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अब हर गांव से निकलेगी 'लखपति दीदी'! 6 करोड़ महिलाओं के लिए सरकार का बड़ा डिजिटल दांव
Lakhpati Didi: इस प्लेटफॉर्म का मकसद सिर्फ महिलाओं को कारोबार शुरू करने में मदद करना नहीं है, बल्कि उन्हें अपने छोटे-छोटे उद्यम को आगे बढ़ाने, उसकी प्रगति पर नजर रखने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का पूरा डिजिटल सहयोग देना है.
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Lakhpati Didi: ग्रामीण भारत की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई डिजिटल पहल शुरू की है. इसका नाम 'एसएचई-लीप्स' (Self Help Entrepreneur - Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) रखा गया है. इस प्लेटफॉर्म का मकसद सिर्फ महिलाओं को कारोबार शुरू करने में मदद करना नहीं है, बल्कि उन्हें अपने छोटे-छोटे उद्यम को आगे बढ़ाने, उसकी प्रगति पर नजर रखने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का पूरा डिजिटल सहयोग देना है. सरकार का मानना है कि यह पहल देशभर में 6 करोड़ 'लखपति दीदी' तैयार करने के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएगी. खास बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी लाखों ग्रामीण महिलाओं को एक ही डिजिटल मंच पर जोड़कर उन्हें नए अवसर उपलब्ध कराएगा..
क्या है 'एसएचई-लीप्स' और कैसे करेगा महिलाओं की मदद?
'एसएचई-लीप्स' एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे खास तौर पर ग्रामीण महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसके जरिए महिलाएं अपना छोटा कारोबार शुरू कर सकेंगी, उसे बढ़ाने के लिए जरूरी जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकेंगी और अपने बिजनेस की प्रगति को डिजिटल तरीके से ट्रैक भी कर पाएंगी. इससे महिलाओं को अलग-अलग सरकारी योजनाओं, वित्तीय सेवाओं और आजीविका से जुड़े संसाधनों तक पहुंच आसान होगी. सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं सिर्फ स्वयं सहायता समूहों तक सीमित न रहें, बल्कि सफल उद्यमी बनकर अपने परिवार की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएं.
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कृषि से लेकर छोटे उद्योगों तक मिलेगा बढ़ावा
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सरकार का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म केवल खेती-किसानी से जुड़े कामों तक सीमित नहीं रहेगा. इसके माध्यम से कृषि आधारित कारोबार के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण और दूसरे गैर-कृषि ग्रामीण उद्यमों को भी बढ़ावा दिया जाएगा. इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय स्तर पर मजबूत एवं टिकाऊ अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी. डिजिटल प्लेटफॉर्म होने की वजह से महिलाओं को अपने कारोबार की जानकारी, बिक्री और प्रदर्शन से जुड़ा डेटा भी एक जगह उपलब्ध रहेगा.
'लखपति दीदी' मिशन को मिलेगी नई रफ्तार
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सरकार का मानना है कि 'एसएचई-लीप्स' के आने से 'लखपति दीदी' मिशन को नई गति मिलेगी. इस प्लेटफॉर्म के जरिए महिलाओं की आय, उनके कारोबार की प्रगति और आर्थिक विकास की शुरुआत से लेकर आगे तक पूरी डिजिटल निगरानी की जा सकेगी. इससे यह समझना भी आसान होगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की मदद की जरूरत है. सरकार ने अगले पांच वर्षों में इस मिशन के तहत महिलाओं को लाभ पहुंचाने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई है, ताकि ग्रामीण महिलाओं के कारोबार का विस्तार बड़े स्तर पर हो सके.
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पूरे देश में होगा लागू
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इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत 29 जून को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दौरान की गई थी. इस सम्मेलन का उद्देश्य 'विकसित ग्राम–विकसित भारत' के लक्ष्य को आगे बढ़ाना था. सरकार के अनुसार, 'एसएचई-लीप्स' को देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा. इसके संचालन में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं तक इस योजना का लाभ आसानी से पहुंच सके.
डिजिटल डेटा से बनेगी बेहतर नीति
'एसएचई-लीप्स' की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसके जरिए ग्रामीण उद्यमों से जुड़ा रियल-टाइम डेटा उपलब्ध होगा. इससे सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में किस तरह का कारोबार बढ़ रहा है, किन महिलाओं को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है और किन योजनाओं का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है. इस डेटा के आधार पर गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी और योजनाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी.
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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि 'एसएचई-लीप्स' सिर्फ एक मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में महिला उद्यमिता को नई पहचान देने की कोशिश है. डिजिटल तकनीक, वित्तीय समावेशन और स्वरोजगार को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत दे सकती है. यदि इसका प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में यह 'लखपति दीदी' मिशन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और समावेशी ग्रामीण विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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Input- IANS