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आतंकवाद के ऑनलाइन महिमामंडन पर बड़ा एक्शन, कश्मीर में CIK की ताबड़तोड़ छापेमारी

जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रमुख खुफिया शाखा आपराधिक जांच विभाग का हिस्सा होने के नाते, सीआईके केंद्रशासित प्रदेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

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08 Aug 2026
( Updated: 08 Aug 2026
11:42 AM )
आतंकवाद के ऑनलाइन महिमामंडन पर बड़ा एक्शन, कश्मीर में CIK की ताबड़तोड़ छापेमारी
Image Credit: IANS
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जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) शाखा ने शनिवार को आतंकवाद के ऑनलाइन महिमामंडन के संबंध में पहले से दर्ज एफआईआर के सिलसिले में घाटी में कई स्थानों पर छापेमारी की. 

आतंकवाद के महिमामंडन के आरोप में घाटी में कई स्थानों पर छापेमारी

अधिकारियों ने कहा, "यह मामला आतंकवाद का महिमामंडन करने और व्यक्तियों को आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रभावित करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्मों के दुरुपयोग से संबंधित है."

बारामूला, शोपियां, अनंतनाग, कुपवारा, बांदीपोरा और अन्य जिलों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

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जांच में जुटी सीआईडी की विशेष टीम 

सीआईके जम्मू-कश्मीर पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की एक विशेष शाखा है जो कश्मीर घाटी के भीतर आतंकी नेटवर्क, आतंकी वित्तपोषण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का पता लगाने, जांच करने और उन्हें खत्म करने पर केंद्रित है.

कैसे करती है सीआईके काम 

सीआईके के मुख्य कार्य गुप्त भर्ती मॉड्यूल, सफेदपोश आतंकी गतिविधियों और सीमा पार हैंडलर नेटवर्क का पर्दाफाश करने पर केंद्रित हैं.

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सीआईके के कर्तव्यों में तकनीकी हस्ताक्षरों को रोकना, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के दुरुपयोग पर रोक लगाना और आतंकी वित्तपोषण से जुड़े साइबर-धोखाधड़ी नेटवर्क को निशाना बनाना भी शामिल है.

सीआईके की छापेमारी अदालत के उन वारंटों द्वारा समर्थित है जिनमें आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य और संचार हार्डवेयर को जब्त करने का अधिकार है.

सीआईके आतंकवादी गतिविधियों पर रखती है खास नज़र 

सीआईके जम्मू-कश्मीर पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (CID) की एक विशेष शाखा है, जो कश्मीर घाटी में आतंकवादी नेटवर्क, आतंक के वित्तपोषण और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की निगरानी, जांच तथा उन्हें ध्वस्त करने पर केंद्रित है.

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सीआईके का मुख्य कार्य गुप्त भर्ती मॉड्यूल, सफेदपोश आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क और सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवादी हैंडलरों के तंत्र का पर्दाफाश करना है.

सीआईके की जिम्मेदारियों में तकनीकी संकेतों की निगरानी करना, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के दुरुपयोग पर कार्रवाई करना और आतंकवाद को वित्तीय मदद पहुंचाने वाले साइबर ठगी नेटवर्क को निशाना बनाना भी शामिल है.

अदालत से प्राप्त वारंट के आधार पर सीआईके करती है छापेमारी 

सीआईके की छापेमारी अदालत से प्राप्त वारंट के आधार पर की जाती है, ताकि आपराधिक डिजिटल साक्ष्य और संचार उपकरणों को जब्त किया जा सके.

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जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रमुख खुफिया शाखा आपराधिक जांच विभाग का हिस्सा होने के नाते, सीआईके केंद्रशासित प्रदेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

सीआईडी की जिम्मेदारी खुफिया सूचनाओं को एकत्र करना, उनका विश्लेषण करना और उन्हें साझा करना है, ताकि नीतिगत निर्णयों को समर्थन मिले, कानून-व्यवस्था मजबूत हो और प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित किया जा सके. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में सीआईडी जम्मू-कश्मीर में अपनी स्पेशल ब्रांच और काउंटर इंटेलिजेंस इकाइयों के माध्यम से कार्य करता है.

स्पेशल ब्रांच राजनीतिक और अन्य संवेदनशील मामलों से जुड़ी खुफिया सूचनाएं जुटाने और उनका आकलन करने का काम करती है. वहीं, काउंटर इंटेलिजेंस विंग आतंकवाद-रोधी अभियानों, जासूसी-रोधी गतिविधियों, जासूसी, तस्करी और सीमा-पार गतिविधियों पर नजर रखने पर केंद्रित रहता है.

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ये दोनों इकाइयां मिलकर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में अहम योगदान देती हैं.

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खुफिया गतिविधियों के अलावा, सीआईडी विभिन्न वैधानिक और प्रशासनिक सत्यापन कार्य भी करता है. इनमें सरकारी सेवा से जुड़े मामले, पासपोर्ट, वीजा, एनआरआई, प्रवासन (माइग्रेशन) तथा सुरक्षा खतरे के आकलन से संबंधित जांच शामिल हैं.

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