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जन्माष्टमी के दिन कब है शुभ मुहूर्त, कब रहेगा राहुकाल? एस्ट्रोलॉजर करण शर्मा से जानें 4 सितंबर का पंचांग
आज शुक्रवार 4 सितंबर जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक रहेगी. निशीथ काल में रात 11:57 से 12:43 बजे तक श्रीकृष्ण की पूजा होगी। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 से 12:50 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 10:52 से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा.
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4 सितंबर पंचांग: हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है. कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है. पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है. आइए एस्ट्रोलॉजर करण शर्मा से जानें आज का दिन में किस समय सशुभ-अशुभ समय है.
कृष्ण जन्माष्टमी पर जानें 4 सितंबर का पंचांग
4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी।. इस दिन कृष्ण जन्माष्टमी है और भगवान श्रीकृष्ण (लड्डू गोपाल) की पूजा की जाती है. शुक्रवार को गृहस्थ लोग जन्माष्टमी मनाएंगे. निशीथ काल पूजा रात 11:57 बजे से रात 12:43 बजे तक की जाएगी.
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सूर्योदय, सूर्यास्त और नक्षत्र का समय
शुक्रवार सुबह 6:13 बजे सूर्योदय और शाम 6:38 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 11:45 बजे चंद्रोदय और अगले दिन सुबह 01:00 बजे चंद्रास्त होगा. पंचांग के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा जबकि चंद्रमा रात लगभग 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा.
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हर्षण योग और शुभ मुहूर्त
शुक्रवार दोपहर लगभग 03:44 बजे तक हर्षण योग रहेगा, इसके बाद वज्र योग शुरू हो जाएगा. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:50 तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है. अमृत काल रात 8:02 से 09:32 बजे तक रहेगा.
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राहुकाल और अशुभ समय
वहीं, राहुकाल सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:25 बजे और गुलिक काल सुबह 7:46 से 9:19 बजे तक रहेगा. इसके अलावा, यमगंड काल दोपहर 3:31 से दोपहर 5:05 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है.
सिंह राशि में सूर्य और वृषभ में चंद्रमा
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शुक्रवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा।. पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा. ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए. यदि यात्रा करना अनिवार्य हो, तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है.
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बता दें कि यह था 4 सितंबर का पंचांग, जिसमें जन्माष्टमी के साथ शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति की जानकारी मिली. किसी भी शुभ कार्य या यात्रा से पहले इन समयों और दिशाशूल का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है.