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PM मोदी ने BRICS देशों को क्यों किया अलर्ट? आतंकवाद से लेकर साइबर वॉर तक खुलकर रखी बात

ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहे भारत ने सदस्य देशों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों, आतंकवाद और साइबर खतरों से निपटने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया है. यह संदेश एनएसए अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक में दिया.

PM मोदी ने BRICS देशों को क्यों किया अलर्ट? आतंकवाद से लेकर साइबर वॉर तक खुलकर रखी बात
Image Source: X/ @narendramodi
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BRICS 2026: दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ ही सुरक्षा चुनौतियां भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ती जा रही हैं. ऐसे समय में भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों को भविष्य के खतरों के प्रति सतर्क रहने और मिलकर उनका सामना करने का संदेश दिया है. भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी जिम्मेदारी के तहत उसने सदस्य देशों के बीच सहयोग और एकजुटता को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है.

दरअसल, नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में आतंकवाद, साइबर अपराध, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दे पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं. ऐसे में केवल किसी एक देश की कोशिश पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि सामूहिक प्रयास ही स्थायी समाधान दे सकते हैं.

ग्लोबल साउथ को मजबूत बनाने पर भारत का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों से मुलाकात के दौरान कहा कि भारत की अध्यक्षता का उद्देश्य केवल संगठन को मजबूत करना नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को और प्रभावी बनाना भी है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास दुनिया की कई बड़ी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है. पीएम मोदी ने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा को वर्तमान समय की सबसे गंभीर चुनौतियों में शामिल बताया. 

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ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी

पीएम मोदी ने आगे यह भी कहा कि तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच सुरक्षा से जुड़े खतरे भी नए रूप में सामने आ रहे हैं. ऐसे में सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना साझा करना बेहद जरूरी है. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकताओं में ग्लोबल साउथ को मजबूत करना प्रमुख रूप से शामिल है. लंबे समय से विकासशील देशों की कई समस्याएं वैश्विक मंचों पर अपेक्षित महत्व नहीं पा सकी हैं. ब्रिक्स के माध्यम से भारत इन देशों की चिंताओं को मजबूती से सामने लाने की कोशिश कर रहा है.

अजीत डोभाल ने किस बात पर किया आगाह 

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इस बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सदस्य देशों को आधुनिक सुरक्षा खतरों के प्रति सावधान किया. उन्होंने कहा कि आज के गैर-पारंपरिक खतरे किसी सीमा को नहीं मानते. साइबर हमले, आतंकवाद के नए तौर-तरीके और उभरती तकनीकों का गलत इस्तेमाल ऐसे खतरे हैं जो पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को चुनौती दे रहे हैं. अजीत डोभाल ने कहा कि BRICS देशों के पास अलग-अलग क्षेत्रों और महाद्वीपों का अनुभव है. यदि इन अनुभवों को साझा किया जाए तो कई वैश्विक समस्याओं का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है. उन्होंने सदस्य देशों से मिलकर रणनीति बनाने और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया.

साइबर चुनौतियों पर हुआ मंथन

बैठक के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, सप्लाई चेन में आने वाली बाधाएं, साइबर सुरक्षा, पर्यावरणीय अस्थिरता और आतंकवादी संगठनों द्वारा नई तकनीकों के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि ये सभी विषय आने वाले समय में वैश्विक स्थिरता को सीधे प्रभावित कर सकते हैं.

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भारत की अध्यक्षता को मिला सदस्य देशों का समर्थन

दिलचस्प बात यह रही कि ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने वर्ष 2026 के लिए भारत की अध्यक्षता का खुलकर समर्थन किया. इससे यह संकेत मिला कि संगठन के भीतर भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है. भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई की बात को विशेष महत्व दिया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जा रहा है.

BRICS में कौन-कौन से देश हैं शामिल?

वर्तमान समय में ब्रिक्स दुनिया के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बनकर उभरा है. इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं, जिनमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. इसके अलावा 10 पार्टनर देश भी संगठन के साथ जुड़े हुए हैं. जिनमें नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, वियतनाम, यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, बेलारूस, बोलीविया जैसे देश भी शामिल है. 

बताते चलें कि नई दिल्ली में हुई यह बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भविष्य की वैश्विक रणनीति का संकेत भी थी. भारत ने साफ कर दिया है कि बदलती दुनिया में चुनौतियों का सामना अकेले नहीं किया जा सकता. आतंकवाद से लेकर साइबर खतरों तक, हर मोर्चे पर सामूहिक प्रयास ही सफलता की कुंजी होंगे. ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भारत इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है.

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