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दो दिन दो इस्तीफे...शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के अलावा मोदी सरकार के एक और मंत्री ने छोड़ा पद, क्या रही वजह?

मोदी सरकार के दो मंत्रियों के इस्तीफे महज दो दिन के अंदर हो गए हैं. इसी बीच केंद्रीय राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू का भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. इस लिहाज से देखें तो पिछले एक महीने के अंदर तीन मंत्रियों का इस्तीफा हुआ है.

Image Source: IANS
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देश के शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ मोदी सरकार के एक और मंत्री का इस्तीफा हो गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल में गाजे-बाजे के साथ शामिल किए गए रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. आपको बता दें कि बिट्टू के अलावा जॉर्ज कुरियन का भी मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा हुआ था. ये महज एक महीने के अंदर तीसरा और एक दिन के अंदर दूसरा बड़ा इस्तीफा है.

धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा

बिट्टू के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ. जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी. प्रधान ने लिखा, मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं. धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे का ऐलान करते हुए सोशल मीडिया X पर एक चिट्ठी पोस्ट की. दो पेज और 575 शब्दों में लिखी इस चिट्ठी में प्रधान ने कहा, मैंने अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा. इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को भ्रमित करने की बात भी लिखी. 

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आपको बता दें कि रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. बिट्टू पंजाब से आते हैं और राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उनके इस्तीफे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.

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रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा स्वीकार

इस्तीफा देने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया. बिट्टू ने अपने संदेश में लिखा कि उन्हें भारत सरकार में राज्य मंत्री के रूप में देश की सेवा करने का अवसर देने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का हृदय से धन्यवाद.

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उन्होंने कहा कि भारत के लोगों, विशेष रूप से अपने प्रिय पंजाब की सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही है. उन्होंने यह भी कहा कि वे सेवा, राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के विजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेंगे.

रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने संदेश में लिखा कि उनकी सार्वजनिक सेवा की यात्रा नए संकल्प और समर्पण के साथ आगे भी जारी रहेगी. बिट्टू का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पंजाब में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और सभी प्रमुख दल आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटे हुए हैं. ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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बिट्टू अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में चुनाव लड़ सकते हैं. बिट्टू पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं. वह साल 2024 में भाजपा में शामिल हुए थे और लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह असफल रहे. बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया, इसके बाद उनका यह इस्तीफा आया है. उन्होंने अगस्त 2024 से जून 2026 तक राजस्थान से राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया.

ये भी पढ़ें: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, कहा- मैंने जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा

जॉर्ज कुरियन ने भी दिया था इस्तीफा

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इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था. राष्ट्रपति भवन ने कुरियन के इस्तीफे की जानकारी देते हुए बताया था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया है.

हालांकि, प्रेस रिलीज में इस्तीफे की वजह नहीं बताई गई. आपको बता दें कि 65 साल के कुरियन मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के पद पर थे. वे अगस्त 2024 से मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे.

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उनका राज्यसभा सांसद के तौर पर 21 जून को कार्यकाल खत्म हुआ था. ऐसे में भाजपा ने उन्हें फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया था. मालूम हो कि कुरियन केरल में भाजपा के सीनियर नेताओं में एक हैं. माना जा रहा है कि हाल ही में केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने की वजह से उन्हें फिर से मौका नहीं मिला.

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