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दिल्ली इमारत हादसा: 40-50 साल पुरानी थी बिल्डिंग, बेसमेंट में चल रहा था काम, कैसे पल भर में मौत का मंजर बना ‘हॉस्टल’
दिल्ली में पहले भी बिल्डिंग गिरने से मासूमों की मौत, बिल्डिंग में आग लगने से मौत, बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भरने से मौत, जैसे कई मामले कई बार सामने आए हैं, लेकिन प्रशासन की नींद तब-तक नहीं खुलती जब तक अगला कोई हादसा न हो जाए.
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Delhi's Satya Niketan Building Collapse: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई घटना ने फिर एक बार प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुखद बात तो ये ही है हर बार ये सवाल जस के तस क्यों बने रहते हैं. फिर वही लापरवाही और प्रशासन की नाकामी सामने आती है, कार्रवाई के नाम पर क्या होता है? कुछ लोगों पर FIR, जेल और फिर जमानत, लेकिन सिस्टम की खामी में सुधार के लिए कोई कार्रवाई नहीं होती. सवाल हॉस्टल संचालकों पर भी उठता है जो सुविधाओं के नाम पर छात्रों को कुछ नहीं देते लेकिन मोटा किराया जरूर वसूलते हैं. अभी जांच होगी, कमेटी बनेगी, कई अधिकारी इधर से उधर होंगे, हो सकता है कई इमारतों पर एक्शन के नाम पर बुलडोजर भी चल जाए, लेकिन फिर वही ढपली वही राग.
सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई. इस बिल्डिंग में ज्यादातर छात्र रहते हैं, यहां हॉस्टल डेज के नाम से पीजी चल रही थी. माना जा रहा है मलबे में करीब 30-35 लोग दबे थे. कुल सात लोगों को एम्स ट्रॉमा सेंटर और एक शख्स को सफदरजंग अस्पताल लाया गया था. AIIMS ट्रॉमा सेंटर के अनुसार, वहां लाए गए लोगों में से दो को मृत घोषित कर दिया गया. कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है. वहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया.
40-50 साल पुरानी थी इमारत
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दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह इमारत 40-50 साल पुरानी थी, जिसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी (पेइंग गेस्ट) के तौर पर किया जा रहा था. घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था. मलबे से एक शख्स को निकालकर एम्स के ट्रॉमा डिपार्टमेंट ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
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वहीं, जब तक एंबुलेंस और पुलिस की टीम नहीं पहुंची तब तक स्थानीय लोग और छात्र तुरंत एक्शन मोड में आए और खुद रेस्क्यू शुरू किया. तस्वीरों में देखा गया कि लोग मलबा हटाकर घायलों की तलाश में जुटे हुए हैं. वहीं, तुरंत ब्लिंकिट से ऑक्सीजन सिलेंडर ऑर्डर किए गए ताकि मलबे में दबे हुए लोगों की सांसें बचाईं जा सके.
आसपास की इमारतों को कराया गया खाली
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बताया जा रहा है हादसा इतना भयंकर था कि आसपास की एक दो बिल्डिंग भी हिल गईं. एहतियात के तौर पर पुलिस ने उन्हें खाली कराया. इलाके में रहने वाली दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट ने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा, दोपहर का खाना खाने के तुरंत बाद हमें लगा कि इलाके में भूकंप आया है. हम चौथी मंजिल पर थे और महसूस कर सकते थे कि उस समय पूरी बिल्डिंग हिल रही थी. हम बालकनी में आए तो देखा कि चारों तरफ धूल ही धूल थी. फिर भी, हमें लगा कि यह भूकंप का असर है. छात्रों ने यह भी कहा कि हमें और हमारे पैरेंट्स को लगता है कि हम अब यहां सुरक्षित नहीं हैं.
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छात्रा ने बताया, नीचे आने के बाद ही हमें पता चला कि एक इमारत गिर गई है. पुलिस या फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही, मैंने और कुछ अन्य लोगों ने मलबे से एक व्यक्ति को बाहर निकाला. उन्होंने आगे कहा कि इलाके में अफरातफरी मची हुई है. हमारे माता-पिता लगातार फोन कर रहे हैं. छात्रा ने चिंता जताई अब नहीं लगता यहां रहना सुरक्षित है. हालात के बारे में बताते हुए एक और चश्मदीद ने कहा कि मलबे के नीचे अभी भी करीब 20-30 लोग फंसे हो सकते हैं. दिल्ली में इससे पहले भी बिल्डिंग गिरने से मासूमों की मौत, बिल्डिंग में आग लगने से मौत, बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भरने से मौत, जैसे कई मामले कई बार सामने आए हैं, लेकिन प्रशासन की नींद तब-तक नहीं खुलती जब तक अगला कोई हादसा न हो जाए. क्योंकि आम आदमी की जान की कीमत जीरो है, सरकारी महकमें मलाई खा रहे हैं, सरकारी बाबू जिस इमारत में काम कर रहे हैं वो बिल्कुल चकाचक और हाईटेक हैं, भुगत रहे हैं तो वे लोग जो मामूली सी सैलेरी में रहने का ठीक-ठाक ठिकाना तलाशते हैं, वे छात्र जो पढ़ाई के खर्चों, खाने और किराए में संतुलन बनाते हुए गुजारा कर रहे हैं.