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Chaitra Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को ऐसे करें प्रसन्न, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है. मां कालरात्रि की आराधना से भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा की प्राप्ति होती है. वहीं, धर्म शास्त्रों के अनुसार पूजा, दान और नए कार्य सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल या विजय मुहूर्त में करना श्रेयस्कर होता है. हालांकि, राहुकाल और भद्रा के समय किसी भी शुभ काम से बचना चाहिए.

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चैत्र नवरात्र की सातवां दिन यानी सप्तमी तिथि बुधवार को है. इस दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. साथ ही आज सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. 

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व 

नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है. मां कालरात्रि की आराधना से भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा की प्राप्ति होती है. वहीं, धर्म शास्त्रों के अनुसार पूजा, दान और नए कार्य सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत काल या विजय मुहूर्त में करना श्रेयस्कर होता है. हालांकि, राहुकाल और भद्रा के समय किसी भी शुभ काम से बचना चाहिए. 

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जानें शुभ मुहूर्त

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बुधवार का पंचांग देखें तो सूर्योदय 6 बजकर 20 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 35 मिनट पर होगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक है. सप्तमी पर अभिजित मुहूर्त तो नहीं लेकिन विजय मुहूर्त है, जो 2 बजकर 30 मिनट दोपहर से 3 बजकर 19 मिनट दोपहर तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 34 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट तक और अमृत काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 20 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. बुधवार को सप्तमी तिथि दोपहर 1 बजकर 50 मिनट तक है. उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन सप्तमी का मान होगा. वहीं, नक्षत्र मृगशिरा शाम 5 बजकर 33 तक रहेगा. 

मां कालरात्रि को कैसे करें प्रसन्न

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मां कालरात्रि की पूजा करने के लिए सुबह सबसे पहले घर की साफ-सफाई के बाद स्नान आदि से मुक्त हो जाएं. इसके बाद लाल या नीले कपड़े पहन लें. मां कालरात्रि की मूर्ति को गंगा जल से शुद्ध कर कुमकुम, रोली और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद दीप जलाकर धूप जलाएं. इसके बाद पूजा शुरू करें. साथ ही मां रातरानी का फूल चढ़ाएं. इस दौरान बताए गए मंत्रों का उच्चारण कर आरती जरूर गाएं. इसके बाद माता को खीर या फिर गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाकर प्रसाद को पूरे घर में बांट दें. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै" मंत्र का 108 बार जाप करने से भय दूर होता है. अंत में मां से अपनी गलतियों की माफी मांगकर अपने मंगल की कामना करें.

अशुभ समय में ना करें पूजा 

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25 मार्च को अशुभ समय पर विचार करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक प्रभावी रहेगा. यमगंड सुबह 7 बजकर 51 मिनट से सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा. इसके अलावा, दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा. साथ ही दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से देर रात 12 बजकर 47 मिनट रात (25 मार्च) तक भद्रा प्रभावी रहेगा. इनमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं.

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