‘ऐसा ‘भगवा जवाब’ देंगे कि भागने के लिए दिल्ली की गलियाँ कम पड़ जाएंगी’, नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर भड़के मनोज मुंतशिर
नेहा बोरा के इस विवादित बयान पर अब बॉलीवुड के मशहूर लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. अब मनोज ने नेहा बोरा के बयान पर पलटवार किया है और उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया है. मनोज मुंतशिर ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट कर लिखा कि लाल सलाम! ये तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा मैडम जी.प्रार्थना कीजिए कि हमारी सहनशीलता अटल रहे, ज़रा सी हिल गई तो ‘लाल सलाम’ को ऐसा ‘भगवा जवाब’ देंगे कि भागने के लिए दिल्ली की गलियाँ कम पड़ जाएँगी.
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन में दिनों AISA नेता नेहा बोरा के बांग्लादेश से प्रेरणा लेने वाले बयान से सियासी भूचाल मच गया है. नेहा बोरा ने अपने एक बयान में बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन से प्रेरित होने की बात कही थी. उन्होंने अपने एक संदेश में कहा था कि भारत में जो Gen-Z आंदोलन चल रहा है, उसकी शुरुआत सबसे पहले बांग्लादेश से हुई थी और बांग्लादेश के छात्रों ने उन्हें क्रांति का रास्ता दिखाया है.
नेहा बोरा पर बीजेपी ने लगाया आरोप
नेहा के इस विवादित बयान पर बीजेपी समेत कई नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि रास्ता दिखाने शब्द का इस्तेमाल करके नेहा भारत में भी बांग्लादेश की तरह तख्तापलट या हिंसक सत्ता परिवर्तव की वकालत कर रही हैं. उन्होंने भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ चल रहे छात्र और युवा प्रदर्शनों को बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से जोड़ते हुए इसे जेन-जी आंदोलन की प्रेरणा बताया है.
नेहा बोरा के विवादित बयान पर भड़के मनोज मुंतशिर
अब नेहा बोरा के इस विवादित बयान पर अब बॉलीवुड के मशहूर लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. अब मनोज ने नेहा बोरा के बयान पर पलटवार किया है और उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया है. मनोज मुंतशिर ने अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट कर लिखा, “लाल सलाम! ये तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा मैडम जी.प्रार्थना कीजिए कि हमारी सहनशीलता अटल रहे, ज़रा सी हिल गई तो ‘लाल सलाम’ को ऐसा ‘भगवा जवाब’ देंगे कि भागने के लिए दिल्ली की गलियाँ कम पड़ जाएँगी.”
‘हम वो आँखें नोच लेंगे जो हमें बांग्लादेश बनाने का सपना देख रही हैं’
मनोज मुंतशिर ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, “Gen-Z सिर्फ़ जंतर-मंतर पे नहीं पाये जाते, ऐसे करोड़ों बच्चे हैं जो हनुमान चालीसा पढ़ के घर से निकलते है और संविधान में तुमसे ज़्यादा श्रद्धा रखते हैं. चेतावनी सुन लो, हम भारत हैं और भारत ही रहेंगे.हम वो आँखें नोच लेंगे जो हमें बांग्लादेश बनाने का सपना देख रही हैं. जय हिन्द, जय भारत.”
लाल सलाम! ये तो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा मैडम जी. प्रार्थना कीजिए कि हमारी सहनशीलता अटल रहे, ज़रा सी हिल गई तो ‘लाल सलाम’ को ऐसा ‘भगवा जवाब’ देंगे कि भागने के लिए दिल्ली की गलियाँ कम पड़ जाएँगी. Gen-Z सिर्फ़ जंतर-मंतर पे नहीं पाये जाते, ऐसे करोड़ों बच्चे हैं जो हनुमान चालीसा पढ़ के घर से निकलते है और संविधान में तुमसे ज़्यादा श्रद्धा रखते हैं. चेतावनी सुन लो, हम भारत हैं और भारत ही रहेंगे. हम वो आँखें नोच लेंगे जो हमें बांग्लादेश बनाने का सपना देख रही हैं. जय हिन्द, जय भारत 🇮🇳
— Manoj Muntashir Shukla (@manojmuntashir) October 17, 2026
नेहा बोरा ने क्या विवादित बयान दिया था?
बता दें कि 14 अक्टूबर 2026 को बांग्लादेश के 'सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट' (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के छात्र आंदोलन को लेकर एक वीडियो संदेश भेजा था. जिसमें उन्होंने कहा था "हम आपको अपना लाल सलाम (Red Salute) पेश करते हैं। और हम जानते हैं कि इस समय भारत में हम जो 'जेन-जी' आंदोलन हर जगह देख रहे हैं, उसकी शुरुआत सबसे पहले बांग्लादेश में हुई थी. हमें रास्ता दिखाने और इस देश के युवाओं के साथ एकजुटता बढ़ाने के लिए आपको बधाई. हम जानते हैं कि बांग्लादेश में जो आंदोलन शुरू हुआ था, वह लोकतांत्रिक और मतदाता अधिकारों के लिए था.”
नेहा बोरा के बयान से दिपके ने पल्ला झाड़ा
अब नेहा बोरा अपने इसी बयान की वजह से आलोचनाओं का शिकार हो रही है. हाल ही में नेहा बोरा के साथ एक प्रेस कॉफ्रेंस में मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने उनकी इस राय से पल्ला झाड़ लिया था. दिपके ने कहा था इस विरोध प्रदर्शन का मकसद केवल CEC को उनके पद से हटाना था, न कि सरकार बदलना.
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प्रेस क्लब में आयोजित कॉन्फ्रेंस में दीपके ने कहा था, "हम यह नहीं कह रहे हैं कि हम सरकार बदलना चाहते हैं. या सरकार के साथ कुछ करना चाहते हैं. हम बस इतना कह रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त जो चुनावों में धांधली कर रहे हैं, जो अपने साथी चुनाव आयुक्तों की बात नहीं सुन रहे हैं और जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनी, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए. उनकी जगह एक नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए."