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तेलंगाना में 130 माओवादी कैडरों ने किया सरेंडर, 31 AK-47 समेत 124 हथियार जमा

तेलंगाना पुलिस के डीजीपी ने विशेष खुफिया शाखा की मेहनत की सराहना की. इस कदम से तेलंगाना में पीएलजीए की लड़ाकू क्षमता कमजोर हुई है और क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही नक्सली हिंसा पर गंभीर असर पड़ा है.

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07 Mar 2026
( Updated: 07 Mar 2026
07:28 PM )
तेलंगाना में 130 माओवादी कैडरों ने किया सरेंडर, 31 AK-47 समेत 124 हथियार जमा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अपील के बाद 130 सीपीआई (माओवादी) कैडर मुख्यधारा में शामिल हुए. इस दौरान कैडरों ने 124 हथियार और 5205 जिंदा कारतूस जमा किए. हाल के वर्षों में पीएलजीए के हथियारों की गुणवत्ता और संख्या के हिसाब से सबसे बड़ी खेप मानी जा रही है.

130 माओवादी कैडरों ने किया सरेंडर

माओवादी नक्सलियों ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मौजूदगी में पूरी पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी फोर्स के साथ मुख्यधारा में वापसी की. इस दौरान कुल 134 हथियार और कई जिंदा कारतूस समर्पित किए गए, जिनमें 31 एके-47 राइफलें शामिल थीं.

एओबी के प्रमुख नेता चलसानी नवाथा ने भी हथियार सरेंडर किए. इस कदम से माओवादी संगठन की लड़ाकू क्षमता कमजोर हुई है और क्षेत्र में लंबित नक्सली हिंसा पर बड़ा असर पड़ा है. सरेंडर किए गए हथियारों और कैडरों के लिए राज्य सरकार द्वारा पुनर्वास और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.

31 AK-47 समेत 124 हथियार जमा

माओवादियों ने इस दौरान 124 हथियार, 222 मैगजीन और 5205 कारतूस जमा किए हैं. सीपीआई (माओवादी) कैडरों का यह समर्पण मुख्यमंत्री की 21 अक्टूबर 2025 की अपील के बाद हुआ. उन्होंने कैडरों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और राज्य और समाज के विकास में योगदान देने का आग्रह किया था.

कैडरों ने कहा कि यह निर्णय स्वयं की भलाई, परिवार और व्यक्तिगत सम्मान को प्राथमिकता देने, और शांतिपूर्ण व कानून का पालन करने वाला जीवन अपनाने के लिए लिया गया. तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत कैडरों को वित्तीय मदद दी जाएगी.

तेलंगाना में पीएलजीए की लड़ाकू क्षमता कमजोर हुई

तेलंगाना पुलिस के डीजीपी ने विशेष खुफिया शाखा की मेहनत की सराहना की. इस कदम से तेलंगाना में पीएलजीए की लड़ाकू क्षमता कमजोर हुई है और क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही नक्सली हिंसा पर गंभीर असर पड़ा है.

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सीपीआई माओवादी की सबसे महत्वपूर्ण पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) अब पूरी तरह समाप्त हो गई है. यह कदम माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है और राज्य में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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