मिडिल ईस्ट युद्ध- होर्मुज संकट पर ब्रिटेन ने बुलाई 35 देशों की ‘इमरजेंसी’ मीटिंग, भारत भी हुआ शामिल
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटेन की अगुवाई में बैठक हुई, जिसमें भारत सहित 35 देश शामिल रहे.
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होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने की राह निकालने और इसे दुनिया के लिए सुरक्षित बनाने की मुहिम के तहत ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में बैठक हुई. इसमें भारत भी शामिल हुआ है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में इसकी जानकारी दी.
Weekly Media Briefing by the Official Spokesperson (April 02, 2026)
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 2, 2026
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भारत की ओर बैठक में विक्रम मिस्त्री शामिल
एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यूके की ओर से भारत को भी एक खत मिला है और इसमें हमारी नुमाइंदगी भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री कर रहे हैं. बुधवार को होर्मुज पर अहम बैठक की घोषणा ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने की थी. उन्होंने कहा था कि जल्द ही ये बैठक होगी. गुरुवार को ऑनलाइन मोड में इसका आयोजन किया गया. इस बैठक का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने के रास्ते तलाशना है.
कूपर ने ईरान की कड़ी आलोचना की
बैठक के दौरान कूपर ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "वैश्विक आर्थिक सुरक्षा पर सीधा हमला" बताया. अहम बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान की "लापरवाही" ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर खतरे में डाल दिया है.
यूके का लक्ष्य- व्यापार के लिए समुद्री रास्तों को खोलना
उन्होंने दावा किया कि ब्रिटेन इस संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश में आगे बढ़ रहा है. यूके का लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री रास्तों को फिर से सुरक्षित और चालू करना है, जिसे ईरान ने अमेरिका-इजरायल अभियान के जवाब में निशाना बनाया है.
25 से अधिक जहाजों पर अब तक हमला
कूपर के अनुसार, इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में अब तक 25 से अधिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं. इसके चलते करीब 2,000 जहाजों पर सवार लगभग 20,000 नाविक फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सऊदी, ओमान और इराक के व्यापार मार्गों पर ही नहीं एशिया के लिए लिक्विड नेचुरल गैस, अफ्रीका के लिए खाद और पूरी दुनिया के लिए जेट फ्यूल की आपूर्ति पर असर पड़ा है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा
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ईरान का ये रवैया उन देशों के प्रति है जो इस संघर्ष में कभी शामिल नहीं थे—जिसकी हमने और दुनिया भर के 130 अन्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र में कड़ी निंदा की है. यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा रही है, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब ऊर्जा संकट पहले से गहराता जा रहा है.
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