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अमेरिका-ईरान के बीच जंग का असर, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, 1 प्रतिशत तक महंगा हुआ क्रूड ऑयल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है. क्रूड ऑयल 1 प्रति तक उछल गया है. इस कारण दूसरी चीजों की कीमतें भी महंगी हो जाएंगी.

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10 Jun 2026
( Updated: 10 Jun 2026
09:00 PM )
अमेरिका-ईरान के बीच जंग का असर, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, 1 प्रतिशत तक महंगा हुआ क्रूड ऑयल
Crude Oil Price Jumped Amid Gulf War/ Image Source: CANVA
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वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार के सत्र में तेजी देखने को मिली. अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किए जाने के बाद ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं बढ़ गईं, जिससे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत तक का उछाल आया.

खाड़ी जंग के कारण तेल की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 93.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया.

तेल की कीमतों में यह तेजी तब आई जब अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल और निगरानी रडार ठिकानों पर "आत्मरक्षा" के तहत हमले किए हैं.

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई क्षेत्र में अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को कथित रूप से मार गिराए जाने की घटना के जवाब में की गई. हालांकि, ईरान ने इस घटना में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया और कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना एक हादसा थी. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बाजारों को उम्मीद थी कि पश्चिम एशिया में तनाव धीरे-धीरे कम होगा. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

अमेरिका के हमलों के कारण हिला निवेशकों का विश्वास

निवेशकों और कारोबारियों का भरोसा भी कमजोर पड़ा, जिसके चलते वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में पिछले सप्ताह लगातार आठवीं बार कमी दर्ज की गई है, जिससे भी तेल की कीमतों को समर्थन मिला है. इस बीच, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखता है तो वह फिर से संघर्ष शुरू कर सकता है.

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इस बीच, तनाव बढ़ने का असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी दिखाई दिया. जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स लगभग 4 प्रतिशत तक गिर गया. वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार भी मंगलवार को कमजोरी के साथ बंद हुए. नैस्डैक कंपोजिट 0.97 प्रतिशत और एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ.

घरेलू शेयर बाजार में दिखी मजबूती

इसके विपरीत, घरेलू शेयर बाजारों में सुबह के कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली. प्रमुख सूचकांकों में शुरुआती कारोबार में करीब 0.5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता आने वाले दिनों में तेल बाजार और वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय कर सकती है

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