ईरान संकट के बीच PM मोदी की बड़ी कूटनीतिक पहल, राष्ट्रपति पेजेश्कियन से की बातचीत; जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की. पीएम मोदी ने कहा कि क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई गई है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ ऊर्जा व माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की प्राथमिकता है.
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पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Masoud Pezeshkian) से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की. यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है.
सोशल मीडिया पर दी जानकारी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान क्षेत्र में बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की जानमाल की हानि और नागरिक ढांचे को पहुंचे नुकसान पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. इसके साथ ही ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है.
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure.
The safety and security of…— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026Advertisement
शांति और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान स्पष्ट किया कि भारत हमेशा शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया. भारत का मानना है कि किसी भी बड़े संघर्ष का समाधान अंततः संवाद और समझदारी से ही निकल सकता है. इसलिए भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि युद्ध की बजाय शांति का रास्ता अपनाया जाए.
मिडिल ईस्ट में बढ़ता संघर्ष
दरअसल, पिछले कुछ समय से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है. इस संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है. तेल आपूर्ति और समुद्री मार्गों को लेकर दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ गई है.
मोजतबा खामेनेई का पहला बयान
इसी बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का भी पहला बयान सामने आया है. अपने पिता की जगह नेतृत्व संभालने के बाद उन्होंने कहा कि ईरान अपने विरोधियों के खिलाफ दबाव बनाए रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाता रहेगा. उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसे विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है.
युद्ध के बीच बढ़ती वैश्विक चिंता
खामेनेई ने हाल ही में हुए हमलों में मारे गए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान अपने नागरिकों के खून का बदला जरूर लेगा. उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि मौजूदा संघर्ष जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है. दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका अपना अभियान पूरा करके ही रहेगा.
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बहरहाल, इन तमाम घटनाओं के बीच दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया पर टिकी हुई हैं. भारत समेत कई देश लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि स्थिति और ज्यादा न बिगड़े और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके. आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास इस संकट को किस दिशा में ले जाएंगे, यह पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम होने वाला है.