मणिपुर की छोटी सी फीचर फिल्म ने जीता BAFTA, आखिर फरहान अख्तर के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'बूंग' में ऐसा क्या है खास?
बाफ्टा जैसे बड़े मंच पर भारत की क्षेत्रीय फीचर फिल्मों को सम्मान मिलना गर्व की बात है. फिल्म की डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी मंच पर अवॉर्ड लेने पहुंची और उनके साथ फरहान अख्तर भी नजर आए. भावुक लक्ष्मीप्रिया देवी ने मंच से बाफ्टा का धन्यवाद किया और उनकी छोटी सी फिल्म को इतना बड़ा सम्मान और प्यार देने के लिए दिल से धन्यवाद दिया.
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दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स में एक बाफ्टा पुरस्कार में भारतीय मणिपुरी भाषा की कॉमेडी-ड्रामा फीचर फिल्म 'बूंग' को सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
फरहान अख्तर के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'बूंग' को मिला बाफ्टा
खास बात ये है कि फिल्म बूंग फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी है और फिल्म को डायरेक्ट लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है. बूंग इस साल की पहली भारतीय फिल्म है, जिसे बाफ्टा में नॉमिनेट किया गया था और अब फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल एवं पारिवारिक फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
अवॉर्ड लेने पहुंचे लक्ष्मीप्रिया देवी-फरहान अख्तर
बाफ्टा जैसे बड़े मंच पर भारत की क्षेत्रीय फीचर फिल्मों को सम्मान मिलना गर्व की बात है. फिल्म की डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी मंच पर अवॉर्ड लेने पहुंची और उनके साथ फरहान अख्तर भी नजर आए. भावुक लक्ष्मीप्रिया देवी ने मंच से बाफ्टा का धन्यवाद किया और उनकी छोटी सी फिल्म को इतना बड़ा सम्मान और प्यार देने के लिए दिल से धन्यवाद दिया.
उन्होंने कहा, "यहां तक चलना ऐसा लग रहा था मानो किसी पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के आखिरी कुछ कदम बचे हों, जिस पर चढ़ने के बारे में हमें कभी पता ही नहीं था.”
ये फिल्म और यह जीत मेरे गृह राज्य मणिपुर को एक ट्रिब्यूट है’
निर्देशक ने वैश्विक मंच पर मणिपुर के हालातों पर बात की.अपनी स्पीच में उन्होंने कहा, "यह फिल्म और यह जीत मेरे गृह राज्य मणिपुर को एक ट्रिब्यूट है, जिसे भारत में 'नजरअंदाज और प्रतिनिधित्वहीन' माना जाता है. यह फिल्म भारत के एक बेहद परेशान, उपेक्षित और कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्र, मेरे गृह नगर मणिपुर की पृष्ठभूमि पर आधारित है. मैं इस मौके पर मणिपुर में शांति की वापसी के लिए प्रार्थना करना चाहती हूँ.”
फिल्म 'बूंग' में क्या है खास?
बता दें कि फीचर फिल्म 'बूंग' मणिपुर सीमा पर नस्लीय तनाव और जीवन की परेशानी से जूझ रहे एक स्कूली बच्चे की कहानी है, जिसने जन्म से हिंसा और उपेक्षा को महसूस किया. इसके साथ ही फिल्म राज्य में व्याप्त सामाजिक और राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि को भी बारीकी से दिखाती है. कहानी में स्कूली बच्चा अपने बिखरे परिवार को एक करने और अपने बिछड़े पिता को वापस लाने की लड़ाई लड़ रहा है.
फिल्म को कहां-कहां दिखाया जा चुका है
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बाफ्टा से पहले फिल्म 'बूंग' का साल 2024 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के डिस्कवरी सेक्शन में हुआ था. इसके अलावा, फिल्म वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024, 55वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2025 में प्रदर्शित किया जा चुका है.
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