अमेरिकी बैंक ने माना भारत की आर्थिक ताकत का लोहा, बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान, डेड इकोनॉमी कहने वाले ट्रंप को मिला जवाब
हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को कभी डेड इकोनॉमी कहने वाले ट्रंप को दुनिया भर के बैंकों, ब्रोकरेज फर्मों और इकोनॉमिक फर्म्स ने तगड़ा जवाब दिया है. एक ओर जहां भारत जापान को पछाड़ कर दुनिया की चौथी सबसबे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, वहीं अब अमेरिकी बैंक ने ही भारत को लेकर बड़ी बात कह दी है.
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भारत की अर्थव्यवस्था फर्राटा भर रही है. आर्थिक मोर्चे पर नया साल देश के लिए काफी सकारात्मक साबित होने वाला है. भारत 2026 की शुरुआत में ही जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. ये ट्रंप की टैरिफ नीतियों, वैश्विक चुनौतियों और लगातार तनावपूर्ण हालात के बावजूद हो पाया है. दुनिया की कई एजेंसियों, सगठनों ने इसको लेकर अपनी रिपोर्ट भी दी है. वहीं अब अमेरिकी बैंकों ने भी भारत की आर्थिक ताकत और विकास दर का लोहा मानना शुरू कर दिया है. ये एक तरह से हिंदुस्तान को एक 'मृत इकोनॉमी' बताने वाले ट्रंप को उन्हीं के देश के बैंक का जवाब है.
बैंक ऑफ अमेरिका ने बढ़ाया भारत की GDP में ग्रोथ का अनुमान!
आपको बताएं कि मजबूत नीतिगत सुधारों और उपभोग के चलते भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है. इसी को देखते हुए बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले बैंक ने यह अनुमान 7 प्रतिशत लगाया था. इसके अलावा, बीओएफए ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले यह अनुमान 6.5 प्रतिशत था.
क्यों बढ़े जीडीपी ग्रोथ के अनुमान!
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने नई रिपोर्ट में कहा है कि भारत से मिले नए आर्थिक आंकड़े यह दिखाते हैं कि 2025 के अंत तक देश की आर्थिक गतिविधियों में सुधार हुआ है. इसी वजह से जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया गया है. भारत की अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की थी, जो उम्मीद से ज्यादा थी. इसके बाद 2025-26 के लिए विकास दर को लेकर अनुमान और बेहतर हुए हैं.
सरकार की नीतियों की आर्थिक वृद्धि में बड़ी भूमिका
वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में सरकारी नीतियों का समर्थन भारत की आर्थिक वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाएगा. आरबीआई ने गवर्नर संजय मल्होत्रा के नेतृत्व में 2025 में कई बार ब्याज दरों में कटौती की. इससे कारोबार और निवेश को बढ़ावा मिला और अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी हुई है.
ब्रोकरेज फर्म ने बताया कि देश में खपत और खर्च बढ़ा है. इसके साथ ही निवेश से जुड़े आंकड़े भी मजबूत हुए हैं. ईंधन की खपत, गाड़ियों की बिक्री और कर्ज की बढ़ोतरी जैसे संकेतक नवंबर और दिसंबर में तेज हुए हैं, जिससे आर्थिक मजबूती साफ दिखती है.
सरकार जल्द ही नई जीडीपी शृंखला के साथ-साथ महंगाई की नई शृंखला भी जारी करने वाली है. इसके साथ ही वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के पुराने आंकड़ों को भी नए तरीके से पेश किया जाएगा, ताकि तुलना आसान हो सके. हालांकि, सरकार का मानना है कि नए आंकड़े आने के बाद भी भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा.
'2027 में भारत की GDP ग्रोथ बढ़कर 11% तक रहने की उम्मीद'
वहीं एसबीआई म्यूचुअल फंड ने भी भारत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर में बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. फंड ने कहा है कि वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर लगभग 11 प्रतिशत और वास्तविक वृद्धि करीब 7.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. यह बढ़ोतरी देश के अंदर कर्ज के जरिए बढ़ रही खपत और सरकार की नीतियों के समर्थन से हो सकती है.
एसबीआई म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी रह सकती है. इसके पीछे मुख्य कारण सरकार द्वारा किए गए सुधार और लोगों द्वारा बेहतर और महंगे उत्पादों को खरीदने की बढ़ती आदतें हैं. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक मंदी और भू-राजनीति अभी भी बड़े खतरे बने हुए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि औसतन 8 प्रतिशत रही, जबकि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि थोड़ी कम होकर 8.8 प्रतिशत रही.
घटेगी महंगाई दर!
एसबीआई म्यूचुअल फंड ने यह भी कहा कि महंगाई दर वित्त वर्ष 2027 में घटकर लगभग 4 प्रतिशत हो सकती है. अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था में कोई बड़ी गिरावट नहीं आती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी मौद्रिक नीति में लंबे समय तक कोई बदलाव नहीं कर सकता. रिपोर्ट में हाल ही में उठाए गए कुछ कदमों का भी जिक्र किया गया है, जैसे कि सरकार द्वारा 2 लाख करोड़ रुपए की ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (ओएमओ) और जनवरी के मध्य में 10 अरब डॉलर का बाय-सेल स्वैप.
रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में खर्च की स्थिति थोड़ी बेहतर हो सकती है क्योंकि सरकारी योजनाएं और कम महंगाई किसानों की मदद कर रही हैं. हालांकि, खरीफ फसल से हुई आय में कमी का असर अभी भी मौजूद है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने से विकास पर थोड़ा ही असर पड़ेगा, क्योंकि भारत को चीनी निर्यात से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.
राजकोषीय घाटा में भी होगी कमी!
सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो वित्त वर्ष 2027 में घटकर 4.2 प्रतिशत हो सकता है. हालांकि, राज्यों का घाटा अभी भी ज्यादा बना हुआ है. सरकार के बॉन्ड की आपूर्ति बढ़कर 29 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है, जिससे मांग और आपूर्ति में दबाव बना रहेगा. रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2025 में रुपए की कीमत में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई. इसकी वजह विदेशी लेनदेन से जुड़ी मांग और बॉन्ड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी बताई गई है.
भारत की फिलहाल 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की GDP
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, “4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है और अगले ढाई से तीन वर्षों में जर्मनी को तीसरे स्थान से विस्थापित करने की राह पर है, जिसका अनुमानित जीडीपी 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगा.”
ग्लोबल एजेंसियों के भारत की विकास दर को लेकर अनुमान
आपको बता दें कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी भारत के विकास को लेकर सकारात्मक अनुमान व्यक्त किए हैं. जहां विश्व बैंक ने 2026 में 6.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है, वहीं मूडीज का कहना है कि भारत 2026 में 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जी-20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
कैसे होता है मजबूती का आकलन?
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आमतौर पर, भारत में कम महंगाई, कच्चे तेल की स्थिर कीमतें, वित्तीय अनुशासन और जीडीपी के 1 प्रतिशत से कम चालू खाता घाटा (सीएडी) देश की अर्थव्यवस्था और रुपए को मजबूत बनाए रखते हैं. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि निवेश के लिए खपत, वित्तीय क्षेत्र और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों पर ध्यान देना बड़ा फायदेमंद साबित हो सकता है.
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