×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

क्या PM मोदी-ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत में जुड़े थे एलन मस्क? रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच अमेरिकी ट्रंप ने मोदी से फोन पर बात की. चर्चा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सुरक्षा शामिल थी, रिपोर्ट में एलन मस्क की भी मौजूदगी बताई गई, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई.

क्या PM मोदी-ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत में जुड़े थे एलन मस्क? रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल
Narendra Modi/ Elon Musk
Advertisement

मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को आज एक महीने का समय पूरा हो गया है. इस युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा सप्लाई भी प्रभावित हुई है. इसको लेकर कई देश चिंतित हैं और युद्ध को खत्म कराने का रास्ता भी खोज रहे हैं. इन सबके बीच एक खबर ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. दरअसल,'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हाल ही में हुई फोन कॉल में दिग्गज अरबपति एलन मस्क भी शामिल थे. हालांकि इस खबर पर अमेरिका या भारत की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

किस बात पर हुई चर्चा?

रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को पीएम मोदी को फोन किया. बातचीत का मुख्य विषय मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति था. ट्रंप ने ईरान युद्ध के लगभग चार हफ्ते बाद यह कॉल की. दोनों नेताओं ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को खुला रखने और मिडिल ईस्ट में सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा की. गौरतलब है कि इस कॉल से एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर से इस विषय पर बात की थी.

एलन मस्क की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा

Advertisement

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा एलन मस्क की मौजूदगी को लेकर है. कहा जा रहा है कि यह कदम कूटनीतिक परंपराओं से हटकर था क्योंकि आमतौर पर युद्ध जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में केवल सरकारी अधिकारी ही बातचीत में शामिल होते हैं. मस्क किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, ऐसे में उनका इस फोन कॉल में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है. रिपोर्ट यह भी साफ नहीं कर पाई है कि मस्क ने बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाई या नहीं, और उन्हें इस कॉल में शामिल क्यों किया गया.

बैकचैनल डिप्लोमेसी का संकेत?

क्या यह बैकचैनल डिप्लोमेसी का संकेत हो सकता है? अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्क की मौजूदगी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनके रिश्तों में सुधार का संकेत हो सकती है. पिछले साल दोनों के बीच मतभेद की खबरें भी आई थीं, लेकिन अब यह घटनाक्रम नए समीकरणों की ओर इशारा करता है. मस्क के बिजनेस हित जैसे स्पेस, ऊर्जा और उभरते बाजार सीधे मिडिल ईस्ट और भारत से जुड़े हैं, जो इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं.

Advertisement

भारत में मस्क की व्यावसायिक योजना

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एलन मस्क भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं. खासकर सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए उन्हें भारत सरकार से मंजूरी का इंतजार है. ऐसे में उनकी मौजूदगी को रणनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है. इस पूरे मामले पर न व्हाइट हाउस ने न ही भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से कोई बयान दिया है. व्हाइट हाउस ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि मस्क की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.

मिडिल ईस्ट की संवेदनशील स्थिति

मिडिल ईस्ट की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. अमेरिका और ईरान-इजरायल के बीच जंग को अब एक महीना पूरा हो चुका है. अमेरिका ने ईरान के कई ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने अमेरिका के 13 बेस तबाह करने का दावा किया है. साथ ही, ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, पर नाकाबंदी कर दी है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है. शिपिंग में बाधा और तेल-गैस की बढ़ती कीमतों ने एशिया समेत कई देशों में सप्लाई चिंताओं को जन्म दिया है.

फोन कॉल के संभावित असर

Advertisement

विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप-मोदी कॉल और मस्क की मौजूदगी से संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत चैनल खुला है, और इस संवाद में नए रणनीतिक विकल्प खोजे जा सकते हैं. वहीं, वैश्विक बाजार और राजनीतिक समीकरण इस समय बेहद संवेदनशील हैं. इस फोन कॉल की गूंज न केवल कूटनीतिक दुनिया में सुनाई दे रही है, बल्कि व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में भी इसके प्रभाव पर लोग नजर रखे हुए हैं.

यह भी पढ़ें

बहरहाल, मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ट्रंप और मोदी के बीच हुई यह बातचीत, एलन मस्क की भागीदारी के साथ, नई बहस और अनुमान की स्थिति पैदा कर रही है. आगे आने वाले दिनों में इस कॉल के परिणाम और मस्क की भूमिका पर कड़ी निगाह रखी जा रही है, जिससे यह साफ होगा कि क्या यह केवल एक औपचारिक बातचीत थी या फिर वैश्विक रणनीति के नए संकेत छिपे हुए हैं.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें