'रूबल में करो पेमेंट...', भारत ने रूस को दिया बड़ा ऑफर, खत्म होगी डॉलर की बादशाहत, चिढ़ जाएंगे ट्रंप
भारत ने रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार को लेकर रूबल में पेमेंट का ऑफर मॉस्को को दिया है. ये एक ऐसी अपील है जिससे ट्रंप और अमेरिका चिढ़ना पक्का है.
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भारत ने ट्रंप की धमकियों और लगाए गए 50% टैरिफ के बीच एक बड़ा कदम उठाया है. ये एक ऐसी अपील है, जिससे ट्रंप और अमेरिका चिढ़ सकता है. दरअसल, भारत ने रूस से उसकी रूबल में ट्रेड और पेमेंट की अपील की है.
दरअसल नई दिल्ली ने मॉस्को से कहा है कि वह भारत में बड़े पैमाने पर होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स, इंजीनियरिंग गुड्स, खाने-पीने की चीजों और मछली उत्पादों पर ट्रेड बैरियर्स को दूर करे, ताकि इन सामानों का निर्यात तेजी से हो सके. भारत न सिर्फ इसकी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई में बहुत मजबूत है, बल्कि रूस में इनकी डिमांड भी काफी ज्यादा है.
इस लिहाज से भारत चाहता है कि जो भी अड़चनें हैं, उन्हें दूर किया जाए ताकि निर्यात बढ़ सके. आपको बता दें कि एक ओर जहां चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 88 बिलियन डॉलर का है, तो वहीं रूस के साथ भी ट्रेड बैलेंस्ड नहीं है.
रूस के बैंक अकाउंट में जमा हुए 50-55 अरब डॉलर के रूबल
भारत और रूस के बीच कारोबार तो बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन यह बैलेंस्ड नहीं है. भारतीय तेल कंपनियों ने रूस से अधिक मात्रा में कच्चे तेल की खरीदारी की और इसकी कीमतें रूबल में अदा की गईं. ऐसे में रूस के बैंक अकाउंट्स में 50–55 अरब डॉलर के रूबल जमा हो गए हैं. इनका इस्तेमाल पूरी तरीके से नहीं हो रहा है.
भारत ने रूस को दिया रूबल में पेमेंट का ऑफर
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय एक्सपोर्टर्स को रूसी बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में रूस के बनाए गए अपने सख्त नियमों के चलते एक्सपोर्टर्स को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सॉफ्टवेयर का अनिवार्य रूप से लोकलाइजेशन और रूसी साइबर सुरक्षा नियमों का पालन शामिल है. भारत चाहता है कि रूस भारत से आयात बढ़ाए और सामानों के लिए कीमत रूबल में चुकाए. इससे दोनों के बीच कारोबार संतुलित रूप से होगा.
कहां आ रही दिक्कत?
रूस के अपने सख्त प्रोडक्ट स्टैंडर्ड और सर्टिफिकेशन प्रोसेस के चलते इंजीनियरिंग सामानों की शिपमेंट में भी देरी हो रही है. इसके अलावा, खाने के सामान, मछली पालन और कुछ मशीनरी कैटेगरी के लिए रूसी भाषा में डॉक्यूमेंटेशन का पालन करने से निर्यात और धीमा हो गया है.
रूस के साथ ट्रेड इंबैलैंस और व्यापार घाटा को झेल रहा भारत
यही वजह है कि रूस के साथ संतुलित रूप से व्यापार हो, रूसी बाजारों में भारतीय सामानों की पहुंच में आसानी हो, भारत ने रूस के सामने इस मुद्दे को उठाया है. भारत का रूस के साथ बड़ा ट्रेड डेफिसिट बना हुआ है. यानी कि जिस पैमाने पर आयात हुआ है, निर्यात उतना ज्यादा नहीं हो पाया है.
25 अरब डॉलर तक पहुंचा भारत का व्यापार घाटा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में भारत का व्यापार घाटा लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल का भारी आयात माना जा रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कुछ भारतीय रिफाइनरों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर दी है, हालांकि अन्य सप्लायर आगे आने से भारत की जरूरतें पूरी हुईं और घाटा कुछ हद तक संभल पाया है.
पुतिन ने रुपये और रूबल में लेनदेन पर दिया जवाब
वहीं बीते महीने अपने भारत दौरे से पहले एक हिंदी न्यूज चैनल से बातचीत में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रुपये और रूबल में लेनदेन को लेकर पूछे गए सवाल पर साफ कहा कि इसमें कोई बाधा नहीं है और यह पूरी तरह अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला है. हालांकि इस दौरान उन्होंने माना कि भारत और रूस के बीच कारोबार असंतुलित है, लेकिन इसे प्रतिबंधों के जरिए नहीं, बल्कि सुधार के जरिए दुरुस्त करने की जरूरत है.
'संतुलित-टिकाऊ व्यापार बढ़ाने पर जोर'
पुतिन ने कहा कि भारत ने व्यापार में कोई रुकावट पैदा नहीं की है, क्योंकि उसे रूस से तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरकों की जरूरत है. खासतौर पर किसानों के लिए उर्वरकों का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार उनके सामने उठाते रहे हैं. उनके मुताबिक यह सिर्फ रुपये में भुगतान का सवाल नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच संतुलित और टिकाऊ व्यापार बढ़ाने का विषय है.
दोनों देशों को हो समान रूप से फायदा: पुतिन
राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी कहा कि रूस चाहता है कि भारत-रूस व्यापार से दोनों देशों को समान रूप से फायदा हो, न कि केवल एक पक्ष को. इसी दिशा में भारत दौरे के दौरान रूस आयात और निर्यात को बढ़ाने के लिए नई पहल करना चाहता है, जिसमें दोनों देशों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी शामिल होगी.
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उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भारत से रूस कौन-कौन से अतिरिक्त सामान आयात कर सकता है, इस पर काम किया जाए, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को और संतुलित तथा मजबूत बनाया जा सके.
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