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बंगाल में दुर्गा पूजा की बदली तस्वीर, भगवा में तैनात होंगे 20 हजार वॉलंटियर्स, इमारतों का रंग भी हुआ केसरिया!

बंगाल में सरकार क्या बदली, पूरी तस्वीर ही बदलने लगी है. एक ओर जहां दुर्गा पूजा में 20,000 वॉलंटियर्स की भगवा कपड़े में तैनाती होगी तो वहीं सरकारी इमारतें भी केसरिया रंग में रगने लगी हैं. वहीं कलकत्ता HC में भी दाखिल PIL 'खारिज' हो गई.

Image Source-IANS
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बंगाल में सरकार क्या बदली, ऐसा लगता है जैसे कि राज्य की पूरी तस्वीर ही बदल गई है. इससे पहले एक ओर जहां हिंदूवादी संगठन और लोग सनातन संस्कृति और पहचान के कथित अपमान के आरोप लगाते थे, वहीं अब जमकर इसका प्रचार-प्रसार हो रहा है. पहले रामनवमी शोभायात्रा, गणेश चतुर्थी, श्रीराम के नारे, भगवा रंग आदि पर TMC सरकार और उससे जुड़े लोगों को कथित तौर पर दिक्कत होती थी, कई बार तो कार्रवाई भी हुई, लेकिन अब उसी राज्य में सब बदल गया है. 

बंगाल में भगवा कपड़े में तैनात होंगे सिविक वॉलंटियर्स

एक ओर जहां दुर्गा पूजा के दौरान सिविक वॉलंटियर्स के कपड़े का रंग बदल गया है तो वहीं सरकारी भवनों, इमारतों के रंग भी भगवा रंग के होंगे. हालांकि इसको लेकर विवाद भी हुआ, कोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल हुई, लेकिन फिर उसे वापस ले लिया गया, कोर्ट ने इसी आधार पर PIL भी खारिज कर दी गई.

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आपको बता दें कि बीते 15 सितंबर को कोलकाता पुलिस के सूत्रों ने बताया कि कोलकाता पुलिस के वॉलंटियर आने वाली दुर्गा पूजा के दौरान केसरिया रंग के कपड़े पहनेंगे. इसी के तहत, लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) ने 20,000 वॉलंटियर्स के लिए कपड़े डिजाइन किए हैं.

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कोलकाता पुलिस करेगी 20,000 वॉलंटियर्स की भर्ती

लालबाजार के एक अधिकारी के अनुसार, ये उपाय इसलिए किए गए हैं ताकि वॉलंटियर्स इन कपड़ों को पहनकर लंबे समय तक आराम से अपनी ड्यूटी कर सकें. अधिकारी के मुताबिक, आने वाली दुर्गा पूजा के लिए इन 20,000 कपड़ों और टोपियों को बनाने में 89 लाख रुपए खर्च होंगे.

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दुर्गा पूजा से पहले, कोलकाता पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पूजा पंडालों में भीड़ को संभालने के लिए वॉलंटियर्स की भर्ती करती है. आमतौर पर, वॉलंटियर्स को ड्यूटी के दौरान आधी बाजू वाली टी-शर्ट पहननी पड़ती थी. इस साल दुर्गा पूजा अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में मनाई जाएगी.

सभी वॉलंटियर्स को पहनने होंगे भगवा ड्रेस, दिए गए ऑर्डर

कोलकाता पुलिस के जवानों और अधिकारियों के अलावा, होम गार्ड और सिविक वॉलंटियर्स को भी पूजा के दौरान ड्यूटी करनी होती है, जो विजयादशमी तक चलेगी. दुर्गा पूजा के दौरान, कोलकाता में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए पुलिस वॉलंटियर्स पर निर्भर रहती है.

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स्कूल और कॉलेज के छात्रों के अलावा, पुलिस अलग-अलग इलाकों से नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के सदस्यों और क्लब के सदस्यों को भी वॉलंटियर के तौर पर भर्ती करती है. महालया के बाद, संबंधित डिवीजन में वॉलंटियर्स को ट्रेनिंग भी दी जाती है.

पुलिस के साथ मिलकर काम करने वाले वॉलंटियर्स के कपड़ों या यूनिफॉर्म पर भी ध्यान दिया जाता है. इसलिए, दुर्गा पूजा से एक महीने पहले कोलकाता पुलिस ने यूनिफॉर्म डिजाइन की है. लालबाजार के अधिकारी ने बताया कि दो तरह के केसरिया रंग के कपड़े बनाए जा रहे हैं. कॉलर और पूरी बाजू वाले इन कपड़ों का रंग गहरा केसरिया और हल्का केसरिया होगा. पुलिस ने 12,000 गहरे केसरिया और 8,000 हल्के केसरिया रंग के कपड़े डिजाइन किए हैं.

क्या करेंगे ये वॉलंटियर्स?

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कपड़ों के सामने की तरफ सफेद रंग में कोलकाता पुलिस का लोगो होगा. साथ ही, सामने छोटे अक्षरों में और पीछे बड़े अक्षरों में 'कोलकाता पुलिस वॉलंटियर' लिखा होगा. इसके अलावा, वॉलंटियर्स के लिए नारंगी रंग की टोपियां भी होंगी. लालबाजार ने 20,000 कपड़ों के लिए 73 लाख रुपए और टोपियों के लिए 16 लाख रुपए आवंटित किए हैं.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि वॉलंटियर्स का एक हिस्सा ट्रैफिक संभालने के लिए इन कपड़ों को पहनकर सड़कों पर तैनात रहेगा. इसके अलावा, कोलकाता के हर बड़े पंडाल में वॉलंटियर्स तैनात किए जाएंगे, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग आते हैं. वे मुख्य रूप से आने वाले लोगों की सुरक्षा और हिफाजत पर नजर रखेंगे.

बंगाल में सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के खिलाफ PIL वापस

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वहीं एक दूसरे मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया. मुख्य न्यायाधीश आरवी घुगे और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. याचिकाकर्ता पेशे से वकील हैं और उन्होंने सार्वजनिक स्थानों एवं संरचनाओं को भगवा रंगने पर सरकारी धन खर्च किए जाने पर सवाल उठाया था.

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बंगाल में केसरिया रंग में रंगे सरकारी भवन!

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याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस काम पर बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य के सरकारी धन खर्च किया जा रहा है और यह जनता के पैसे का अनावश्यक खर्च है. याचिका में उदाहरण के तौर पर कोलकाता के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीवारों का जिक्र किया गया. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इसकी दीवारों को भगवा रंग से रंगा गया है. इसके अलावा एक मीडिया संस्थान के गेट को भी कथित तौर पर भगवा रंगने का मुद्दा अदालत के सामने उठाया गया.

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हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई मामला पेश नहीं कर सके, जिसमें अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो. इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया.

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