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पुरुषोत्तम मास 2026: भगवान विष्णु का अत्यंत शुभ मास और शुभ मुहूर्त

पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है. व्रत-उपवास रखने और श्री हरि का भजन-कीर्तन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

पुरुषोत्तम मास 2026: भगवान विष्णु का अत्यंत शुभ मास और शुभ मुहूर्त
Image Credits: AI Generated Image
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सनातन धर्म में नारायण को प्रिय पुरुषोत्तम मास या अधिक मास अति प्रिय है. ज्येष्ठ शुक्ल की नवमी तिथि यानी 24 मई (रविवार) 2026 को मास का नौवां दिन है. इस दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं. अभिजीत मुहूर्त के साथ विजय मुहूर्त का शुभ संयोग है, जो धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और नया काम शुरू करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय मास माना जाता है. इसे अधिक मास, मल मास और लोंद मास के नाम से भी जाना जाता है. यह मास लगभग हर तीन वर्ष में आता है.

24 मई 2026 के शुभ मुहूर्त और समय

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शुभ मुहूर्त व योग की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक, सर्वार्थ सिद्धि योग देर रात 2 बजकर 51 मिनट से रविवार की सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 4 मिनट से 4 बजकर 45 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 9 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. वहीं, अमृत काल शाम 8 बजकर 16 मिनट से 9 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है.

अशुभ समय

रविवार के अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल शाम 5 बजकर 27 मिनट से शाम 7 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. इस समय किसी भी शुभ कार्य या यात्रा से बचना चाहिए.अन्य अशुभ समय में यमगंड दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 2 बजकर 1 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से 5 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. वहीं, दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा.

सूर्य के समय और नक्षत्र

रविवार को सूर्योदय 5 बजकर 26 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 10 मिनट पर होगा. नवमी तिथि पर नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी रहेगा जो 24 मई की सुबह 2 बजकर 51 मिनट तक, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी लग जाएगा. हर्षण योग 24 मई की सुबह 3 बजकर 45 मिनट तक और करण बालव शाम 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, इसके बाद कौलव रहेगा.

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पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है. व्रत-उपवास रखने और श्री हरि का भजन-कीर्तन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

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