ट्रंप के टैरिफ की भारत ने खोज ली काट, अपना रहा चार सूत्री 'मॉडल', PM मोदी के आर्थिक सलाहकार का बड़ा खुलासा
ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए भारत चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रहा है. इतना ही नहीं नए बाजारों की तलाश कर भारत ने ना सिर्फ अमेरिकी टैरिफ की काट खोज ली है, बल्कि अर्थव्यवस्था पर दबाव को भी कम कर रहा है.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने टैरिफ ने भारत को अपनी रणनीति और ट्रेड पॉलिसी पर फिर से विचार करने पर मजबूर कर दिया है. भारत ने अमेरिका से मिल रही व्यापारिक और निर्यात चुनौतियों के बीच दुनियाभर में अपने बाजारों में विविधता लानी शुरू कर दी है. इतना ही मोदी सरकार ने टैरिफ से होने वाले आर्थिक नुकसान और अर्थव्यवस्था पर भार से निपटना शुरू कर दिया है.
'ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए भारत का 4 सूत्री दृष्टिकोण'
इसी बीच प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस. महेंद्र देव ने कहा कि टैरिफ से निपटने के लिए भारत सरकार चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रही है, जिसमें इंडस्ट्रीज को मदद करना, निर्यात में विविधीकरण लाना और एफटीए शामिल है.
दिल्ली में स्कॉच शिखर सम्मेलन में समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए महेंद्र देव ने कहा, "टैरिफ से निपटने के लिए भारत सरकार चार सूत्रीय दृष्टिकोण अपना रही है, जिसमें पहला - इंडस्ट्रीज को मदद पहुंचाना, दूसरा- एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों में निर्यात का विविधीकरण करना, तीसरा- अन्य देशों से फ्री ट्रेंड एग्रीमेंट (एफटीए) करना और चौथा- अमेरिका से ट्रेड डील के लिए बातचीत जारी रखना है."
'विकसित भारत के लक्ष्य के लिए हासिल करनी होगी 7-8% की विकास दर'
उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य के बारे में बातचीत करते हुए कहा कि जापान, साउथ कोरिया और अन्य कई देश इसे हासिल कर चुके हैं. हमें पास सही नीतियां हैं और विकसित भारत के लिए सात से आठ प्रतिशत की वृद्धि दर आवश्यक है. इसके लिए हमारी निवेश दर 35 प्रतिशत होनी चाहिए, जो कि फिलहाल 30 प्रतिशत है. इसे बढ़ाने की आवश्यकता है.
2026 में रह सकती है 7.4% की विकास दर: एस. महेंद्र देव
विकास दर के बारे में बातचीत करते हुए ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने कहा कि इस वर्ष देश की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है और अगले साल हमारी विकास दर 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच रह सकती है. कोरोना के बाद चार वर्षों में हमारी वृद्धि दर औसत 7.7 प्रतिशत रही है.
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर मोदी सरकार गंभीर
उन्होंने आगे बताया कि सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तेजी से कारोबार में आसानी को बढ़ावा दे रही है और इसी कड़ी में हाल ही में केंद्र ने परमाणु सेक्टर को निजी क्षेत्र की कंपनियों के लिए खोला है और इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है. साथ ही, कई कानूनों का गैर-अपराधीकरण और अविनियमन किया गया है.
वहीं विकसित भारत के लक्ष्य और राजकोषीय घाटे पर बात करते हुए प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के चेयरमैन महेंद्र देव ने कहा है कि विकसित भारत रोडमैप के तहत केंद्रीय बजट 2026 में राजकोषीय घाटे पर कंट्रोल और कर्ज स्थिरता (Debt sustainability) पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है.
1 फरवरी को पेश होगा आम बजट
आपको बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा. बतौर महिला वित्त मंत्री के रूप में वो रिकॉर्ड लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी. इसकी तैयारियां भी अंतिम चरण में है. इसके साथ ही टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा, किसान और उद्योग हर किसी की निगाहें अब बजट 2026 पर टिक गई हैं.
कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग में दिग्गज अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक की थी और कहा था कि बजट में 2047 विजन का भी ध्यान होना चाहिए. तब पीएम मोदी के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मीटिंग में शामिल हुईं थीं.
संसद के बजट सत्र का 28 जनवरी से होगा आगाज
आपको बता दें कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा. सत्र का पहला फेज 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा फेज 9 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के बजट सत्र को बुलाने की मंजूरी दे दी है.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी दोनों सदनों के संयुक्त सत्र बुलाने की मंजूरी
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार की सिफारिश पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को 2026 के बजट सत्र के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है. यह सत्र 28 जनवरी 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा.
उन्होंने लिखा कि पहला चरण 13 फरवरी 2026 को समाप्त होगा और संसद 9 मार्च 2026 को पुनः एकत्रित होगी. यह सार्थक बहस और जन-केंद्रित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
2017-18 से 1 फरवरी को पेश किया जा रहा देश का आम बजट
केंद्र सरकार की ओर से 2017-18 से आम बजट को लगातार एक फरवरी को पेश किया जा रहा है. स्टॉक एक्सचेंज भी संकेत दे चुके हैं कि अगर बजट रविवार को पेश किया जाता है तो इस दिन एक स्पेशल ट्रेडिंग सेशन रखा जाएगा.
आम बजट के एक अनोखे रिकॉर्ड पर एक नजर
यह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला लगातार नौवां बजट होगा. उन्होंने लगातार सबसे अधिक बजट प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड पहले ही बना लिया है. यदि वह एक और बजट भी प्रस्तुत करती हैं, तो वे दिवंगत मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी, जिन्होंने दो कार्यकालों, 1959 से 1964 के बीच छह और 1967 से 1969 के बीच चार, में कुल 10 बजट प्रस्तुत किए थे. अन्य हालिया वित्त मंत्रियों में, पी. चिदंबरम ने नौ बजट प्रस्तुत किए थे, जबकि प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में आठ बजट प्रस्तुत किए थे.
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