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अभिजीत दिपके के बाद अब नेताजी के परपोते की एंट्री, Gen-Z के लिए बनाने जा रहे ‘आजाद हिंद पार्टी’
Chandr Kumar Bose: छात्र आंदोलन की अगुवाई करने वाले अभिजीत दिपके ने हाल ही में साफ कहा था कि वह फिलहाल अपने संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राजनीतिक पार्टी में बदलने की तैयारी में नहीं हैं. ऐसे समय में चंद्र कुमार बोस ने आगे बढ़कर Gen-Z के लिए एक नया राजनीतिक मंच खड़ा करने की घोषणा की है.
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Chandr Kumar Bose: जंतर-मंतर पर हाल में हुए Gen-Z के प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि देश का युवा अब सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने तक सीमित नहीं रहना चाहता. युवा अपने मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर रहा है और व्यवस्था से सीधे सवाल पूछ रहा है. यही वजह है कि आज देश की लगभग हर बड़ी राजनीतिक पार्टी की नजर युवाओं पर है.. सभी दल यह समझ चुके हैं कि आने वाले समय की राजनीति मे युवाओ की भूमिका सबसे अहम होने वाली है. इसी माहौल के बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने Gen-Z युवाओं के लिए एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है...
जेन-Z की आवाज को राजनीतिक मंच देने की कोशिश
छात्र आंदोलन की अगुवाई करने वाले अभिजीत दिपके ने हाल ही में साफ कहा था कि वह फिलहाल अपने संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राजनीतिक पार्टी में बदलने की तैयारी में नहीं हैं. ऐसे समय में चंद्र कुमार बोस ने आगे बढ़कर Gen-Z के लिए एक नया राजनीतिक मंच खड़ा करने की घोषणा की है. उनका कहना है कि प्रस्तावित ‘आजाद हिंद पार्टी’ की सोच नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा और आज के युवा की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी.
चंद्र कुमार बोस के मुताबिक देश का युवा आज कई तरह की परेशानियों से गुजर रहा है. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को लेकर युवाओं में नाराजगी है. उनका मानना है कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था युवाओं की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पा रही है और इसी वजह से एक ऐसे नए मंच की जरूरत महसूस हो रही है, जहां युवा अपनी बात मजबूती से रख सकें.
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नेताजी की विचारधारा को आधार बनाने का दावा
चंद्र कुमार बोस ने एक इंटरव्यू में कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद देश का युवा एक बार फिर अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है. उनके मुताबिक जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में युवाओं का जोश और व्यवस्था को बदलने की इच्छा साफ नजर आई. उनका कहना है कि ऐसे समय में युवाओं को सही दिशा और नेतृत्व की जरूरत है. बोस ने यह भी कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में भ्रष्टाचार अब केवल एक समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यवस्था का हिस्सा बनता जा रहा है. उनके अनुसार अलग-अलग राजनीतिक दल किसी न किसी रूप में इस व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं. इसलिए युवा अब पारंपरिक राजनीति से अलग रास्ता तलाश रहा है. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए चंद्र कुमार बोस ने कहा कि नेताजी की आजाद हिंद फौज और आजाद हिंद के विचारों को आधार बनाकर युवाओं को एक साथ लाना उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य होगा. उन्होंने दावा किया कि ‘आजाद हिंद पार्टी’ धर्म, जाति या किसी अन्य पहचान के आधार पर राजनीति करने के बजाय समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील सोच रखने वाले युवाओं को एक राष्ट्रीय मंच देने की कोशिश करेगी.
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भाजपा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
चंद्र कुमार बोस का राजनीति में सफर भी काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. वह साल 2016 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. उस समय उनका मुख्य मुद्दा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा और विरासत को राजनीति के केंद्र में लाना था.
बोस का कहना है कि भाजपा की ओर से उनसे यह वादा किया गया था कि नेताजी की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए ‘आजाद हिंद मोर्चा’ बनाया जाएगा. लेकिन कई साल इंतजार करने के बाद भी जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने भाजपा से दूरी बना ली. बाद में उन्होंने भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले को ही अपनी भूल बताया.
टीएमसी से भी नहीं बनी बात
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भाजपा छोड़ने के बाद चंद्र कुमार बोस ने अप्रैल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा. हालांकि उनका यह राजनीतिक सफर भी ज्यादा लंबा नहीं चला. कुछ ही समय बाद उन्होंने टीएमसी से भी इस्तीफा दे दिया.
बोस ने पार्टी छोड़ने के पीछे आंतरिक राजनीति और व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया. उनका कहना था कि जिस तरह की राजनीति से वह बदलाव की उम्मीद कर रहे थे, उससे वह संतुष्ट नहीं हो पाए. अब भाजपा और टीएमसी दोनों से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी खुद की पार्टी बनाने का फैसला किया है.
क्या युवाओं को जोड़ पाएगी नई पार्टी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘आजाद हिंद पार्टी’ वास्तव में जेन-Z युवाओं को अपने साथ जोड़ पाएगी? आज का युवा पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक है और वह सिर्फ बड़े-बड़े राजनीतिक नारों से प्रभावित होने के बजाय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई, भ्रष्टाचार और बेहतर भविष्य जैसे मुद्दों पर जवाब चाहता है.
चंद्र कुमार बोस ने युवाओं के बीच इसी नाराजगी और बदलाव की इच्छा को अपनी राजनीति का आधार बनाने की कोशिश की है. हालांकि किसी नई पार्टी के लिए सिर्फ युवाओं की नाराजगी को राजनीतिक समर्थन में बदलना आसान नहीं होगा. इसके लिए मजबूत संगठन, जमीन पर कार्यकर्ता, स्पष्ट नीतियां और लंबे समय तक लगातार काम करने की जरूरत होगी.
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फिलहाल ‘आजाद हिंद पार्टी’ के ऐलान ने यह जरूर दिखा दिया है कि देश की राजनीति में युवा अब केवल वोट बैंक नहीं रहना चाहता. वह राजनीति का हिस्सा बनना चाहता है और अपनी शर्तों पर बदलाव की मांग कर रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि चंद्र कुमार बोस का यह नया राजनीतिक प्रयोग जेन-Z के बीच कितनी जगह बना पाता है और क्या नेताजी की विरासत के सहारे वह युवाओं को एक नए राजनीतिक मंच पर एकजुट कर पाते हैं.