ट्रंप की किस तस्वीर की वजह से हुआ पारा हाई?
यह तो रही वह खबर, जिसके आधार पर विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि इन्हीं कारणों से अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया. हालांकि इसकी एक और वजह भी बताई जा रही है, जिसके हवाले से दावा किया जा रहा है कि एक तस्वीर ने ट्रंप का पारा हाई कर दिया और उन्होंने बिना देरी के वेनेजुएला पर बड़ा हमला करने का फैसला कर लिया.
कहा जा रहा है कि बीते दिनों कुछ ऐसा हुआ, जिसकी वजह से ट्रंप ने धमकी से आगे बढ़ने का मन बना लिया और वेनेजुएला पर अटैक का ऑर्डर दे दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीते दिनों मादुरो की कुछ चीनी अधिकारियों से मुलाकात हुई थी, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं. कहा जा रहा है कि मादुरो की चीन से बढ़ती नजदीकियां ट्रंप को काफी खटक रही थीं. इसी को देखते हुए उन्होंने मादुरो को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.
चीनी दूत से मादुरो की खुफिया मुलाकात, 3 घंटे तक मीटिंग!
रिपोर्ट्स की मानें तो वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों से चंद घंटे पहले चीनी दूत से निकोलस मादुरो की गुपचुप मुलाकात हुई थी. जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी हमले से पहले लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के विशेष दूत चिउ शियाओछी की वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से कथित तौर पर मुलाकात हुई थी. इतना ही नहीं, यह मुलाकात करीब 3 घंटों तक चली थी. इसके अलावा खबर यह भी थी कि मादुरो अमेरिका के इरादे भांप चुके थे और चीन में पॉलिटिकल असाइलम की प्लानिंग कर रहे थे.
चीनी दूत से मादुरो की मीटिंग, ट्रंप का पारा हो गया हाई!
अमेरिका के लिए पूरी दुनिया में फिलहाल चीन सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी है. ऐसे में चीनी दूत की मादुरो से मीटिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती थी. ट्रंप और अमेरिका यह कतई स्वीकार नहीं कर सकते थे कि उनके प्रभुत्व वाले इलाके, यानी यूएस बैकयार्ड में चीन की एंट्री हो. यही वजह मानी जा रही है कि ट्रंप ने वेनेजुएला पर हमला करने का आदेश दे दिया.
इस मीटिंग की भनक जैसे ही ट्रंप तक पहुंची, उसने जलती आग में घी का काम किया. अमेरिका के ‘बैकयार्ड’ में ड्रैगन की एंट्री ट्रंप को बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने सैन्य कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया.
वेनेजुएला का चीन है सबसे स्ट्रॉन्ग एनर्जी पार्टनर!
चीन को वेनेजुएला का सबसे मजबूत ‘एनर्जी पार्टनर’ माना जाता रहा है. दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदलने की कोशिशें हो रही थीं. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के नाते चीन की यह रणनीति रही है कि जहां-जहां और जिस-जिस देश में तेल या ऊर्जा का भंडार है, वहां उसके मजबूत रिश्ते हों.
वेनेजुएला में दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, जिस पर अमेरिका की भी लंबे समय से नजर रही है. वहीं मादुरो लगातार अमेरिकी धमकियों को धत्ता बताते हुए तेल सप्लाई का रुख चीन की ओर मोड़ते रहे. बताया जाता है कि चीन फिलहाल हर रोज वेनेजुएला से करीब 6,50,000 बैरल तेल खरीदता है. मुद्रा अवमूल्यन, महंगाई और आंतरिक बगावत को थामने के लिए चीन ने वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश किया, ताकि मादुरो की सत्ता को बचाया जा सके.
अमेरिकी हमले के बाद सामने आया वेनेजुएला सरकार का बयान!
वेनेजुएला की राजधानी काराकास में शुक्रवार देर रात अमेरिका के हवाई हमलों के बाद सरकार ने शनिवार को आधिकारिक बयान जारी किया. काराकास ने डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिका सरकार की कड़ी आलोचना की है और उस पर बेहद गंभीर सैन्य हमला करने का आरोप लगाया.
वेनेजुएला सरकार ने अपने बयान में कहा कि यह हमला वेनेजुएला के रणनीतिक संसाधनों, खासकर उसके तेल और खनिजों पर कब्जा करने और देश की राजनीतिक आजादी को खत्म करने की कोशिश जैसा लग रहा है.
वेनेजुएला में अमेरिकी हमले के बाद क्या-क्या हुआ?
काराकास के लोगों ने शुक्रवार रात करीब 2 बजे हवाई जहाजों के उड़ने और धमाकों की आवाज सुनी. स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाकों से काराकास के कई हिस्सों में दहशत फैल गई. कम से कम सात जोरदार धमाकों ने काराकास को हिलाकर रख दिया, जिससे लोग डर के मारे सड़कों पर निकल आए. धमाकों के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दी है. उन्होंने सभी राष्ट्रीय रक्षा योजनाओं को लागू करने का आदेश दिया, जिससे उन्हें लोगों के अधिकारों को सस्पेंड करने और आर्म्ड फोर्सेज की भूमिका बढ़ाने का अधिकार मिल गया.
'वे कामयाब नहीं होंगे'
सरकार की ओर से जारी बयान में लिखा था, “आज बोलिवर, मिरांडा और हमारे आजादी देने वालों की भावना के साथ वेनेजुएला के लोग एक बार फिर हमले के खिलाफ अपनी आजादी की रक्षा के लिए उठ खड़े हुए हैं. लोगों, सड़कों पर उतरो.” वेनेजुएला सरकार ने अमेरिका के हमले को यूनाइटेड नेशंस चार्टर का उल्लंघन बताया. सरकार ने एक बयान में कहा, “वे कामयाब नहीं होंगे. दो सौ साल से ज्यादा आजादी के बाद भी लोग और उनकी जायज सरकार संप्रभुता और अपनी किस्मत खुद तय करने के जरूरी अधिकार की रक्षा के लिए पक्के तौर पर डटे हुए हैं.”
अचानक हुए धमाकों की वजह से लोगों में इस कदर डर समा गया कि वे कन्फ्यूजन और अनिश्चितता के बीच अपने घरों से भाग गए. धमाके की कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि राजधानी में कई जगहों से धुएं का गुबार उठ रहा है, हालांकि इन तस्वीरों और वीडियो को सत्यापित नहीं किया जा सकता.
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धमाकों के बाद काराकास के कुछ जगहों पर बिजली चली गई. इसमें मिलिट्री बेस भी शामिल है. अधिकारियों ने अभी तक नुकसान या संभावित मौतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. फिलहाल मामले की जांच और नुकसान का आकलन किया जा रहा है. इसके अलावा टेलीकम्युनिकेशन सेवा में भी थोड़ी रुकावट की खबर सामने आई.
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