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कैशलेस इलाज से माताओं और नवजातों को राहत, पंजाब की ‘'मुख्यमंत्री सेहत योजना’ का दिखा बड़ा असर

'मुख्यमंत्री सेहत योजना' राज्यभर के परिवारों के लिए एक बड़े स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है. अब तक इस योजना के तहत लगभग 44.8 लाख रजिस्ट्रेशन की जा चुकी हैं.

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26 May 2026
( Updated: 26 May 2026
12:34 PM )
कैशलेस इलाज से माताओं और नवजातों को राहत, पंजाब की ‘'मुख्यमंत्री सेहत योजना’ का दिखा बड़ा असर
Image Credits:X/@BhagwantMann
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पंजाब में भगवंत मान सरकार की 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के माध्यम से हाई-रिस्क गर्भावस्था एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से मज़बूती मिल रही है. यह योजना जटिल प्रसव और गम्भीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज को परिवारों के लिए बिना किसी आर्थिक बोझ के सुलभ बना रही है.

'मुख्यमंत्री सेहत योजना' के माध्यम से हाई-रिस्क गर्भावस्था को मजबूत करना आवश्यकत

भारत के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5) पर आधारित एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग हर दो में से एक गर्भावस्था हाई-रिस्क श्रेणी में आती है.परिस्थितियाँ जैसे कि शिक्षा का अभाव,गरीबी, दो गर्भधारण के बीच कम अंतराल, पूर्व प्रसव जटिलताएँ तथा पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन माँ और शिशु दोनों के लिए रिस्क पैदा करते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की महिलाएँ सबसे अधिक रिस्क का सामना करती हैं, जिससे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को और मज़बूत करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है.

सेहत-कार्ड उन महिलाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण सहारा बनकर उभरा है, जिन्हें प्रसव के दौरान लंबे समय तक प्रसव पीड़ा, स्वास्थ्य समस्याएँ, भ्रूण की अस्वस्थ स्थिति या पूर्व सिजेरियन डिलीवरी की समस्याओं के कारण ऑपरेशन संबंधी चिकित्सा की आवश्यकता पड़ती है. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी  से प्राप्त आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार  25 मई, 2026 तक योजना के तहत मातृत्व एवं नवजात देखभाल के कुल 7300 मामलों में इलाज प्रदान किया गया, जिन पर लगभग ₹7.04 करोड़ ख़र्च हुए. इनमें 5,300 हाई-रिस्क सिजेरियन डिलीवरी के मामले शामिल रहे, जिन पर ₹6.37 करोड़ ख़र्च किए गए. यह आँकड़े पंजाब में हाई-रिस्क गर्भावस्था और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं में योजना की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं.

28 वर्षीय लाभार्थी दीपिका ने साझा किया अपना अनुभव

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पटियाला की 28 वर्षीय लाभार्थी दीपिका, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान एनीमिया सहित कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा, व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि उनका सिजेरियन ऑपरेशन सेहत-कार्ड के तहत पूरी तरह से कैशलेस हुआ. उनके पति मनोज ने कहा कि पूरा इलाज बिना किसी आर्थिक बोझ के सुचारु रूप से सम्पन्न हुआ, जो उनके लिए राहत की बात है. 

इसी तरह 31 वर्षीय दीक्षा सोनकर ने अपने तीसरे बच्चे के जन्म के दौरान 'पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़' अस्पताल में समय पर मातृत्व एवं नवजात देखभाल प्राप्त की, जहाँ पूरा इलाज योजना के तहत कैशलेस हुआ. उनके पति विकास सोनकर ने कहा, “हमारी पहले से दो बेटियाँ हैं और हम चिंतित थे कि तीसरी डिलीवरी में कोई जटिलता न हो.”

विकास बताते हैं कि परिवार में किसी के अस्पताल जाने की नौबत आते ही आर्थिक तनाव बढ़ जाता है. उन्होंने कहा, “जब भी मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो हम जैसे परिवारों के लिए यह एक चिंता का विषय होता है." दैनिक मज़दूरी करने वाले विकास आगे बताते हैं कि ऐसे समय में हमें ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ते हैं;जो इस कठोर वास्तविकता को दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं का ख़र्च उठाने के लिए निम्न-आय वर्ग के श्रमिकों को किस प्रकार संघर्ष करना पड़ता है. वे कहते हैं,"लेकिन, सेहत कार्ड के कारण इस बार पूरा इलाज बिना किसी चिंता के हो गया.”


समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए विशेष चिकित्सा सुविधा होगी उपलब्ध

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मातृत्व सेवाओं के साथ-साथ यह योजना गंभीर रूप से बीमार और समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए विशेष चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध करवा रही है.

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी,पंजाब के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, योजना के तहत विभिन्न पैकेजों में कुल 2,094 नवजात शिशुओं का उपचार किया गया. बेसिक नियोनेटल केयर, जो उन शिशुओं को सहायता प्रदान करती है जिनका उपचार उनकी माताओं के साथ-साथ किया जाता है, के अंतर्गत 881 नवजातों का इलाज हुआ, जिन पर ₹5.82 लाख ख़र्च हुए.

इसी प्रकार,अल्प अवधि के इंटेंसिव केयर यूनिट उपचार की आवश्यकता वाले 777 नवजातों को स्पेशल नियोनेटल केयर पैकेज के तहत लाभ मिला, जिस पर ₹28.27 लाख ख़र्च हुए. इंटेंसिव नियोनेटल केयर पैकेज के अंतर्गत 207 नवजातों को कन्टीन्यूअस पॉज़िटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) सपोर्ट, 24 घंटे से कम वेंटिलेशन तथा नवजात संक्रमण जैसी गंभीर स्थितियों के उपचार हेतु सहायता दी गई, जिस पर ₹15.65 लाख ख़र्च किए गए.

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 1,200 से 1,499 ग्राम वजन वाले अथवा लंबे समय तक वेंटिलेटर सहायता की आवश्यकता वाले 116 अत्यंत संवेदनशील नवजातों को एडवांस्ड नियोनेटल केयर प्रदान की गई, जिस पर ₹9.30 लाख ख़र्च हुए.

64 नवजातों को क्रिटिकल नियोनेटल केयर उपलब्ध करवाई गई

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इसके अतिरिक्त, समयपूर्व जन्म, बहु-अंग जटिलताओं या गंभीर चिकित्सीय अस्थिरता से जूझ रहे 64 नवजातों को क्रिटिकल नियोनेटल केयर उपलब्ध करवाई गई, जिस पर ₹7.88 लाख ख़र्च हुए. इसके अलावा,18 नवजातों को दीर्घकालिक क्रॉनिक नियोनेटल केयर सहायता भी प्रदान की गई. इसके अलावा, दीर्घकालिक नवजात देखभाल के तहत 17 शिशुओं को शामिल किया गया, जिन्हें ब्रोंकोपल्मोनरी डिस्प्लेसिया और नेक्रोटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस जैसी गम्भीर स्थितियों के लिए लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता पड़ी, जिसकी लागत ₹56 हज़ार रही.

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'मुख्यमंत्री सेहत योजना' राज्यभर के परिवारों के लिए एक बड़े स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है. अब तक इस योजना के तहत लगभग 44.8 लाख रजिस्ट्रेशन की जा चुकी हैं.

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