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‘आदेश देने के लिए मजबूर न करें…’, मणिपुर हिंसा पर सुनवाई, ऐसा क्या हुआ भड़क गए CJI, किसे लगाई फटकार?
पिछले तीन साल में 8 जिलों के राहत कैंप में करीब 640 लोगों की मौत हो गई. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगते हुए कड़ी फटकार लगाई है.
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CJI Suryanaknt On Manipur: मणिपुर पिछले तीन साल से हिंसा की आग में जल रहा है. मैतेई-कुकी समुदाय के बीच तनाव में कई मासूम जानें चली गई. राहत शिविर में भी लोग सेफ नहीं हैं. पिछले तीन साल में 8 जिलों के राहत कैंप में करीब 640 लोगों की मौत हो गई. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगते हुए कड़ी फटकार लगाई है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मणिपुर के राहत शिविरों में हुई कथित अप्राकृतिक मौतों और यौन उत्पीड़न के मामलों पर गंभीर चिंता जताई है. शीर्ष अदालत ने सख्त निर्देश देते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने जवाब में सभी दस्तावेज भी मांगे हैं.
CJI ने पूछा क्या कार्रवाई हुई?
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लाइव लॉ की खबर के अनुसार, CJI सूर्यकांत वाली बेंच ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का जिक्र किया. जिसमें राहत शिविरों में रह रहे विस्थापितों की हालत के बारे में बताया गया था. CJI ने राज्य सरकार को फटकारते हुए कहा,
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‘अपने मुख्य सचिव से कहिए कि अदालत को आदेश पारित करने के लिए मजबूर न करें. हमें बताइए कि आपने क्या कदम उठाए हैं.’
चीफ जस्टिस ने मणिपुर के एडवोकेट जनरल से भी जवाब मांगा. उन्होंने सख्त लहजे में कहा, 4 जुलाई को समिति ने राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों की 25 अप्राकृतिक मौतों को लेकर जो जानकारी मांगी थी, उस पर क्या कार्रवाई हुई?
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कोर्ट ने राहत शिविरों में सभी 25 संदिग्ध मौतों की पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है. जानकारी के मुताबिक, संदिग्ध मौतों में केवल 20 का ही पोस्टमार्टम करवाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट के राज्य सरकार से पांच बड़े सवाल
- राहत शिविरों में हुई मौतों खासकर अप्राकृतिक मौतों की जांच के लिए राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
- 34 संदिग्ध मौत फिर 20 का ही पोस्टमार्टम क्यों? बिना पोस्टमार्टम मौत की वजह कैसे तय की गई?
- अप्राकृतिक और संदिग्ध मौत के केस में जांच के लिए क्या किया गया, कितने मामलों में FIR दर्ज की गई?
- मृतकों के परिजनों को मुआवजा राशि देने का आधार क्या था? केवल 20-30 हजार मुआवजा ही क्यों मिला?
- राहत शिविर में रह रहे विस्थापितों की सुरक्षा, सम्मान और मेडिकल सुविधाओं और जरूरतों के लिए क्या कदम उठाए गए?
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. बेंच ने कहा, सभी संदिग्ध मौतों के मामलों में FIR दर्ज कराई जाए और मौत के कारणों की हाई लेवल जांच की जाए. यानी हर संदिग्ध मौत की जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं.
कोर्ट में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने क्या बताया?
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश की. जिसमें बताया गया कि
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- आठ जिलों में 42 विशेष जांच दल यानी एसआईटी बनाई गई
- कुल 3,020 मामलों की जांच चल रही है
- इनमें 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है
- 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई है
- 1,135 मामलों की जांच अभी जारी है
- कुल 33 मामलों में ट्रायल भी शुरू हो चुका है
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की रिपोर्ट पर पीड़ितों के वकील ने बताया कि इन मामलों में गुवाहाटी कोर्ट में केवल हफ्ते में दो दिन ही सुनवाई हो रही है. जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हफ्ते में दो दिन सुनवाई होने से भी ट्रायल आगे बढ़ेगा. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया कि वह इस मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट की जरूरतों को तुरंत पूरा करने पर विचार करे.
- मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा जारी है
- कुकी वर्सैज मैतेई के बीच दर्जे को लेकर विवाद
- मैतेई समुदाय को ST का दर्जा देने की मांग
- अभी तक हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों की मौत
- 1500 से ज्यादा लोग घायल
हाल ही में मणिपुर के लेइसंगफाई में कुकी समुदाय की दो महिलाओं की हत्या का मामला सामने आया था. इसके पीछे नागा सशस्त्र समूह का हाथ था. पुलिस ने बताया कि महिलाएं अपने खेत में जलाने के लिए लकड़ियां इकट्ठा कर रही थीं, तभी हथियारबंद लोगों ने उन पर कथित तौर पर गोलीबारी की, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. कुकी समुदाय के संगठनों ने इस घटना के लिए एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ-के को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि यह घटना जिरीबाम, तामेंगलोंग और नोनी जिलों में कुकी नागरिकों पर हो रहे हमलों और हत्याओं के सिलसिले के बीच हुई है.