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सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व एमपी के सीएम मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने इस नाट्य रूपांतरण को भारतीय संस्कृति, पराक्रम, दानवीरता, न्याय व्यवस्था और सुशासन जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करने का माध्यम बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि यह प्रयास आज की नई पीढ़ी को अपने प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य और आदर्शों से जोड़ने के वृहद अभियान का एक हिस्सा है.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के महानायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित महानाट्य का आज काशी की धरा पर मंचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण है. इस आयोजन ने मां गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ की पावन धरा को महाकाल की धरा उज्जैन के साथ एक सांस्कृतिक एकता के बंधन से जोड़ने का काम किया है. इसके लिए मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, सांस्कृतिक विभाग के पदाधिकारियों और इस आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों का उत्तर प्रदेश में काशी की धरा पर स्वागत करता हूं.

काशी और उज्जैन का ऐतिहासिक संबंध

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मुख्यमंत्री ने काशी और उज्जैन नगरी के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस तरह से भारतीय परंपरा में भाई-भाई के संबंध के आदर्श रूप में भगवान राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ियां प्रसिद्ध हैं, वैसे ही नाथ संप्रदाय में दीक्षित संत भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी भी प्रसिद्ध है. सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली जहां उज्जैन थी, तो वहीं संत भर्तृहरि की साधनास्थली काशी के गंगा तट पार स्थित है. काशी के ठीक उस पार चुनार का किला उनके ही तप और आशीर्वाद से संभव हुआ था. यूपी सरकार चुनार के किले के सौंदर्यीकरण और संरक्षण का कार्य कर रही है.

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भारतीय कालगणना और परंपरा का संगम

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सीएम योगी ने कहा कि यह आयोजन भारतीय कालगणना की नगरी उज्जैन और पंचांग निर्माण की नगरी काशी का सम्मिलन है, जो भारत की कालगणना की परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा। वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से देश के पारंपरिक ज्ञान और कौशल का विकास किया जा रहा है, उसे आज पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है. भारतीय परंपरा का योग हो या आयुष, आज पूरा विश्व उसे स्वीकार कर रहा है. कुंभ की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है, लेकिन वर्ष 2019 में जब प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में इसका भव्य आयोजन किया गया तो पूरा विश्व इसमें सहभागी बना. पूरी दुनिया से 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज की धरा पर महाकुंभ में आए.

काशी और अयोध्या में बढ़ा श्रद्धालुओं का आगमन

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मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अयोध्या धाम में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद से देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु हर वर्ष काशी और अयोध्या आ रहे हैं. अयोध्या नगरी के पुनरुत्थान में भी महाराज विक्रमादित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2000 वर्ष पहले अयोध्या नगरी को खोजने का कार्य सम्राट विक्रमादित्य ने ही किया था. प्रभु श्रीराम के पुत्र लव के बाद सबसे पहले श्रीराम मंदिर भी सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाया था. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सम्राट विक्रमादित्य के प्रयासों को ही आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है.

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का माध्यम

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मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि नाटक, कला और सिनेमा समाज को दिशा देने का माध्यम होते हैं और कलाकारों द्वारा निभाए गए पात्र युवाओं के लिए प्रेरणा बनते हैं. मैं सिनेमा निर्माताओं को भी सुझाव देता हूं कि सकारात्मक चरित्रों को ही नायक के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए. एक कालखंड था, जब सिनेमा नकारात्मक चरित्रों को नायक के रूप में स्थापित करता था. इसका परिणाम यह हुआ कि देश की एक पीढ़ी इससे प्रभावित होकर बर्बाद हो गई.

सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने का प्रयास

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मुख्यमंत्री ने इस नाट्य रूपांतरण को भारतीय संस्कृति, पराक्रम, दानवीरता, न्याय व्यवस्था और सुशासन जैसे मूल्यों को पुनर्जीवित करने का माध्यम बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि यह प्रयास आज की नई पीढ़ी को अपने प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य और आदर्शों से जोड़ने के वृहद अभियान का एक हिस्सा है. इस सराहनीय प्रयास के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, संस्कृत विभाग और सभी कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

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