PM मोदी की घेराबंदी का प्लान, महिला सांसदों का घेरा...4 फरवरी को संसद में क्या थी कांग्रेस की प्लानिंग? सामने आया VIDEO

4 फरवरी को संसद में हुआ बवाल, जब कांग्रेसी सांसदों को पीएम की कुर्सी के घेराव, कुछ अनहोनी की आशंका या शारीरिक हमले के कारण पीएम मोदी को अपना भाषण टालना पड़ा था. अब वीडियो भी सामने आ गया है कि उस दौरान क्या हुआ था.

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10 Feb 2026
( Updated: 10 Feb 2026
01:48 PM )
PM मोदी की घेराबंदी का प्लान, महिला सांसदों का घेरा...4 फरवरी को संसद में क्या थी कांग्रेस की प्लानिंग? सामने आया VIDEO
LokSabaha (Screengrab)

संसद के बजट सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है. कांग्रेस जिस तरह पीएम मोदी को घेरने के लिए सीधे वेल में आ रही है और उनके चेयर को क्रॉस तक कर जा रही है, उसने बवाल मचा दिया है. वहीं अब बीजेपी ने भी जवाब देने का मन बना लिया है. इसी कड़ी में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को लोकसभा की 4 फरवरी की कार्यवाही का एक वीडियो साझा किया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देना था, हालांकि, कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों ने सदन के वेल में हंगामा किया.

किरेन रिजिजू ने वीडियो जारी किया

यह घटना कांग्रेस पार्टी की महिला सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर उन आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताने के एक दिन बाद सामने आई है, जिनमें कहा गया है कि उन्होंने 4 फरवरी को सदन के अंदर प्रधानमंत्री मोदी को "धमकाया या उनके बोलने में बाधा डालने का प्रयास किया". कांग्रेस ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सदन में "बोलने से बहुत डरे हुए थे".

वीडियो में दिखा, पीएम मोदी को क्यों टालना पड़ा था अपना भाषण!

वीडियो में कांग्रेस की महिला सांसदों को बैनर और तख्तियां लिए प्रधानमंत्री की सीट के चारों ओर घेरा बनाते हुए दिखाया गया. इसके बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्धारित भाषण रद्द कर दिया गया.

टल गई भयावह स्थिति!

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर 4 फरवरी का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, "कांग्रेस पार्टी अपने सांसदों के इस सबसे अपमानजनक व्यवहार पर गर्व करती है. यह स्थिति बहुत ही भयावह हो सकती थी." केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया गया एक एआई जनरेटेड वीडियो भी दोबारा पोस्ट किया, जिसमें पीएम मोदी लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश देते हुए दिखाई दे रहे हैं.

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्पीकर बिरला ने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है जिससे पता चलता है कि विपक्षी सांसद "कुछ अप्रत्याशित" कर सकते हैं, और उन्होंने कहा कि उन्होंने सदन को स्थगित करने का फैसला किया ताकि लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले सदन में अप्रिय दृश्यों को रोका जा सके. घटनाक्रम के अनुसार, 4 फरवरी को शाम 5 बजे के करीब, सदस्य प्रधानमंत्री के लोकसभा में प्रवेश करने और अपना संबोधन शुरू करने की प्रतीक्षा कर रहे थे.

सदन के अंदर विरोध प्रदर्शन जारी रहा, जिसके दौरान विपक्ष की ओर से लगभग आठ से नौ महिला सांसद प्रधानमंत्री की निर्धारित सीट के आसपास एकजुट हो गईं. नामी सांसदों में जेनीबेन ठाकोर, वर्षा गायकवाड़, ज्योतिमती, आर. सुधा, के. काव्या और शोभा बच्छाव शामिल थीं. यह सब रिजिजू द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है.

लोकसभा स्पीकर ने क्यों पीएम मोदी से सदन में ना आने का किया था अनुरोध!

आपको बता दें कि इस संबंध में लोकसभा स्पीकर ने अगले दिन टिप्पणी की और बताया कि क्यों उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में ना आने की अपील की थी. सदन की कार्यवाही स्थगित होने से ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष ने गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को  कहा कि सदन में 4 फरवरी के दिन जो घटनाक्रम हुआ, वह लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक काले धब्बे जैसा है. 

अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें विश्वसनीय सूचनाएं मिली थीं, जिनके अनुसार कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री के नज़दीक पहुंचकर कोई अप्रत्याशित और गंभीर घटना को अंजाम दे सकते थे. उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई घटना घटती, तो वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय होती. इसी आशंका के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया. 

मेरे चैंबर में भी विपक्षी सांसदों ने किया हंगामा: ओम बिरला 

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लोकसभा स्पीकर ने यह भी बताया कि कुछ सांसद सदन के चैंबर में आकर हंगामा करने लगे थे और पहले से यह संकेत मिल रहे थे कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान व्यवधान पैदा करने की योजना बना रहे हैं. अध्यक्ष ने संसदीय मर्यादाओं पर जोर देते हुए कहा कि संविधान ने संसद के सभापति को एक सम्मानजनक और गरिमामय भूमिका सौंपी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेदों को इस तरह सदन की कार्यवाही में लाना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है.

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