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Mai Vaapas Aaunga Review: इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' ने जीता दिल, बिछड़ने के दर्द और सच्चे प्यार की कहानी ने छोड़ी गहरी छाप

इम्तियाज अली को हमेशा से रिश्तों और भावनाओं को पर्दे पर खूबसूरती से दिखाने के लिए जाना जाता है और इस फिल्म में भी उन्होंने वही संवेदनशीलता दिखाई है. उन्होंने कहानी को इस तरह पेश किया है कि दर्शक हर किरदार के दुख, खुशी, इंतजार और प्यार को महसूस कर सकें.

Mai Vaapas Aaunga Review: इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' ने जीता दिल, बिछड़ने के दर्द और सच्चे प्यार की कहानी ने छोड़ी गहरी छाप
Image Credits: PR/IANS
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आज के दौर में जहां ज्यादातर प्रेम कहानियां बड़े-बड़े रोमांटिक पलों और दिखावे पर आधारित होती हैं, वहीं फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' एक अलग रास्ता चुनती है. यह फिल्म प्यार में बिछड़ने के दर्द, किसी अपने के लौटने के इंतजार और दोबारा मिलने की उम्मीद को बेहद भावुक तरीके से दिखाती है. बंटवारे के बैकग्राउंड पर बनी यह कहानी दर्शकों को एक ऐसे सफर पर ले जाती है, जहां सच्चा प्यार समय, दूरी और सरहदों से भी बड़ा नजर आता है. 

कहानी

फिल्म की कहानी उन लोगों की है जो अपने किसी खास से दूर हो जाते हैं, लेकिन फिर भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ते। फिल्म बताती है कि सच्चा प्यार केवल साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि इंतजार करने और रिश्ते को निभाने का नाम भी है.

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फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली को हमेशा से रिश्तों और भावनाओं को पर्दे पर खूबसूरती से दिखाने के लिए जाना जाता है और इस फिल्म में भी उन्होंने वही संवेदनशीलता दिखाई है. उन्होंने कहानी को इस तरह पेश किया है कि दर्शक हर किरदार के दुख, खुशी, इंतजार और प्यार को महसूस कर सकें. फिल्म इंसानी रिश्तों, सब्र और भावनात्मक जुड़ाव की अहमियत को सामने लाती है. 

अभिनय 

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत कलाकारों का अभिनय है. एक्टर वेदांग रैना ने दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह के निभाए गए किरदार कीनू के यंग वर्जन को निभाया है. उन्होंने अपने किरदार में मासूमियत, सादगी और भावनाओं को काफी अच्छी तरह दिखाया है. उनके अभिनय की वजह से दर्शक शुरुआत से ही इस किरदार से जुड़ जाते हैं. 

वहीं  शरवरी वाघ ने जिया उर्फ अफसाना का किरदार निभाया है. फिल्म में उनकी मौजूदगी कहानी को और खूबसूरत बनाती है. उन्होंने अपने अभिनय में प्यार, उम्मीद, दर्द और भावनाओं को बहुत सहज तरीके से दिखाया है.

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फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने पोते का किरदार निभाया है. उनका अभिनय काफी सधा हुआ है, लेकिन फिर भी वह दर्शकों पर गहरा असर छोड़ते है. उन्होंने अपने किरदार की भावनाओं को बखूबी पेश किया है. वहीं नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लेंगे. 

फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है. सभी कलाकार मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाते हैं, जो वास्तविक लगती है. 

म्यूजिक 

फिल्म का म्यूजिक भी इसकी सबसे बड़ी खूबियों में शामिल है. गाने कहानी को आगे बढ़ाने का काम करते हैं. फिल्म में ऐसे कई गीत हैं, जो प्यार, इंतजार और भावनाओं को खूबसूरती से बयां करते हैं. फिल्म खत्म होने के बाद भी इसके गाने लंबे समय तक याद रहेंगे. 

बैकग्राउंड स्कोर

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संगीतकार ए. आर. रहमान का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर ले जाता है. रहमान ने अपने संगीत के जरिए कहानी की आत्मा को जीवंत किया है, जिससे प्यार, बिछड़न, उम्मीद और दोबारा मिलने की भावनाएं और गहरी हो जाती हैं. 

रेटिंग: 4.5/5 

 

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