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ऐसे कैसे CEC को हटा देंगे...SC में चुनाव आयोग का हलफनामा, SIR, Form-6 सहित कई मुद्दों पर चुन-चुन कर दिया जवाब
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आयोग में तीनों सदस्यों में असहमति, विवाद और काम करने की प्रक्रिया सहित विभिन्न मुद्दों पर स्पष्टिकरण दिया है. आयोग ने SIR, फॉर्म 6, CEC को हटाने और मीडिया में वायरल नोट पर भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है.
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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने हलफनामे में कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों एसआईआर आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे. ईसीआई ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म को देखकर ऐसा लग सकता था कि उसमें संशोधन किया गया है. 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र अलग-अलग दिखाए जाएंगे, जैसा कि भौतिक फॉर्म में है.
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की सफाई
ईसीआई ने कहा है कि मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं को सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना जरूरी नहीं होगा. बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे. सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन कराई जाएगी.
ईसीआईनेट पर चुनाव आयोग ने बताया है कि ईआरओ के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया नहीं जाता. नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी और आईआईएससी के विशेषज्ञों वाली समिति गठित की गई है.
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SC में चुनाव आयोग का हलफनामा
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गोवा के 97 मतदाताओं के मामले पर आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि छूट गए 97 मतदाताओं में से 88 पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे.
SIR पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को बताया सामूहिक
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पश्चिम बंगाल की अपीलों पर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपीलें सीईओ, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दायर की थीं. ईसीआई ने कहा कि ये मामले आयोग के समक्ष नहीं रखे गए थे.
चुनाव आयोग ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है. आयोग ने मीडिया में आंतरिक दस्तावेज जारी करने से इनकार किया. ईसीआई ने कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी.
ECI ने EVM पर भी दिया जवाब
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आयोग ने ईवीएम से जुड़ी याचिकाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईवीएम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार खारिज कर चुका है. आयोग ने विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी और कहा कि दशहरा अवकाश के कारण आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत, बिंदुवार जवाब देने की अनुमति मांगी है.
चुनाव आयोग को क्यों दाखिल करना पड़ा हलफनामा!
यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया था. निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसके समक्ष दाखिल किए गए प्रति-हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी. चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है.
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चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे को प्वाइंट्स में समझें!
ECI ने आरोपों पर दी सफाई: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अकेले (बिना सहमति के) फैसले लेने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. आयोग के इस हलफनामे को दोनों आयुक्तों की भी सहमति है.
सर्वसम्मति से लिए गए फैसले: आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट की जांच (SIR) को लेकर जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों आदेश आयोग के तीनों आयुक्तों (मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों) की सर्वसम्मति से लिए गए थे.
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अंतिम फैसले की प्रक्रिया: हलफनामे में बताया गया है कि फाइल पर चर्चा के दौरान किसी आयुक्त की टिप्पणी, सवाल या सुझाव को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है.
फॉर्म 6 पर सफाई: वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने वाले 'फॉर्म 6' में बदलाव के आरोपों पर आयोग ने कहा कि इसमें संशोधन का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है. ऑनलाइन आवेदन में होने वाले भ्रम को दूर करने के लिए फॉर्म 6 और घोषणापत्र को अब अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था की गई है. वहीं फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, घोषणापत्र फॉर्म 6 से अलग है.
मतदाताओं को राहत: जिन मतदाताओं का पुराना रिकॉर्ड मौजूदा सूची से नहीं मिल पाया है, उन्हें अब दफ्तर बुलाने के बजाय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे.
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वोटर लिस्ट में बदलाव और ECINet: आयोग ने बताया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना वोटर लिस्ट में कोई नाम न जोड़ा जाता है और न ही हटाया जाता है. इस प्रक्रिया की जांच के लिए IIT और IISc के विशेषज्ञों की एक समिति भी बनाई गई है.
CEC को हटाने की मांग खारिज: मुख्य चुनाव आयुक्त (ज्ञानेश कुमार) के कामकाज पर रोक लगाने या उन्हें हटाने की मांग पर आयोग ने कहा कि ऐसी मांग स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही होती है.
वहीं आयोग की ओर कथित आंतरिक नोट मीडिया में जारी होने पर आयोग ने यह भी कहा कि उसने अपनी कोई आंतरिक फाइल या नोट मीडिया को जारी नहीं किया था. दशहरे की छुट्टियों के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है. आयोग ने मामले में विस्तृत बिंदुवार जवाब देने की अनुमति भी मांगी है.
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आयोग में ज्ञानेश कुमार के फैसले को ECI ने किया खारिज
ईसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सीईसी पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है. चुनाव आयोग ने कहा है कि याचिका सिर्फ एक खबर पर आधारित है. सीईसी ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले लेने की खबर को गलत बताया गया है.
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चुनाव आयोग ने बताया, आयोग में फैसला कैसे होता है!
हलफनामे में कहा गया है कि एसआईआर के तीनों आदेश (जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026) आयोग के सर्वसम्मत फैसले हैं. हलफनामे में कहा गया है कि फाइल सिस्टम के मुताबिक फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है. नोट या सवाल फैसले नहीं होते हैं.
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क्या था 28 जुलाई एडिशनल सेक्रेटरी का निर्देश?
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हलफनामे के मुताबिक, 28 जुलाई का ऑर्डर एडिशनल सेक्रेटरी ने जारी किया था. दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को लिखा. 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ. हलफनामे में बताया गया है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसे सिर्फ सरकार बदल सकती है. एसआईआर डिक्लेरेशन अलग है. 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म भी दो हिस्सों फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन में बंटेगा.