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अदरक जैसा दिखने वाला ये पौधा, सर्दी-जुकाम का जड़ से कर देगा सफाया, बस जान लें कैसे करें इसका सेवन
कुलंजन की सबसे खास बात इसकी गर्म तासीर और तीखी प्रकृति मानी जाती है. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम और श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है. इसकी सुगंधित प्रकृति के कारण इसे सांस से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं में उपयोगी माना जाता है.
27 Oct 2026
(
Updated:
27 Oct 2026
12:11 PM
)
Image Credits: @DEFCCOfficial/X
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आयुर्वेद में कई ऐसे औषधीय पौधे बताए गए हैं, जिनका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में होता आया है. कुलंजन भी इन्हीं में से एक है. यह पौधा देखने में काफी हद तक अदरक जैसा दिखाई देता है और इसकी तेज सुगंध तथा तीखा स्वाद इसे दूसरी जड़ी-बूटियों से अलग पहचान देते हैं. आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में कुलंजन का इस्तेमाल कई तरह की सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है.
कुलंजन को अल्पिनिया कैल्केराटा भी कहा जाता है
बिहार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि कुलंजन का वैज्ञानिक नाम अल्पिनिया कैल्केराटा है. यह मुख्य रूप से उष्ण और नम जलवायु में अच्छी तरह उगता है. इसके पौधे में लंबी, हरी पत्तियां होती हैं, जबकि जमीन के नीचे इसका सुगंधित तना विकसित होता है. इसमें छोटे और सफेद रंग के फूल भी दिखाई देते हैं. हालांकि पौधे का ऊपरी हिस्सा भी अपनी पहचान रखता है, लेकिन औषधीय उपयोग के लिए मुख्य रूप से इसकी जड़ और जमीन के अंदर मौजूद तने को महत्वपूर्ण माना जाता है.
सर्दी-जुकाम में लाभयादक है कुंलजन
कुलंजन की सबसे खास बात इसकी गर्म तासीर और तीखी प्रकृति मानी जाती है. पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल सर्दी-जुकाम और श्वसन तंत्र से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है. इसकी सुगंधित प्रकृति के कारण इसे सांस से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं में उपयोगी माना जाता है.
जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं में मददगार
पारंपरिक चिकित्सा में कुलंजन का संबंध जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं से भी बताया जाता है. इसके अलावा पाचन से जुड़ी परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसकी गर्म प्रकृति पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.
कैसे करें इसका सेवन
1 से 2 ग्राम कुलंजन का चूर्ण लेकर उसे एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार चाटें. इसके अलावा कुलंजन के टुकड़े या चूर्ण को अदरक और तुलसी के कुछ पत्तों के साथ पानी में अच्छी तरह उबाल लें. इसे छानकर हल्का गर्म पीने से गले की खराश और कफ में आराम मिलता है.
इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरुर लें
कुलंजन के भले ही कई पारंपरिक लाभ बताए जाते हैं, लेकिन किसी भी बीमारी में दवा के रूप में इसका इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत जरूरी है. बिना सही जानकारी के इसका उपयोग करना खतरनाक हो सकता है.
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