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अतीक के बेटे उमर के गुर्गों ने टोल प्लाजा पर मचाया उत्पात, बिना टोल दिए 30 गाड़ियों ने पार किया बैरियर, FIR दर्ज
अतीक के बेटे उमर को जेल से ले जाते वक्त उसके पीछे-पीछे काफिले में आ रहीं करीब 30 निजी गाड़ियों ने टोल प्लाजा पर उत्पात मचाया. इस दौरान उमर समर्थकों ने बिना टोल दिए बैरियर पार किया और टोल कर्मियों को जान से मारने की धमकी भी दी.
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लखनऊ जेल से प्रयागराज ले जाते समय नवाबगंज टोल प्लाजा पर माफिया अतीक अहमद के बेटे उमर अहमद के समर्थकों की दबंगई सामने आई है. यहां उमर को पारिवारिक जनाजे में शामिल होने के लिए जाते वक्त उसके काफिले में शामिल करीब 25 से 30 निजी वाहनों ने भी बिना टोल दिए बैरियर पार कर लिया, जिसके कारण भारी हंगामा हुआ.
इस दौरान इन वाहनों को रोकने की कोशिश कर रहे टोल कर्मचारियों को कथित तौर पर धमकी दी गई और अभद्रता भी हुई. जानकारी के मुताबिक टोल प्लाजा प्रबंधन ने इस संबंध में नवाबगंज थाने में FIR भी दर्ज कराई है.
टोल कर्मचारियों ने वाहनों को रोकने की कोशिश की तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्रता और धमकी दी गई. टोल प्लाजा प्रबंधन की ओर से नवाबगंज थाने में मामले की तहरीर देकर एफआईआर दर्ज कराई गई है. इतना ही नहीं दबंगई में शामिल गाड़ियों के के नंबर भी पुलिस को दिए गए हैं.
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टोल बैरियर को तोड़कर निकलने की कोशिश
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टोल प्लाजा प्रबंधन की ओर से नवाबगंज थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक 8 अगस्त 2026 की रात करीब 3:50 बजे नवाबगंज टोल प्लाजा के बूथ नंबर-3 पर उमर अहमद को पुलिस अभिरक्षा में जिला कारागार लखनऊ से प्रयागराज लाया जा रहा था. इस दौरान सरकारी वाहनों के पीछे-पीछे कई निजी वाहन भी पहुंचे और टोल बैरियर को तोड़कर आगे निकलने की कोशिश की, जिसका टोल कर्मचारियों ने विरोध किया और उन्हें रोकने की कोशिश की. इस दौरान काफिले में शामिल ड्राइवर्स और दूसरे लोगों ने उनके साथ अभद्रता की, गाली-गलौज दी के साथ-साथ जान से मारने की धमकी दी गई.
उमर के गुर्गों ने टोल कर्मियों को दी जान से मारने की धमकी
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इतना ही नहीं टोल कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि वाहनों ने बेहत तेज स्पीड में, खतरनाक तरीके से टोल प्लाजा पार किया, जिसके कारण सरकारी टोल बैरियर को नुकसान भी पहुंचा और राजस्व की भी क्षति हुई. इसके अलावा शिकायत में कहा गया है कि करीब 25-30 वाहनों ने बिना टोल अदा किए टोल प्लाजा पार कर लिया. जानकारी के मुताबिक टोल पर लगे सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से आरोपियों की पहचान की जा रही है और पुलिस सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही कर रही है.
अतीक के बेटे के जनाजे में उमड़ी भीड़
आपको बता दें कि अतीक अहमद के 21 वर्षीय बेटे अबान को शनिवार शाम कसारी-मसारी कब्रिस्तान में उसके पिता की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. अंतिम विदाई के दौरान उसके तीनों भाई अली, उमर और अहजम ने उसे कंधा दिया.
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अबान के जनाजे में करीब पांच से छह हजार लोग पहुंचे, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए कब्रिस्तान और आसपास काफी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. अबान के शव को लेकर उसका बड़ा भाई अहजम जब कब्रिस्तान पहुंचा तो उसके पीछे बड़ी संख्या में लोग भी अंदर जाने लगे.
शनिवार को अतीक के बेटे को किया गया सुपुर्द-ए-ख़ाक
पुलिस ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और बैरिकेडिंग टूट गई. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सख्ती करनी पड़ी. कसारी-मसारी कब्रिस्तान में अबान के दादा फिरोज अहमद, चाचा अशरफ और भाई असद की कब्रें भी हैं.
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पुलिस ने अंतिम संस्कार के दौरान केवल परिवार और चुनिंदा रिश्तेदारों को कब्रिस्तान के भीतर जाने की अनुमति दी. इलाहाबाद हाईकोर्ट से पैरोल मिलने के बाद अली और उमर शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज पहुंचे. अली को झांसी जेल से करीब 400 किलोमीटर की दूरी तय कर लाया गया, जबकि उमर को लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया गया. दोनों को अंतिम समय में पुलिस वैन से बाहर निकाला गया. आमना-सामना होते ही अली और उमर एक-दूसरे से गले मिले. इसके बाद दोनों ने मस्जिद में नमाज अदा की और अबान को मिट्टी दी.
परिजन के मुताबिक, अली को सुबह करीब साढ़े नौ बजे झांसी जेल से लगभग 30 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में रवाना किया गया था. यात्रा के दौरान पुलिस वैन पर पर्दे लगाए गए थे, ताकि अली का चेहरा बाहर से दिखाई न दे. उमर को भी इसी तरह सुरक्षा घेरे में लखनऊ से रवाना किया गया. उमर करीब साढ़े चार बजे और अली करीब साढ़े पांच बजे प्रयागराज पहुंचा.
भारी सुरक्षा के बीच जेल से पहुंचे अतीक के बेटे
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जब अबान के शव को वाहन से उतारा जा रहा था, उस समय अली पुलिस वैन में मौजूद था. उसने वहां मौजूद लोगों को शव उतारने के तरीके को लेकर निर्देश भी दिए. अंतिम संस्कार के बाद अली और उमर को परिवार से मिलने की अनुमति दी गई. हाईकोर्ट ने पैरोल के दौरान दोनों को अपने भाई अहजम और बुआ से मुलाकात की अनुमति दी थी.
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पुलिस ने कब्रिस्तान से कुछ दूरी पर स्थित एक मस्जिद के बाहर इसके लिए इंतजाम किया था. मस्जिद के बाहर टेंट लगाया गया था, जहां दोनों परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर रहे हैं. करीब एक घंटे की मुलाकात के बाद दोनों को वापस जेल ले जाया जाएगा. अली को झांसी और उमर को लखनऊ जेल ले जाने की तैयारी है. दोनों को करीब चार साल बाद पहली बार पैरोल मिली है. अबान की मां शाइस्ता परवीन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुईं. वह वर्ष 2023 से फरार हैं. इससे पहले वह अपने पति अतीक अहमद और बेटे असद के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई थीं.
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अबान की सड़क हादसे में हुई थी मौत!
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गौरतलब हो कि अबान की गुरुवार सुबह झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई थी. वह झांसी जेल में बंद अपने भाई अली से मिलने के लिए प्रयागराज से रवाना हुआ था. क्रेटा कार में उसके साथ चार अन्य लोग भी थे. सुबह करीब 10:30 बजे हाईवे पर एक जानवर को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई. हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए. अबान और सोनू के शव शुक्रवार तड़के करीब चार बजे एक ही एंबुलेंस से झांसी से प्रयागराज के हटवा गांव लाए गए थे.