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‘नसीर बने रहिए, नासूर मत बनिए’, 'महाभारत' के युधिष्ठिर ने नसीरुद्दीन शाह को दी खुली चुनौती, बोले- हिम्मत है तो चुनाव लड़िए

गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन को चैलेंज देते हुए कहा है कि उन कामों की सराहना करते हुए ट्वीट भी कीजिए, अगर आप सरकार का इतना विरोध करना चाहते हैं, तो चुनाव क्यों नहीं लड़ते? चुनाव लड़िए. मैं आपको चुनौती देता हूं, आप जहां भी चुनाव लड़ेंगे, मैं आपके खिलाफ लड़ूंगा और आपको हरा दूंगा.

‘नसीर बने रहिए, नासूर मत बनिए’, 'महाभारत' के युधिष्ठिर ने नसीरुद्दीन शाह को दी खुली चुनौती, बोले- हिम्मत है तो चुनाव लड़िए
Image Credits: IANS
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नसीरुद्दीन शाह का जबसे 'दिमागी नक्सल' वाला बयान सामने आया है, तभी से वो चर्चा बने हुए हैं, देश के प्रधानमंत्री और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ बयान बाजी करने वाले नसीरुद्दीन इस वक्त हर किसी के निशाने पर आए हुए हैं.  वो अपने 'दिमागी नक्सल' वाले बयान की वजह से आलोचनाओं का शिकार हो रहे हैं. 

अब महाभारत में युधिष्ठिर का रोल करने वाले दिग्गज एक्टर गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन शाह के बयान पर पलटवार किया है, साथ ही उन्हें खुली चुनौती देते हुए चुनाव लड़ने की सलाह दे दी है. साथ ही उन्हें ये भी सलाह दे दी है कि नसीर बने रहिए, नासूर मत बनिए.

‘ये नक्सलवाद कहां से आ गया?’

गजेंद्र चौहान ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “मिस्टर नसीर, मैंने आपका एक वीडियो देखा. उसे देखकर मुझे दुख भी हुआ और अफसोस भी. आप इतने बड़े कलाकार रहे हैं. इस देश और देशवासियों ने आपको इतना नाम, शोहरत और मान-सम्मान दिया है, लेकिन आपकी भाषा का स्तर इतना गिरा हुआ है. आप कहते हैं कि आप ‘दिमागी नक्सल’ हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तो देश से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में कार्रवाई की है. फिर यह नक्सलवाद कहां से आ गया? अगर आप खुद को दिमागी नक्सल मानते हैं, तो आप एक भ्रम में जी रहे हैं और अपनी ही काल्पनिक दुनिया में खोए हुए हैं.”

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‘आपकी बातें हमेशा एकतरफा होती हैं’

एक्टर यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, “आप हमेशा देश की सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना करते रहते हैं. मैंने आपके कई वीडियो और बयान देखे हैं, जिनमें आपकी बातें हमेशा एकतरफा होती हैं. आप विपक्ष के बारे में कुछ नहीं कहते और न ही सरकार के अच्छे कामों की सराहना करते हैं. जब देश में कोई अच्छा काम होता है या सरकार कोई सकारात्मक पहल करती है, तो उसके बारे में भी बोलिए.”

‘नसीर बने रहिए, नासूर मत बनिए’

गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन को चैलेंज देते हुए कहा, “उन कामों की सराहना करते हुए ट्वीट भी कीजिए, अगर आप सरकार का इतना विरोध करना चाहते हैं, तो चुनाव क्यों नहीं लड़ते? चुनाव लड़िए. मैं आपको चुनौती देता हूं, आप जहां भी चुनाव लड़ेंगे, मैं आपके खिलाफ लड़ूंगा और आपको हरा दूंगा. इस देश ने आपको कलाकार के रूप में इतना सम्मान, इतना मान-सम्मान दिया है, और सब बर्बाद हो गया... मैं बीजेपी का कार्यकर्ता हूं. मैं पार्टी से भी अनुरोध करूंगा कि अगर नसीरुद्दीन शाह कहीं से चुनाव लड़ें, तो मुझे उनके खिलाफ मैदान में उतारा जाए. नसीर बने रहिए, नासूर मत बनिए.”

 नसीरुद्दीन शाह ने सरकार पर साधा था निशाना

यह मामला तब सामने आया जब नसीरुद्दीन शाह ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए एक वीडियो शेयर किया. एक्टर ने बीजेपी और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की थी. उनका कहना है कि सरकार और उनके समर्थकों की ओर से उन जैसे आलोचकों को 'एंटी-नेशनल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे नाम दिए जाते हैं.नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो में कैमरे के सामने बात करते हुए खुद को 'दिमागी नक्सली' बताया था.  

‘देश में कोई 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है, तो वह यह अवैध सरकार है’

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'दिमागी नक्सली' शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान किया था.उन्होंने कहा था, "'दिमागी नक्सली' के अलावा, पता नहीं 'चौकीदार' ने मुझ जैसे लोगों को और क्या-क्या नाम दिए हैं, जैसे 'राष्ट्र-विरोधी', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' वगैरह. अगर इस देश में कोई 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है, तो वह यह अवैध सरकार है.”

शाह ने यह भी कहा था कि जो लोग बीजेपी की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और उनसे बदला लेने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने वर्तमान सरकार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

आखिर जामिया में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में चल रहे विरोध प्रदर्शन का संबंध छात्र संघ चुनाव बहाल करने, चीफ प्रॉक्टर को हटाने और छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने जैसी मांगों से है.. प्रदर्शनकारी छात्रों और छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय में उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए.ऐसे में नसीरुद्दीन शाह का बयान इस मामले को लेकर चर्चा को और बढ़ा रहा है...जहां कुछ लोग उनके बेबाक अंदाज का समर्थन कर सकते हैं, वहीं उनके विचारों से असहमत लोग भी अपनी राय रख सकते हैं. फिलहाल, इस पूरे मामले में छात्रों की मांगें और विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख अहम बना हुआ है..

पहले भी भड़ास निकाल चुके हैं नसीरुद्दीन शाह 

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बताते चले की ये पहली बार नहीं है, जब नसीरुद्दीन शाह ने देश के प्रधानमंत्री और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी भड़ास निकाली हो, इससे पहले भी वो कई बार इस तरह की हरकत कर चुके हैं, कुछ दिनों पहले सीजेपी के प्रोटेस्ट में भी शामिल होकर उन्होंने सरकार की आलोचना की थी. हालांकि हर बार वो ट्रोलर्स के निशाने पर आ जाते हैं. खैर अब गजेंद्र चौहान ने उन्हें करारा जवाब दे दिया है. 

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