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नोएडा के वृद्धाश्रम की डरावनी तस्वीर...रस्सियों में बंधे अर्धनग्न बुजुर्ग, जानवरों जैसा सलूक, पुलिस ने 39 को बचाया

नोएडा के सेक्टर 55 स्थित वृद्ध आश्रम से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है. जिसमें बुजुर्गो के साथ जानवरों जैसा सलूक किया जा रहा था. हैरानी तो तब हुई जब इनके अपनों ने कहा, 'सब ठीक है.'

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जिस आंगन में कभी गूंजती थी हंसी की खनक.. आज वहां सुनाई देती है चीखों की सनक. मां-बाप जो थे कभी घर की शान.. अब पड़े हैं जंजीरों में जैसे हों कोई अपराधी जान. जब नोएडा में हरकत में आया सिस्टम तो ऐसा खौफनाक सच सामने आया.. जिसने दुनिया को दहला दिया.  

ये है नोएडा का वो सच.. जिसे जानकर आंखें फटी रह जाएंगी.. दिल कांप उठेगा.. और उन्हें तमाचा देगा जिन्होंने अपने घर के बुजुर्गों की जिंदगी को नर्क बनाया. आशीर्वाद देने वाले हाथों को बेड़ियों में बांधकर खाने तक के लिए तरसाया.

नोएडा सेक्टर 55 स्थित 'आनंद निकेतन वृद्ध आश्रम'

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मामला है नोएडा के पॉश इलाके सेक्टर-55 में मौजूद ‘आनंद निकेतन वृद्ध आश्रम का. नाम में आनंद है लेकिन अंदर की सच्चाई ऐसी है कि जानकर आप भी सन्न रह जाएंगे, क्योंकि अपनों से बिछड़े इन बुजुर्गों को यहां ममता नहीं, मार मिलती है. देखभाल नहीं, दरिंदगी मिलती है. इज्जत नहीं, इंसानियत का मजाक बनता है और इस नरक का दरवाजा खुला जब एक शख्स ने इस आश्रम का खौफनाक वीडियो लखनऊ के सरकारी दफ्तर तक पहुंचा दिया. वीडियो देखकर अधिकारी अफसर सब सन्न रह गए.

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सोचिए, एक बुजुर्ग महिला कमरे में बंद, हाथ रस्सियों से बंधे और चारों तरफ सन्नाटा. कमरे में ना हवा, ना रोशनी, ना इंसानियत. और जब ये वीडियो वायरल हुआ तो प्रदेश ही नहीं पूरे देश में हड़कंप मच गया. 

लखनऊ से लेकर नोएडा तक प्रशासन की टीमें अलर्ट पर आ गईं. 22 जून की सुबह एक गुप्त टीम तैयार की गई, राज्य महिला आयोग, नोएडा पुलिस और समाज कल्याण विभाग तीनों ने मिलकर छापेमारी का प्लान बनाया. और फिर हुआ वो जो किसी ने सोचा भी नहीं था. जब टीम इस वृद्ध आश्रम में पहुंची, तो दरवाजे बंद थे, ताले लगे थे, अंदर से चीखें आ रही थीं और हकीकत किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं थी, एक बुजुर्ग महिला कमरे में रस्सियों से बंधी मिली. कई बुजुर्ग पुरुष तहखाने जैसे कमरों में बंद थे, किसी के पास कपड़े नहीं थे, किसी के शरीर पर जख्मों के निशान थे. वहां बदबू थी, गंदगी थी, लेकिन सबसे ज्यादा थी बेइंसाफी. 

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तस्वीरों को देखकर मन में सिर्फ एक ही सवाल आया.. क्या यही है हमारा समाज.. जहां मां-बाप को पुराने फर्नीचर की तरह छोड़ दिया जाता है. जहां बुजुर्ग सिर्फ ‘बोझ’ समझे जाते हैं. कहां गई वो संस्कृति जहां बड़ों को भगवान माना जाता था. कहां गई इंसानियत.. जिसके किस्से सुनाए जाते हैं.

इस वृद्ध आश्रम का नाम है ‘आनंद निकेतन’ लेकिन आनंद यहां सिर्फ धंधा बन चुका था. जानकारी के मुताबिक, हर बुजुर्ग को यहां रखने के लिए 2.5 लाख रुपये का ‘डोनेशन’ लिया जाता था. ऊपर से हर महीने का 6000 का खर्चा. लेकिन देखभाल के नाम पर दरिंदगी, अत्याचार परोसा जाता था. 

परिवारवालों ने कहा 'सब ठीक है'

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न कोई डॉक्टर, न कोई स्टाफ, खाना अधपका, कपड़े गंदे और इलाज की कोई सुविधा नहीं. यहां तक कि एक महिला खुद को ‘नर्स’ बता रही थी लेकिन निकली सिर्फ 12वीं पास और हैरानी की बात ये कि जब इन बुजुर्गों के परिवारवालों से बात की गई, तो उन्होंने कहा 'सब ठीक है'
 
धिक्कार है ऐसी औलाद पर जिनके लिए.. रस्सियों से बंधे मां-बाप को देख कर भी सब ठीक है.  जांच की गई तो उससे भी चौंकाने वाला खुलासा तो ये हुआ कि कई बुजुर्ग नोएडा के रईस घरानों से हैं और उनके अपने ही उन्हें इस नर्क में छोड़ गए. जिसके बाद रेड के दौरान कुल 39 बुजुर्गों को रेस्क्यू किया गया. कुछ के चेहरे पर उम्मीद की चमक लौटी कुछ की आंखों में अब भी डर था वो नहीं समझ पा रहे थे क्या वो आजाद हो गए हैं या किसी और कैदखाने में भेजे जा रहे हैं.
 
फिलहाल सभी को सरकारी वृद्ध आश्रम में शिफ्ट किया जा रहा है. जहां उन्हें कम से कम इज्ज़त और सुरक्षा तो मिल सके और साथ ही शुरू हो चुकी है कानूनी कार्रवाई. इस अमानवीय आश्रम के खिलाफ और उन अपराधियों के खिलाफ जिन्होंने इनकी जिंदगी को नर्क बनाया जिन्होंने इनपर अत्याचार और क़हर बरपाया.

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