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‘छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी याचिका दाखिल ही नहीं हुई’, CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्ट्स को बताया ‘भ्रामक’
20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर एक्शन की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया था. अब CJI सूर्यकांत ने दावे को खारिज कर दिया.
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NEET पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका खारिज कर दी गई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत वाली बेंच ने मामले पर तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया था. हालांकिमीडिया में चल रहे दावों पर CJI ने नाराजगी जताते हुए खंडन किया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिका से जुड़ी उस रिपोर्टिंग को भ्रामक और लापरवाह करार दिया. जिसमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने CJP के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस ज्यादती के मामले को सुनने से इंकार कर दिया है. CJI ने साफ किया है कि
‘तकनीकी और कानूनी रूप से मामले को खारिज करने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि अदालत में कोई केस फाइल ही नहीं हुआ था.’
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सुप्रीम कोर्ट में क्या अर्जी लगाई गई थी?
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दरअसल, 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की कार्रवाई को लेकर वकील नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. याचिका में वकील ने कहा था ‘मेरे पास CJP प्रोटेस्ट के दौरान दिल्ली पुलिस की बर्बरता से जुड़े वीडियो भी हैं. प्लीज देखिए कि क्या इस मामले को कल यानी गुरुवार को लिस्ट किया जा सके. वहां अब भी छात्र मौजूद हैं.’
इस याचिका में वकील नरेंद्र मिश्रा ने CJP विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ज्यादतियों का आरोप लगाया गया था, साथ ही साथ छात्रों-प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग भी की गई थी. लेकिन CJI सूर्यकांत ने सुनवाई से इंकार करते हुए मौखिक रूप से कहा था, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद न करें. हमें वीडियो देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास इसके लिए समय नहीं है’
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CJI सूर्यकांत ने मीडिया पर जताई नाराजगी
चीफ जस्टिस ने इस याचिका और कोर्ट के जवाब पर स्पष्टीकरण दिया है. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी और कानूनी रूप से मामले को खारिज करने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि अदालत में कोई केस फाइल ही नहीं हुआ था. उन्होंने कहा,
‘किसी मिश्रा नाम के व्यक्ति ने इसका जिक्र किया था. मीडिया ने गलत तरीके से रिपोर्ट किया कि मैंने मामले को सूचीबद्ध करने से मना कर दिया है. वह केवल एक प्रतिवेदन था और लोगों ने बिना सोचे-समझे रिपोर्टिंग शुरू कर दी. मैंने रजिस्ट्री से जांच की है, एक भी कागज (याचिका) दाखिल नहीं किया गया था.’
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तो क्या सुप्रीम कोर्ट में नहीं दाखिल की गई याचिका?
CJI सूर्यकांत के इस बयान से यह क्लियर हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में तय प्रक्रिया के तहत अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक जनहित याचिका (PIL) दायर नहीं किया गया.
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CJI का कहना है कि वकील नरेंद्र मिश्रा ने इस मसले को मौखिक रूप से रखा था. अगर इस पर कानूनी रूप से किसी तरह की याचिका दाखिल की जाती तो सुप्रीम कोर्ट सामान्य प्रक्रिया के तहत उस पर विचार करता, भविष्य में भी विचार कर सकता है.