Advertisement
‘लड़की ने आरोपी के नाम का टैटू गुदवाया था…’, दिल्ली हाई कोर्ट ने कम की रेप के दोषी की सजा, चर्चा में है टिप्पणी
इस फैसले में कोर्ट ने हाईलाइट किया कि उस समय आरोपी और पीड़िता एक दूसरे के साथ रह रहे थे और जो कुछ भी हुआ सहमति से हुआ, सजा का आधार लड़की का नाबालिग होना था.
Advertisement
साल 2009 के एक केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी की सजा खत्म कर दी. कोर्ट ने आरोपी को रिहा करते हुए उसे उतनी ही सजा दी जितनी वो काट चुका है. इस केस में कोर्ट ने लड़की की छाती पर बने आरोपी के टैटू को भी आधार बनाया.
इस फैसले में कोर्ट ने हाईलाइट किया कि उस समय आरोपी और पीड़िता एक दूसरे के साथ रह रहे थे और जो कुछ भी हुआ सहमति से हुआ. उस समय लड़की ने लड़के का नाम अपनी छाती पर भी गुदवाया था. कोर्ट ने कहा, वह अपनी मर्जी से लड़के के साथ गई थी.
क्या है पूरा मामला और कोर्ट का फैसला?
Advertisement
17 साल पहले साल 2009 में एक 14 साल की लड़की और 18 साल का लड़का अपने घर से गायब हो गया था. दोनों मनाली गए थे और दो दिन बाद वापस लौटे. इसके बाद नाबालिग लड़की की मौजूदगी में उसके घरवालों ने लड़के के खिलाफ रेप का केस दर्ज करवाया.
Advertisement
साल 2011 में ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-363 (अपहरण), धारा-366 (शादी के लिए मजबूर करने के मकसद से महिला का अपहरण) और धारा-376 (दुष्कर्म) के तहत दोषी ठहराया.
अब हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ी टिप्पणी करते हुए आरोपी की सजा को कम कर दिया है. जस्टिस वीके यादव की बेंच ने कहा, पूरे मामले पर विचार करने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा है कि लड़के को जेल भेजने का कोई फायदा नहीं दिखता है. कोर्ट ने कहा, पीड़िता और अपील करने वाला लड़का (जो सजा भुगत रहा है) दोनों ने शादी कर घर बसा लिया. दोनों माता-पिता भी बन चुके हैं. जस्टिस वीके यादव ने जोर दिया कि पिछला रिकॉर्ड साफ होने के बाद भी आरोपी को जेल भेजना न्याय का मजाक उड़ाने जैसा होगा. कोर्ट ने साफ कहा कि
Advertisement
‘सजा का असर सिर्फ आरोपी तक ही सीमित नहीं रहेगा. वे अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं. लंबे समय तक चले आपराधिक मुकदमे और उसके बाद की कार्यवाही ने न सिर्फ उन्हें समझदार बनाया होगा, बल्कि थका भी दिया होगा. ऐसे में उनके अब तक के साफ सुथरे रिकॉर्ड को देखते हुए ऐसा लगता है कि हिरासमत में बिताया गया समय न्याय के मकसद को पूरा करने के लिए काफी होगा.’
यह भी पढ़ें- ‘पति पर रेप का केस कैसे चलाया जा सकता है’, Marital Rape पर फिर तेज हुई बहस, SC ने उठाया सवाल
कोर्ट ने कहा कि लड़की ने अपनी मर्जी से लड़के के नाम का टैटू बनवाया, उसके साथ मर्जी से घूमने गई. लड़के को केवल इसलिए सजा मिली क्योंकि लड़की नाबालिग थी.
Advertisement
पूरा सच अब सामने आया
यह भी पढ़ें
इसका केस का एक पक्ष यानी लड़की भी अब कोई कार्रवाई नहीं चाहती, न ही आगे यह केस लड़ना चाहती है. ऐसे में हाई कोर्ट ने कहा ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं आत्म-मंथन हुआ, जहां सच पूरी तरह साफ-साफ सामने आ गया. कोर्ट ने इस केस में महिला की भी उतनी ही गलती मानी है और कहा, महिला खुद को दोष से मुक्त नहीं कर सकती. अपराध में उसकी भी बराबर की हिस्सेदारी है.