'मुझे उसके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला', नसीरुद्दीन शाह की 'दिमागी नक्सल' टिप्पणी पर किरेन रिजिजू ने साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो शेयर किया. रिजिजू ने पोस्ट में लिखा मुझे लगता था कि नसीरुद्दीन शाह एक ऑर्डिनरी एक्टर हैं. मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था. मुझे कभी पता ही नहीं था कि वह एक खतरनाक 'अर्बन दिमागी नक्सल' था.
Follow Us:
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्टर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी को लेकर उनकी आलोचना की है. रिजिजू ने कहा कि वो एक्टर को पसंद करते थे, लेकिन उनका असली चरित्र उन्हें देरी से पता चला है.
नसीरुद्दीन शाह पर भड़के किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो शेयर किया. रिजिजू ने पोस्ट में लिखा, "मुझे लगता था कि नसीरुद्दीन शाह एक ऑर्डिनरी एक्टर हैं. मैं उनका सम्मान करता था और उन्हें पसंद भी करता था. मुझे कभी पता ही नहीं था कि वह एक खतरनाक 'अर्बन दिमागी नक्सल' था."
इतना ही नहीं किरेन रिजिजू ने आगे लिखा, "मुझे उसके असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला. भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है."
‘मैं फक्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं’
रिजिजू की ओर से शेयर वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था, "मैं फक्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं. एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग, जो करना है करके देख लो. देख लेंगे जोर कितना बाजुए कातिल में है."
नसीरुद्दीन शाह ने सरकार पर साधा था निशाना
यह मामला तब सामने आया जब नसीरुद्दीन शाह ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए एक वीडियो शेयर किया. एक्टर ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की थी. उनका कहना है कि सरकार और उनके समर्थकों की ओर से उन जैसे आलोचकों को 'एंटी-नेशनल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे नाम दिए जाते हैं.नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो में कैमरे के सामने बात करते हुए खुद को 'दिमागी नक्सली' बताया.
‘देश में कोई 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है, तो वह यह अवैध सरकार है’
'दिमागी नक्सली' शब्द का इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी ने अगस्त में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान किया था.उन्होंने कहा था, "'दिमागी नक्सली' के अलावा, पता नहीं 'चौकीदार' ने मुझ जैसे लोगों को और क्या-क्या नाम दिए हैं, जैसे 'राष्ट्र-विरोधी', 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' वगैरह. अगर इस देश में कोई 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' है, तो वह यह अवैध सरकार है."
आखिर जामिया में क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में चल रहे विरोध प्रदर्शन का संबंध छात्र संघ चुनाव बहाल करने, चीफ प्रॉक्टर को हटाने और छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने जैसी मांगों से है.. प्रदर्शनकारी छात्रों और छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय में उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए...ऐसे में नसीरुद्दीन शाह का बयान इस मामले को लेकर चर्चा को और बढ़ा रहा है...जहां कुछ लोग उनके बेबाक अंदाज का समर्थन कर सकते हैं, वहीं उनके विचारों से असहमत लोग भी अपनी राय रख सकते हैं... फिलहाल, इस पूरे मामले में छात्रों की मांगें और विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख अहम बना हुआ है..
पहले भी भड़ास निकाल चुके हैं नसीरुद्दीन शाह
यह भी पढ़ें
बताते चले की ये पहली बार नहीं है, जब नसीरुद्दीन शाह ने देश के प्रधानमंत्री और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपनी भड़ास निकाली हो, इससे पहले भी वो कई बार इस तरह की हरकत कर चुके हैं, कुछ दिनों पहले सीजेपी के प्रोटेस्ट में भी शामिल होकर उन्होंने सरकार की आलोचना की थी. हालांकि हर बार वो ट्रोलर्स के निशाने पर आ जाते हैं.