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'आपराधिक प्रवृति, गलत चाल-चरित्र वाला CM बिहार को स्वीकार नहीं...', बांकीपुर जीत के बाद सम्राट चौधरी पर बरसे प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने पटना के बांकीपुर में बीजेपी को तगड़ी पटखनी दे दी है और 19000 से ज्यादा वोटों से बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा को हरा दिया है. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दो टूक कहा कि बिहार की तरक्की के लिए किसी साफ-सुथरी छवि वाले को सीएम बनाना ही होगा.

Image Source: IANS
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बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के घर और बीजेपी के 31 साल से गढ़ में पटखनी देने के बाद  जन सुराज के संस्थापक और पार्टी उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बिहार के सीएम सम्राट चौधरी पर बड़ा निशाना साधा है. उन्होंने दो टूक कहा कि 'अपराधी को सीएम बनाएंगे तो राज्य की तरक्की नहीं हो सकती'. उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि बांकीपुर की जनता की जीत करार दिया. उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल विधायक चुनने का नहीं था, बल्कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देने का था कि बिहार को एक ईमानदार, सक्षम और चरित्रवान मुख्यमंत्री की आवश्यकता है. 

मतगणना के दौरान मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने भाजपा नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता ने उन्हें बहुमत दिया है, इसलिए बिहार का नेतृत्व किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपा जाए जो राज्य में शिक्षा, रोजगार और सुशासन सुनिश्चित कर सके. उन्होंने कहा कि बिहार के बच्चों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़े, यही उनकी राजनीति का मूल उद्देश्य है.

बिहार को गलत चाल-चरित्र वाला सीएम स्वीकार नहीं: PK

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प्रशांत किशोर ने अपनी जीत को सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर रेफरेंडम करार दिया और कहा कि बिहार की जनता को एक साफ-सुथरी छवि वाला सीएम चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि 31 साल के किले को ध्वस्त होने में 3 महीने भी नहीं लगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने बता दिया कि उन्हें आपराधिक प्रवृति और एक गलत चाल-चरित्र वाला सीएम स्वीकार नहीं है.

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उन्होंने कहा, "यह चुनाव विधायक बनाने का चुनाव नहीं था. जनता ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दिया है कि बिहार में किसी अच्छे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाए. जनता ने आपको 202 विधायक जिताए हैं, इसलिए किसी गलत चाल-चरित्र वाले व्यक्ति को राज्य का नेतृत्व मत दीजिए."

प्रशांत किशोर ने कहा कि जिन्होंने उन्हें वोट दिया है, वे उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जबकि जिन्होंने समर्थन नहीं किया, उनका विश्वास जीतने के लिए वे आगे और अधिक मेहनत करेंगे. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत होती रहती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात बिहार का भविष्य और उसके युवाओं का भविष्य है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की राजनीति लंबे समय से जाति, धर्म और मुफ्त अनाज जैसे मुद्दों तक सीमित रही है, जबकि जनता अब शिक्षा, रोजगार और विकास चाहती है.

उन्होंने कहा कि यदि गुजरात के सांसद प्रधानमंत्री बनाने में योगदान दे सकते हैं तो बिहार के 13 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं का भी समान सम्मान होना चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार के लिए विशेष विकास कार्यक्रम तैयार करने और पलायन रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की.

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के एक करोड़ से अधिक युवा आज भी रोजगार की तलाश में गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य राज्यों में काम करने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी युवा को 10 से 15 हजार रुपए की नौकरी के लिए अपना घर-परिवार छोड़ने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए. उनके अनुसार, बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उद्योग और रोजगार के अवसर विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं है, बल्कि बेहतर नेतृत्व की मांग को लेकर है.

उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए मुख्यमंत्री भी उसी गठबंधन का बनेगा, लेकिन नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में होना चाहिए जो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करे और राज्य के विकास को प्राथमिकता दे. उन्होंने दावा किया कि भाजपा का तीन दशक पुराना गढ़ महज 30 दिनों में इसलिए कमजोर हुआ क्योंकि मतदाताओं ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर विकास के मुद्दे पर मतदान किया.

उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करेगी तो भविष्य में भी ऐसे ही चुनाव परिणाम सामने आएंगे. जीत के बाद अपनी प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर की जनता ने जो विश्वास और आशीर्वाद दिया है, उस पर खरा उतरने का प्रयास किया जाएगा.

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उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन महीनों में क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगेंगे. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातों-रात नहीं बदल जाएगा, लेकिन सुधार की दिशा में ठोस पहल जरूर होगी. उन्होंने दोहराया कि यह चुनाव नाली-गली के मुद्दों से आगे बढ़कर बिहार के नेतृत्व और राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला चुनाव था.

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