हिल स्टेशन्स पर होने वाली भीड़ से हैं परेशान? इस साल बिताएं अपनी गर्मियां उत्तराखंड के छिपे हुए रत्न 'जोहार घाटी' में
पिथौरागढ़ जिले के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में स्थित जोहार घाटी, एक ऐसी जगह है जहाँ लोगों की भीड़ अभी तक नहीं पहुँच पाई है। गोरी गंगा नदी के किनारे फैली यह घाटी तिब्बत सीमा के पास मिलम ग्लेशियर तक जाती है। यहाँ की सुंदरता और गगनचुंबी बर्फीली चोटियाँ आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी। यहाँ आकर आपको ऐसा लगेगा मानो समय ठहर गया हो।
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हर साल गर्मियों की शुरुआत होते ही भारत के प्रसिद्ध हिल स्टेशन्स पर tourists की भीड़ लग जाती है। शिमला हो, मनाली हो या मसूरी की खूबसूरत वादियां, इस भीड़भाड़ में न आप मौसम एन्जॉय कर पाते हैं न ही आपको सुकून मिलता है जिसकी तलाश में आप शहर के शोर शराबे से इतनी दूर आते हैं। अगर आपको भी ऐसा लगने लगा है कि पहाड़ों की शांति अब पहले जैसी नहीं रही, तो उत्तराखंड की जोहार घाटी आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगी।
पिथौरागढ़ जिले के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में स्थित जोहार घाटी, एक ऐसी जगह है जहाँ लोगों की भीड़ अभी तक नहीं पहुँच पाई है। गोरी गंगा नदी के किनारे फैली यह घाटी तिब्बत सीमा के पास मिलम ग्लेशियर तक जाती है। यहाँ की सुंदरता और गगनचुंबी बर्फीली चोटियाँ आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी। यहाँ आकर आपको ऐसा लगेगा मानो समय ठहर गया हो।
कहाँ है जोहार घाटी?
जोहार घाटी की यात्रा की शुरुआत होती है मुनस्यारी से, जो समुद्र तल से 2,298 मीटर की ऊंचाई पर बसा एक खूबसूरत शहर है। पंचाचूली के अलावा नंदा देवी, त्रिशूल, हरदेयोल और नंदा कोट जैसी विशाल और प्रतिष्ठित चोटियों से घिरी इस घाटी से आपको ऐसा मनमोहक नज़ारा देखने को मिलेगा की आप बार-बार इन पहाड़ों की ओर खिंचे चले आएँगे। सुबह सुबह सूरज की किरणें जब इन चोटियों पर पड़ती है तो ऐसा लगता है मानो आप स्वर्ग में आ गए हों।
जोहार घाटी का इतिहास
जोहार घाटी पहले भारत और तिब्बत के बीच एक ट्रेडिंग कॉरिडोर था जिसका इस्तेमाल जोहारी शौका समुदाय करता था। भोटिया जनजाति से ताल्लुक रखने वाले 'जोहारी शौका' समुदाय के लोगों के तिब्बत के साथ अच्छे संबंध थे। यह व्यापारिक मार्ग 1962 के भारत-चीन युद्ध तक बहुत अच्छे से चलता रहा, लेकिन युद्ध के बाद जैसे ही सीमाएं बंद हुईं सदियों से चला आ रहा व्यापार अचानक रुक गया जिससे इस मार्ग पर बसे कई गाँव पर बुरा असर पड़ा। कभी कुमाऊं हिमालय का सबसे बड़ा गांव कहलाने वाले 'मिलम' में आज खँडहर के अलावा आपको कुछ नहीं मिलेगा।
कैसे पहुंचे?
ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए काठगोदाम रेलवे स्टेशन सबसे पास है। मुनस्यारी से इसकी दूरी लगभग 275 किलोमीटर है। काठगोदाम से आप शेयरिंग टैक्सी या प्राइवेट कैब बुक कर के लगभग 8 से 9 घंटे में यहाँ पहुँच सकते हैं। रास्ते में आपको अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे खूबसूरत हिल स्टेशन्स भी मिलेंगे। हवाई यात्रा करने वालों के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर है, जो लगभग 315 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एयरपोर्ट से 10 से 11 घंटे का समय लगा कर आप गंतव्य स्थल तक पहुँच सकते हैं। अगर आप by road यात्रा करने की सोच रहे हैं तो दिल्ली-NCR से लगभग 500 किलोमीटर लंबे और खूबसूरत सफर के बाद आप यहाँ पहुंचेंगे।
इस बात का रखें ध्यान
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जोहार घाटी के भीतरी हिस्सों और मिलम ग्लेशियर की ओर trekking के लिए आपको इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit - ILP) की ज़रुरत पड़ेगी। यह परमिट मुनस्यारी के SDM कार्यालय से जारी किया जाता है। इसके लिए आपको अपने पहचान पत्र की 3 फोटोकॉपी और 3 पासपोर्ट साइज फोटो साथ रखने होंगे।
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