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लोकसभा में पेश संविधान संशोधन विधेयक 2026, चर्चा में राहुल गांधी का नाम नहीं
वोटिंग हुई कि बिलों पर चर्चा की जाए या नहीं. जिसके पक्ष में 251, जबकि विपक्ष में 185 वोट पड़े.
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लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने की मंजूरी मिल गई. महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन को लागू करने के उद्देश्य से लाए गए इस अहम विधेयक को सदन में मत विभाजन के बाद स्वीकृति दी गई.
विपक्ष की मांग पर वोटिंग की औपचारिक प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके बाद मत विभाजन कराया गया. इस दौरान 251 सांसदों ने विधेयक के समर्थन में वोट दिया जबकि 185 सांसदों ने इसका विरोध किया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परिणाम घोषित करते हुए बताया कि आंकड़े परिवर्तन के अधीन हो सकते हैं.
बिल के पक्ष-विपक्ष में कितने वोट पड़े?
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केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में खड़े होकर इस विधेयक को पेश किया, जो विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे पहले भी सांसदों ने इस बिल को चर्चा के लिए पेश करने के पक्ष में मतदान किया था. वोटिंग हुई कि बिलों पर चर्चा की जाए या नहीं. जिसके पक्ष में 251, जबकि विपक्ष में 185 वोट पड़े.
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इस दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के साथ-साथ परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी लोकसभा में पेश किए गए.
कांग्रेस ये 7 नेता रखेंगे बात
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महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए कांग्रेस की ओर से जिन सांसदों के नाम तय किए गए हैं उनमें राहुल गांधी शामिल नहीं है. इनमें,
प्रियंका गांधी
परिणिती शिंदे
गौरव गोगोई
केसी वेणुगोपाल
मनीष तिवारी
के सुरेश
मोहम्मद जावेद
आमतौर पर लोकसभा में प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया जाता है लेकिन जब किसी निर्णय पर विवाद होता है, तो 'डिवीजन' यानी मत विभाजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है. इस प्रक्रिया में ऑटोमेटिक वोट रिकॉर्डर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसमें सांसद 'हां', 'ना' या 'अनुपस्थित' के रूप में अपना वोट दर्ज करते हैं.
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मत विभाजन के बाद वोट स्लिप्स का भी इस्तेमाल किया गया. इस दौरान कुल 333 सांसदों ने मतदान किया और इस चरण में किसी ने भी मतदान से परहेज नहीं किया. लोकसभा के महासचिव उत्पल सिंह ने सदन को वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि अगर कोई सदस्य अपना वोट बदलना चाहता है, तो वह स्लिप के माध्यम से ऐसा कर सकता है.
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वोट तभी मान्य होगा, जब सदस्य पहली घंटी के बाद और दूसरी घंटी से पहले सही समय पर बटन दबाएंगे. सांसद अपने वोट को व्यक्तिगत परिणाम बोर्ड पर भी देख सकते हैं. विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक को पेश किए जाने के दौरान मत विभाजन की मांग की थी.