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कितनी सेफ राजधानी? दिल्ली में हर दिन गायब हो रहे 54 लोग, नाबालिग लड़कियों और महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा

कितनी सेफ राजधानी? दिल्ली में हर दिन गायब हो रहे 54 लोग, नाबालिग लड़कियों और महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा

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Delhi Police Missing Data: देश की राजधानी दिल्ली में अपराध को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. जनवरी के शुरुआती 15 दिनों में ही 800 से ज्यादा लोग संदिग्ध हालातों में गायब हो गए. इस रिपोर्ट ने दिल्ली पुलिस और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

ये आंकड़े दिल्ली पुलिस की ओर से जारी किए गए हैं. जिसमें एक जनवरी से 15 जनवरी 2026 के बीच कुल 807 लोग लापता हो गए हैं. यानी हर दिन औसतन करीब 54 लोग गायब हो रहे हैं. चिंता की बात यह है कि इनमें से 572 लोग अभी भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं, उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. 

लापता लोगों में महिलाएं और लड़कियां सबसे ज्यादा 

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राजधानी में अभी भी लड़कियों और महिलाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षा का माहौल नहीं है. क्योंकि मिसिंग लोगों की जो रिपोर्ट आई है उसमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की ही है. 

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आंकड़ों के अनुसार, कुल लापता लोगों में से लगभग दो-तिहाई महिलाएं या बच्चियां हैं. इन 15 दिनों में 509 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं हैं. जबकि इस लिस्ट में महिलाओं की संख्या 363 है. वहीं, मिसिंग पुरुषों की संख्या 298 है. ये आंकड़े महिला सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चेतावनी हैं. जबकि इस असल तस्वीर से उलट दिल्ली में सुरक्षा के दावे किए जाते हैं. 

बच्चों के लिए भी डराने वाली रिपोर्ट 

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लड़कियां और महिलाएं ही नहीं दिल्ली पुलिस के आंकड़ों में बच्चों के लिए भी डराने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक से 15 जनवरी के बीच 191 नाबालिग लापता हुए हैं. यानी हर दिन 13 बच्चे गायब हो रहे हैं. 

  • 8 से 12 साल की उम्र के 13 बच्चे गायब हुए 
  • 8 साल से कम उम्र के 9 बच्चे लापता हुए
  • इनमें से 8 साल से कम उम्र के 6 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला 
  • गायब होने वाले नाबालिगों में 138 लड़कियां हैं
  • लापता नाबालिगों में 31 लड़के हैं
  • कुल नाबालिगों में 71% नाबालिग अभी भी लापता हैं

साल 2025 में देशभर से ऐसे कई रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था जहां बच्चों को धर्मांतरण करवाया जा रहा था. राजस्थान के अलवर, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में ये रैकेट एक्टिव थे. जहां मदरसों में धर्मांतरण की तैयारी की जा रही थी. वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली से नाबालिगों को दिल्ली से दूर केरल में ले जाकर भी उनका धर्मांतरण किया जाता है. जिससे उनकी असली पहचान पूरी तरह खत्म हो जाती है. 

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वहीं, लड़कियों की मिसिंग रिपोर्ट के पीछे चौंकाने वाला सच है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़कियों को किडनैप करने के बाद उन्हें वैश्यावृति और जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया जाता है और ये काम स्टेप बाय स्टेप चलता है. जिसमें एजेंट के जरिए बच्चियों को बाहर भेजा जाता है जहां उन्हें क्लाइंट को सौंप दिया जाता है. दिल्ली में गायब बच्चियों को लेकर रिपोर्ट इस ओर बड़ा इशारा करती है. 

दिल्ली में 10 साल से अपराध का काला सच 

देश की राजधानी में क्राइम का ग्राफ कम होने की बजाय साल दर साल बढ़ता जा रहा है. मिसिंग लोगों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां. 

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  • साल 2025 में कुल 24,508 लोग दिल्ली से गायब हुए थे
  • इनमें 60% से ज्यादा महिलाएं थीं
  • पिछले 10 सालों में 2 लाख 32 हजार 737 लोग लापता 

इनमें से पुलिस को केवल 1.8 लाख लोगों का सुराग मिला. जो 50% से भी कम है. चौंकाने वाली बात ये है कि ये डेटा हर नए साल की शुरुआत में सबसे ज्यादा होता है. यानी एक जनवरी से लेकर 15 या 20 जनवरी तक सबसे ज्यादा मिसिंग लोगों की रिपोर्ट दर्ज की गई है. 

अब 2026 की शुरुआत का नया आंकड़ा इस तस्वीर को और गंभीर बनाता है. जो कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल और महिलाओं बच्चों के लिए एेक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है. जबकि पुलिस का दावा है कि वह अपराध और अपराधियों के साथ सख्ती से पेश आई है. साल 2026 को बीते एक महीने ही हुए हैं और पहले ही महीने में जो आंकड़ें आए हैं वो वॉर्निंग अलार्म की तरह हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

सवाल जो दिल्ली पुलिस से पूछे जाने चाहिए

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क्या राजधानी सच में सुरक्षित है? 

क्या महिलाएं और बच्चे बिना डर के घर से बाहर निकल सकते हैं? 

लापता लोगों को जल्द ढूंढने के लिए कोई प्रभावी प्लान और ठोस प्लान बनाया जाता है? 

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