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सिंघु बॉर्डर पर खालिस्तानी ग्रैफिटी लगाने वाले 3 गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने पंजाब तक किया पीछा, ब्रिक्स समिट के बीच एक्शन
दिल्ली पुलिस ने आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के इशारे पर सिंधु बॉर्डर पर खालिस्तान समर्थक भित्तिचित्र बनाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. ब्रिक्स समिट के बीच ये गरिफ्तारी बड़ी मानी जा रही है. पुलिस ने आरोपियों का पीछा पंजाब तक किया और उसे फ़रीदकोट से गिरफ़्तार कर दिल्ली लाई.
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दिल्ली में ब्रिक्स समिट के बीच दिल्ली पुलिस का खालिस्तानियों और उनके गुर्गों पर बड़ा एक्शन हुआ है. दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर खालिस्तान-समर्थक ग्रैफ़िटी लिखने-लगाने के मामले में 3 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली और हरियाणा राज्यों के बीच स्थित सिंधु सीमा पर दीवारों पर आपत्तिजनक नारे और भित्तिचित्र 6 सितंबर को बनाए गए थे.
BRICS समिट के बीच दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन
प्रतिबंधित समूह सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में इस कृत्य की जिम्मेदारी ली थी. जांचकर्ताओं को सिंधु सीमा पर लगे सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों के बारे में सुराग मिले, जिसके आधार पर पुलिस टीम ने तीनों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई कार भी बरामद कर ली है. ये गिरफ्तारी पंजाब के फ़रीदकोट से हुई है.
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CCTV के ज़रिए लगा आरोपियों का सुराग
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरोपियों की पहचान प्रीतपाल, हरमिंदर सिंह और शीशपाल के तौर पर की गई है. सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने सिंघु बॉर्डर के CCTV फुटेज के जरिए उनकी गतिविधियों का पता लगाया और सभी सुराग जुटाए. ये बॉर्डर 2021 के किसान आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आया. सिंधु दिल्ली और हरियाणा के बीच में पड़ता है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों में से एक पन्नू के सीधे संपर्क में था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
दिल्ली पुलिस ने खालिस्तानियों का किया पंजाब तक पीछा
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अधिकारियों ने बताया कि यह घटना तब हुई जब विदेशों में सक्रिय खालिस्तान समर्थक संगठनों ने पाकिस्तान की अंतर-सेवा खुफिया (आईएसआई) के सीधे निर्देशों के तहत अपने परिचालन ढांचे में बदलाव किया और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई से बचने के लिए हिंसक अपराध से ध्यान हटाकर राजनीतिक प्रचार की ओर रुख किया.
अब जब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां खालिस्तान मुद्दे पर भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं, तो इन समूहों ने अपने काम करने के तरीके को बदलने का फैसला किया है. विदेशों में खालिस्तान आंदोलन हिंसक आंदोलन की बजाय तेजी से एक राजनीतिक अभियान की ओर बढ़ रहा है.
सिंघु बॉर्डर पर खालिस्तान-समर्थक ग्रैफ़िटी लगाने का है मामला
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इस आंदोलन को नियंत्रित करने वाली पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी ने खालिस्तान समर्थक समूहों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वे खुले तौर पर गैंगस्टरों के साथ संपर्क न करें जैसा कि वे इन दिनों करते आ रहे हैं. खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय के मद्देनजर हुआ है.
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अधिकारी ने कहा, "यह कार्रवाई इसलिए संभव हो पाई क्योंकि ये खालिस्तानी समूह हिंसा, जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में लिप्त थे. विदेशों में आपराधिक गिरोहों के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों ने एजेंसियों को हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जघन्य अपराधों के लिए उन पर कड़ी कार्रवाई करने का अवसर दिया."
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खालिस्तानी आतंकी पन्नू के इशारे पर हुई थी हरकत
आईएसआई खालिस्तान समर्थक समूहों, जैसे कि एसएफजे, को प्रासंगिक बनाए रखने के महत्व को समझती है. उन्हें इस मुद्दे को विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिसके तहत जनमत संग्रह आयोजित करना, मार्च निकालना और पंजाब से अलग खालिस्तान की मांग करना शामिल है.
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आपको बता दें कि सरकार ब्रिक्स समिट को देखते हुए पहले से ही ऐसी किसी भी गतिविधियों पर नज़र रखी हुई थीं. किसी भी अवांछित तत्वों को उनके मकसद में कामयाब नहीं होने देने को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चौंकन्नी थीं.