'भारत से रिश्ता अनमोल...', चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, बोले- हमारी तरक्की हमारी मेहनत
भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि भारत-चीन की तरक्की उनकी अपनी मेहनत का नतीजा है, न कि बाहरी मदद का. उन्होंने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए क्रिस्टोफर लैंडौ के बयान पर परोक्ष पलटवार किया.
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भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग (Xu Feihong) ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. 14वें भारत-चीन युवा संवाद को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कहा कि भारत और चीन की तरक्की किसी बाहरी मदद का नतीजा नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों की मेहनत और समझदारी का नतीजा है. उनका यह बयान सीधे तौर पर उन दावों को खारिज करता है, जिनमें चीन के आर्थिक विकास का श्रेय अमेरिका जैसे देशों को दिया जाता रहा है.
अमेरिका पर परोक्ष निशाना
चीनी राजदूत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ (christopher landau) ने रायसीना डायलॉग में चीन को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि अतीत में चीन को आर्थिक बढ़त देने में अमेरिका से गलती हुई. इसी बयान के जवाब में चीन की ओर से यह कड़ा संदेश आया है. हालांकि शू फेइहोंग ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्द साफ तौर पर अमेरिका की ओर इशारा करते नजर आए.
कुछ देश रिश्ता खराब कराना चाहते हैं
अपने संबोधन में चीनी राजदूत ने यह भी कहा कि कुछ ताकतें भारत और चीन के रिश्तों में दरार डालने की कोशिश करती हैं. उनके मुताबिक, ये देश जानबूझकर ‘चीन के खतरे’ का माहौल बनाते हैं ताकि दोनों पड़ोसियों के बीच अविश्वास बढ़े. उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों का मकसद केवल अपना फायदा निकालना होता है, जबकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ता है.
‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ का विजन
राजदूत ने भारत-चीन संबंधों को ‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ की संज्ञा देते हुए कहा कि दोनों देशों को साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और चीन को अच्छे पड़ोसी, दोस्त और भागीदार के रूप में काम करना चाहिए. साथ ही युवाओं से अपील की कि वे बदलती वैश्विक परिस्थितियों में स्वतंत्र सोच रखें और किसी भी तरह के ‘सूचना के जाल’ में फंसने से बचें. उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के दो बड़े विकासशील देशों के रूप में भारत और चीन की भूमिका अब केवल द्विपक्षीय नहीं रह गई है. शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी के बीच हाल की बैठकों के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार आया है और यह एक नए स्तर पर पहुंच रहे हैं. इससे यह साफ होता है कि दोनों देश अब वैश्विक मंच पर भी साथ मिलकर काम करने की दिशा में बढ़ रहे हैं.
नई विश्व व्यवस्था पर फोकस
अपने भाषण के अंत में चीनी राजदूत ने एकतरफा नीतियों और संरक्षणवाद की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. भारत और चीन को ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रमुख देशों के रूप में आगे आना चाहिए और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करनी चाहिए. उनका मानना है कि अगर दोनों देश मिलकर काम करें, तो दुनिया को अस्थिरता और टकराव की दिशा में जाने से रोका जा सकता है.
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बहरहाल, शू फेइहोंग का बयान साफ संकेत देता है कि भारत-चीन रिश्तों को टकराव नहीं, सहयोग की दिशा में आगे बढ़ते देखना चाहते हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देश इस सोच को जमीन पर कितना उतार पाते हैं.
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